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मध्यप्रदेश भाजपा देश में बनेगा रोल मॉडल…भाजपा सभी विधायकों, सांसदों और पार्टी पदाधिकारियों को हाईटेक बनाएगी

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भोपाल। भारत ही नहीं पूरा विश्व जब आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया प्लेटफार्म का उपयोग कर अपने आप को आगे रखने की दौड़ में लगा है ऐसे में संभवत: विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी भला पीछे क्यों रहे। इक्कीसवीं सदी में अब भाजपा सभी विधायकों, सांसदों और पार्टी पदाधिकारियों को हाईटेक बनाएगी। यही वजह है कि प्रदेश भाजपा हाईकमान ने नवाचार करते हुए अपने सभी विधायकों व पार्टी पदाधिकारियों को सोशल मीडिया के ज्यादा से ज्यादा उपयोग को लेकर गाइडलाइन जारी कर दी है। जिसमें कहा गया है कि सोशल मीडिया को महज प्रचार-प्रसार और वार-पलटवार के दायरे तक ही सीमित न रखा जाए बल्कि इस प्लेटफार्म को वे अपने रोज के कामकाज का हिस्सा बनाएं। ग्रुप के बीच भी यह कम्युनिकेशन का बड़ा माध्यम है। भाजपा के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने इस संबंध में जो निर्देश जारी किए हैं उसमें कहा गया कि फेसबुक और व्हाट्सएप सहित सोशल मीडिया के अन्य सभी प्लेटफार्म का उपयोग केवल अपने प्रचार प्रसार और वार पलटवार के लिए नहीं बल्कि इसे अपने रोजाना के कामकाज का हिस्सा बनाएं और कार्यकर्ताओं सहित ही इसे टारगेट ग्रुप के सदस्यों की सूची बनाकर उनसे निरंतर संवाद का माध्यम बनाएं। दरअसल भाजपा इस नवाचार के जरिए लोगों को इंटरनेट मीडिया के माध्यम से अपनी समस्याएं बताने की सुविधा पार्टी देने जा रही है। इससे लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाने जैसी परेशानियों का भी समाधान हो सकेगा। इसके तहत अब आवेदक या शिकायतकर्ता को इसके लिए विधायक के पार्टी कार्यालय तक नहीं जाना होगा और न ही राजधानी अथवा अन्य बड़े शहरों में स्थित कार्यालय या मंत्रालय के बार-बार चक्कर काटने पड़ेंगे। खास बात यह है कि पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नवाचार की शुरूआत मध्यप्रदेश से की जा रही है।
पार्टी की रीति-नीति में ही चलें कार्यकर्ता
हाल ही में उज्जैन में आयोजित दो दिनी प्रशिक्षण शिविर में भाजपा विधायकों, मंत्रियों और कार्यकर्ताओं को नसीहत दी गई। टिकट के लिए भी सीमा रेखा तय कर दी गई। उन्हें स्पष्ट तौर पर कहा गया कि खुद को अनुशासन में ना रखने, संगठन में समरस न रहने तथा समर्पण के लिहाज से बदलाव ना कर पाने वालों को पार्टी टिकट नहीं देगी। जो साथी कांग्रेस की रीति-नीति या बतौर निर्दलीय अब तक सियासत करते रहे हैं उन्हें अपने अंदाज में बदलाव लाना ही होगा। भाजपा खेमे अथवा व्यक्ति विशेष के आभामंडल वाली पार्टी नहीं बल्कि संगठन आधारित पार्टी है। इसके लिए पार्टी की रीति नीति के मुताबिक खुद में बदलाव जरूरी है। पार्टी कार्यकर्ता को जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना है। उन्हें जनता के बीच जाकर सक्रियता भी दिखानी है और व्यवहार में बदलाव भी करना है। दरअसल संगठन का प्रबुद्ध वर्ग मानता है कि कांग्रेस से भाजपा में आए विधायक अभी भी अपने आभामंडल से ही क्षेत्र में प्रभाव जमाना चाहते हैं जो भाजपा की रीति नीति के विपरीत है। भाजपा विधायक लोगों के बीच जाकर उनसे घुल मिलकर अपनी पहचान मजबूत करते रहे हैं। बदलाव ना करवाने वाले विधायकों को प्रशिक्षण वर्ग के दौरान स्पष्ट संकेत दिए गए हैं यदि उन्हें अपनी विधायकी बनाए रखना है तो बदलाव लाने ही होंगे।
पेपरलैस कार्यों में देश का रोल मॉडल होगा मप्र
प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा नवाचार के माध्यम से प्रदेश को हाईटेक बनाने जा रहे हैं। दरअसल वे प्रदेश संगठन को देश का रोल मॉडल बनाना चाहते इससे आम जनता को राहत मिलेगी। लोगों का पार्टी से जुड़ाव बढ़ेगा वहीं पार्टी कार्यालयों में लगने वाली भीड़ भी कम होगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों की बातें व समस्याएं पार्टी तक पहुंच सकेंगीं। यही वजह है कि अब प्रदेश में भाजपा के विधायकों और पार्टी के सभी कार्यालयों को पेपरलेस करने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। शर्मा का मानना है कि चूंकि लोकसभा पेपरलेस हो रही है इसलिए मप्र भाजपा और जनप्रतिनिधियों को भी पेपरलैस करने की तैयारी पर काम किया जा रहा है।
जो नेता इंटरनेट पर सक्रिय रहेगा वही बचेगा
प्रदेश प्रभारी पी मुरलीधर राव स्पष्ट तौर पर हिदायत दे चुके हैं कि अब आगे जो नेता इंटरनेट पर सक्रिय रहेगा वही बचेगा। इसमें पिछड़ने वालों के लिए भविष्य में राजनीति में जगह बचा पाना मुश्किल होगा। उन्होंने इसका उपयोग लोगों की समस्याओं के समाधान मदद और लगातार संपर्क के लिए करने को कहा है। इसके उपयोग से कोई भी जानकारी, शिकायत, मदद के आवेदन विधायक और पार्टी पदाधिकारियों को तत्काल मिलेंगे। जिससे समाधान की कार्रवाई भी तेज होगी।

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