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सेंचुरी-मनजीत कंपनियों के साथ श्रमिकों के संघर्ष को औद्योगिक -विवाद होना मंजूर:- मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

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उच्च न्यायालय ने दिया निर्देश- औद्योगिक न्यायालय की भूमिका होगी
सेंचुरी की यार्न और डेनिम मिल्स को मंजीत कॉटन और मनजीत ग्लोबल को बेचना दूसरी बार किया गया फर्जीवाड़ा है और औद्योगिक कानूनो का पालन न करते हुए मिल्स बेचना एक साजिश है। यह समझ कर 850 से अधिक श्रमिक आज भी संघर्षरत है। इन कंपनियों के बीच हुई रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी का भुगतान आदि मे कानूनी उल्लंघन तो साबित है ही उसकी जांच की भी मांग है। श्रमिक जनता संघ के सदस्य श्रमिकों की
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में जो याचिका अपील खंडपीठ के समक्ष दाखिल की थी उसमे न्यायाधीश सुजोय पाॅल की खंडपीठ ने फैसला देते हुए एक विशेष बात कही है:- “सेंचुरी के पूर्व के श्रमिकों ने उठाए मुद्दे औद्योगिक विवाद के दायरे में आते हैं और इस पर निराकरण की प्रक्रिया औद्योगिक न्यायालय के द्वारा हो सकती है। उच्च न्यायालय ने यह निर्णय घोषित करने से यह साबित होता है कि कुछ महीने पहले जब इसी रोजगार के अधिकार के मुद्दे पर सेंचुरी के मिल्स बंद करने की और श्रमिकों को मिल देने के विकल्प पर पीछे हटने के खिलाफ विवाद प्रस्तुत किया था। तब इस पर श्रम आयुक्त की ओर से यह औद्योगिक विवाद की परिभाषा में नहीं आ सकता है। यह निर्णय देकर न्यायालय प्रक्रिया रोक दी थी। लेकिन उच्च न्यायालय के श्रमिक जनता संघ की याचिका में 14 सितंबर के रोज पारित किए गए फैसले से वह निर्णय ही अब गलत साबित हुआ है। फैसले में स्पष्ट किया है कि औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 2(K) के तहत यह मुद्दे निश्चित ही स्वीकृत होकर औद्योगिक न्यायालय योग्य प्रक्रिया द्वारा उनकी दखल लेकर न्याय करेगा। सर्वोच्च अदालत के वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट संजय पारीक जी ने उच्च न्यायालय में श्रमिकों की ओर से पैरवी की एडवोकेट अभिमन्यु श्रेष्ठ एडवोकेट प्रत्यूष मिश्र ने सहयोग दिया।
उच्च न्यायालय ने स्वयं विवाद पर जांच या राज्य शासन को हस्तक्षेप के आदेश अन्यथा नहीं दिए हैं क्योंकि निजी कंपनी के संबंध के विवाद में राज्य सरकार और उच्च न्यायालय “औद्योगिक न्यायालय की प्रक्रिया के द्वारा ही हस्तक्षेप कर सकते हैं, जबकि श्रमिक जनता संघ का यह मानना है कि श्रमिकों के और उद्योगपतियों के बीच उठे एक नहीं कई सारे विवाद 1947 के औद्योगिक विवाद अधिनियम के द्वारा छुड़वाने के लिए भी श्रम आयुक्त याने राज्य सरकार की भूमिका अहम रहेगी। क्या मध्य प्रदेश सरकार यह जानती नहीं कि मनजीत कंपनी ने रोजगार बचाने के बदले मिल्स की संपदा 426 नहीं तो भी 350 करोड़ के होते हुए उसे खरीदना मात्र किया है। क्या मनजीत की इन दो कंपनियों को चलाने की तैयारी है? क्या उनके पास इसका अनुभव तथा विशेषता है?? क्या अनुभवी और प्रशिक्षित श्रमिक मजदूर व कर्मचारियों की जगह पर मनजीत सिंह चलाएंगे स्पिंडल? या सेंचुरी ने 2016 में निकाल दिए हुए पुराने श्रमिकों को बुलाकर ही करेंगे काम?
श्रमिक जनता संघ रोजगार खत्म करके अपनी मुनाफाखोरी बढ़ाने वाली राह पर नहीं चलने देगा। यह निश्चित साथ ही श्रजसं रोजगार या VRS इस बुनियादी सवाल का जवाब देने के लिए देशभर के श्रमिकों की छटनी और जीवन भर की पीसना मंजूर नहीं है। सेंचुरी में 25 वर्षों तक योगदान और श्रमदान दिए श्रमिकों को।
हर मोर्चे पर कानूनी लड़ाई और मैदानी संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। सैकड़ों श्रमिक और महिलाओं ने मुंबई आगरा हाईवे पर मिल के सामने इकट्ठे होकर।

मेधा पाटकर, उषा महिले, संतलाल दिवाकर, चंचला सोनेर,

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