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मध्यप्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा हो रही मेली…. शिवराज सरकार के वादे आज भी जमी पर नही उतरे

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अशोक रघुवंशी ….
इन्दौर क्या होगा मध्यप्रदेश का अगर माँ नर्मदा का जल दूषित हो जाएगा ?
सोच के सिहर उठता है मन।
लगातार नर्मदा के उदगम स्थल अमरकंटक से गुजरात तक दोनों किनारों पर बढ़ती बसाहट का मेला नर्मदा जल में मिल रहा है और इसकी रोकथाम के लिए सरकार ने अभी तक कोई प्रयास शुरू नही किये है।
*2013 में भी हमने इस डरावनी हकीकत से सरकार को चेताया था। जब *मुख्यमंत्री ने जनता से वायदा किया था कि नर्मदा किनारों के दोनों ओर अलग से सीवरेज लाइन डाली जाएगी। और नर्मदा में मिलने वाले दूषित जल को रोका जाएगा।* लेकिन आज 10 वर्ष बीत जाने के बावजूद इस योजना पर कोई काम शुरू नही किया गया। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को घोषणावीर की उपाधि से नवाजा है तो क्या कांग्रेस सही है?
उज्जैन में करोड़ो रूपये फूक दिए गए महाँकाल लोक बनाने में ओर अब इसी तरह ओम्कारेश्वर में शंकराचार्य जी की मूर्ति ओर विकास के नाम पर करोड़ो फुकने की तैयारी चल रही है। ओम्कारेश्वर का विकास कर लाखो श्रद्धालुओ को आमंत्रित करने से पहले सरकार को ये भी देखना चाहिए कि जब देश के कोने कोने से श्रद्धालु यहाँ आएंगे तो उनके लिए ओमकरजी में उनके लिए उचित व्यवस्था है ? और जब लाखो श्रद्धालु आएंगे तो उनका मेला कहाँ जाएगा ?
सरकार को चाहिए सर्वप्रथम माँ नर्मदा को जीवित रखने प्रयत्न शुरू करे। वर्ना हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए माँ नर्मदा भी किताबो तक सीमित होकर रह जायेगी। उदाहरण के रूप में इन्दौर की कान्हा के हाल हम देख रहे है। वर्षो से नदी शुद्धिकरण के नाम पर अधिकारी व नेता सिर्फ पैसा बना रहे है परिणाम आज भी शून्य ही है

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