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*मंडी सचिव नरेश परमार की किसान संगठनों ने ईओडब्ल्यू से की शिकायत*

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 *निर्माण से लेकर मंडी टैक्स तक में परमार ने किए हैं कई घोटाले,पूरे कार्यकाल की जांच की मांग* 

इंदौर संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान संगठन किसान संघर्ष समिति और भारतीय किसान मजदूर सेवा ने इंदौर कृषि उपज मंडी के सचिव नरेश परमार एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारी द्वारा मंडी शुल्क की चोरी तथा निर्माण से लेकर अन्य कार्यों में हो रहे घोटालों की शिकायत आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के डायरेक्टर जनरल और इंदौर में स्थित पुलिस अधीक्षक को की है तथा उनके पूरे कार्यकाल की और संपत्ति की जांच की मांग की है। किसान संगठनों का आरोप है कि इंदौर में पदस्थ मंडी सचिव और उनके अधीन तमाम मंडियों  के प्रभारी की दौलत  आय से कई गुना अधिक बड़ी हुई है यदि इनकी जांच होती है तो मंडियों में किया जा रहे बड़े घोटाले की खुलासा होगा और एक बड़े भ्रष्ट रेकेट का पर्दाफाश भी होगा। साथ ही मध्यपदेश के खजाने में मंडी टैक्स की आय भी बढ़ेगी ।

किसान संघर्ष समिति मालवा निमाड़ के सयोजक रामस्वरूप मंत्री तथा भारतीय किसान मजदूर सेना मध्यपदेश के अध्यक्ष बबलू जाधव , शैलेंद्र पटेल ने बताया कि मंडी सचिव नरेश परमार प्रभारी राजू कुवाल और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारी द्वारा मंडी टैक्स की की जा रही चोरी तथा अन्य घोटालों की शिकायत आज श्री उपेंद्र जैन* डायरेक्टर जनरल,अपराध अन्वेषण ब्यूरो  भोपाल,और *श्री रामेश्वर सिंह यादव*, एसपी, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ,इंदौर को करते हुए व्कृषि उपज मंडी इंदौर के सचिव नरेश परमार द्वारा इंदौर की तीनों मंडियों में भारी भ्रष्टाचार की औरसभी की संपत्ति की जांच करने की मांग की है ।

शिकायत में कहा गया है कि  हम संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान संघर्ष समिति और भारतीय किसान मजदूर से ना के पदाधिकारी हैं  किसानों को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं । इंदौर में प्रदेश की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडियां हैं, जहां पर पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा कृषि उपज की आवाजाही होती है तथा व्यापार होता है, लेकिन मंडी सचिव नरेश परमार की मनमानी और घोटाले के चलते यह मंडी बदनाम हो रही है। मंडी टैक्स की भी लगातार चोरी हो रही है । मंडी टैक्स वसूला तो जाता है लेकिन उसकी रसीद नहीं दी जाती है और वसूली गई राशि में से अधिकांश राशि का मंडी प्रभारी और मंडी सचिव में बटवारा हो जाता है ।जब से नरेश परमार इंदौर में आए हैं तब से मंडियों के निर्माण कार्यों में और मंडी के दैनंदनी कामों में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है । यदि उनके पूरे कार्यकाल की जांच की जाए तो करोड़ों रुपए का भष्टाचार उजागर हो सकता है ।

उनके भ्रष्टाचार का जीता  जागता उदाहरण मंडी में अवैध नरेश परमार स्वयं खुद लेन देन ना करते हुए अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के माध्यम से लेनदेन करते हैं । इनकी शह पर ही चोइथराम मंडी, छावनी मंडी और लक्ष्मी नगर मंडी में चोरी की घटनाएं हो रही है । किसानों का माल चुरा लिया जाता है और उसे फिर बेच दिया जाता है । जो कांटे लगे हुए हैं उन पर भी इनका कोई नियंत्रण नहीं है और वह किसानों से प्रति कुंतल  आधा किलो से 1 किलो उपज ज्यादा लेते हैं ।

आपने बताया कि मंडी से छोटे-छोटे व्यापारियों का खत्म कर बड़े माफिया टाइप के व्यापारियों के अधिकार में पूरा मंडी का व्यापार दिए जाने की नीयत से ही इन्होंने मंडी लाइसेंस की फीस भी ₹5000 से ₹300000 कर दी ताकि छोटे व्यापारी व्यापार से ही बाहर हो जाए। बताया जाता है कि यह संशोधन मंडी में कार्यरत कुछ बड़े व्यापारियों के इशारे पर किया गया है और इसमें मंडी सचिव ने बड़ी राशि ली है। 

इस शिकायत के साथ चोइथराम मंडी छावनी मंडी और लक्ष्मी नगर मंडी में इनके कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों के टेंडर घोटाले और अन्य घोटाले के दस्तावेजी सबूत हमारे पास उपलब्ध है ।यदि ईओडब्ल्यू उनके पूरे कार्यकाल की जांच कराएगी तो कई बड़े घोटाले सामने आएंगे और उनकी दौलत भी इस तरह से बड़ी है उसका भी खुलासा होगा।

इंदौर की मंडियों को बचाने किसने की सुरक्षा तय करने और भ्रष्ट मंडी सचिव एवं अधिकारियों को इंदौर से हटाए जाने को लेकर शुरू किए गए आंदोलन का किसान मोर्चा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी समर्थन किया है जहां राकेश टिकेत

 ने इस संबंध में सरकार को चेतावनी दी है माही माही किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व विधायक डॉ सुनील एम ने भ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मंडी सचिव को तत्काल हटाए जाने की मांग की है अन्यथा किसान नेताओं पर दर्ज की गई फिर को पूरे मध्य प्रदेश का बड़ा मुद्दा बनाया जाएगा और रीमा कटनी जबलपुर और प्रदेश में अगले माह होने वाली किसान महा पंचायत में इस पर बड़े आंदोलन की रूपरेखा बनाई जाएगी।

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