अनुज मिश्रा एवं आरके जैन
कानपुर के रियल एस्टेट व्यापारी मनीष गुप्ता की गोरखपुर के एक होटल में मृत्यु स्तब्ध कर देने वाली है। गोद मे चार साल के अबोध शिशु को लेकर उनकी पत्नी का दारुण विलाप सामान्य जन को ही नहीं वैरागियों को भी विचलित करने वाला है। वे विलाप करते हुए कह रही हैं कि उनके पति की पुलिस वालों के द्वारा हत्या की गयी है उन्हें न्याय चाहिए। न्याय कौन देगा। पुलिस के इस नृशंस अपराध की जाँच एक दूसरी पुलिस करेगी। न्याय कैसे मिलेगा । सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमे गोरखपुर के जिलाधिकारी एवम एसएसपी पीड़ित परिवार को समझा रहे हैं कि पति के हत्या का मुकदमा मत लिखवाइए । यदि यह वीडियो सही है तो पीड़ित महिला को न्याय मिलने की आशा और क्षीण हो जाएगी। अब तो इस बात की भी जाँच होनी चाहिये कि दोनों अधिकारी किसके कहने पर पीड़ित परिवार पर मुकदमा न दर्ज कराने का दबाव बना रहे थे।
एक संवेदनशील भारतीय नागरिक की हैसियत से मेरा माननीय मुख्यमंत्री जी से विनम्र अनुरोध है कि इस घटना की ज्यूडिशियल इन्क्वायरी करवाकर अपराधियों को ऐसी मिसाल देने वाली सजा दें जिससे किसी निर्दोष की जान लेने के पहले अपराधी हज़ार बार सोंचें तभी कानून व्यवस्था में नम्बर वन के आपके दावे को जनता स्वीकार करेगी।पुलिसकर्मियों की बेरहमी से एक निर्दोष की और जान चली गई तथा एक हँसता खेलता परिवार और बर्बाद हो गया । पुलिस की बेरहमी व ज़्यादातियो में एक नाम और जुड़ गया।
मुझे इस घटना से अमेरिका के जार्ज फ़्लायड की याद आ गई जिसे एक पुलिसकर्मी ने बेरहमी से मार डाला था।इस घटना से पूरे अमेरिका में बवाल मच गया था और अमेरिकन राष्ट्रपति को छुप कर जान बचानी पड़ी थी । अमेरिका की पुलिस ने सड़कों पर घुटनों के बल बैठकर जार्ज फ़्लायड के परिवार और अमेरिकी जनता से माफ़ी मॉगी थी। अमेरिका की न्याय पालिका ने भी तेज़ी दिखाते हुऐ दोषी पुलिस कर्मी को 20 साल की सजा सुनाई और जार्ज फ़्लायड के परिवार को 20 करोड़ अमेरिकन डॉलर का मुआवज़ा देने का आदेश दिया था ।
यह सब इसलिए हो सका कि वह एक सभ्य ,जागरूक और अपने अधिकारों को जानने वाला समाज है । वह जानते हैं कि अगर आज इसे सहन कर लिया गया तो अगला निशाना हम भी बन सकते है ।
अब हमने देश की बात करते हैं । आज़ादी के 74 साल बाद भी हम न तो जागरूक बन सके और न ही अधिकारों को जान सके। सभ्य समाज बनने में तो हमें अभी कई सदियाँ और लगेगी क्योंकि अभी हमारे अंदर के जाति, धर्म और ऊँच नीच के कीटाणुओं को ख़त्म होने में समय लगेगा । हमारा शासन/ प्रशासन यह बात जानता है और इसलिए ऐसी घटनाओं पर न रोक लग सकती हैं और न ही कोई जन चेतना जाग सकती हैं ।
दरअसल हमारे सभी शासक नौकरशाहों/पुलिस फ़ोर्स के बल पर ही शासन करना जानते है । जनता आवाज़ न उठाये, अधिकार न माँगे, सवाल न करे और यह सब तभी हो सकता है कि जब जनता डरकर व सहम कर रहे और प्रशासन व पुलिस यही काम करते है । हमारे यहॉ पुलिस जनता की रक्षक कम बल्कि जनता को भयभीत करने का काम ज़्यादा करती है और इसलिए आम जन पुलिस में कोई शिकायत भी बड़ी मजबूरी में करता है । हमारे यहॉ का प्रशासन व पुलिस बल सत्ता के इशारों पर ही काम करता है और हम देखते भी रहते है कि सत्तारूढ़ दल के स्थानीय नेताओं की नेतागीरी कलक्टरेट/पुलिस थाने के दम पर ही चलती हैं । आम जन व संविधान के प्रति प्रशासन व पुलिस की न कोई जवाब देही है और न ही इसकी ज़रूरत ये समझते है और तभी सत्ता निरंकुश बनतीं हैं व मनमानी करती है। हमारी नौकरशाही व पुलिस प्रशासन की जवाबदेही यदि संविधान व आम जनता के प्रति हो तो कोई भी सत्ता न निरंकुश हो सकती हैं और न ही मनमानी कर सकती हैं ।
प्रशासन व पुलिस बल जब तक स्वायत्त नहीं होंगे और उनकी जवाब देही संविधान तथा जनता के प्रति नहीं होगी तब तक मनीष गुप्ता की हत्या जैसी घटनाऐ रूक नहीं सकती और आम जनता को क़ानून का राज नसीब नहीं हो सकता और इन्साफ़ भी सत्ता का मोहताज बना रहेगा । जनता जब तक जागरूक नहीं होगी और अपने अधिकारों को नहीं जानेगी तब तक किसी बदलाव व क़ानून के राज की उम्मीद करना बेमानी है और हम कुछ भी सहन करने के लिए विवश रहेंगे ।
‘खाकी वाला गुंडा है जेएन सिंह’एक साल में ही जेएन सिंह पर तीसरी बार लगा है पीटकर मारने का आरोप

गोरखपुर। गोरखपुर जिले में लंबे समय से तैनात एसएसओ जगत नारायण सिंह के कारनामों की लंबी लिस्ट है परंतु उच्चाधिकारियों के चहेते होने के चलते अब तक वह बचता चला आया है। जेएन सिंह के खिलाफ पहले भी पुलिस हिरासत में पीटाई से मौत के आरोप लगते रहे लेकिन मुकदमा अब जाकर पहली बार दर्ज़ हुआ है।
शुभम उर्फ सोनू कुमार का मामला
बांसगांव इंस्पेक्टर रहने के दौरान 7 नवंबर 2020 को भी जेएन सिंह पर गंभीर आरोप लगे थे। बांसगांव थाने में विशुनपुर निवासी मुन्ना प्रसाद के बेटे शुभम उर्फ सोनू कुमार के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज था। पुलिस ने उसे बीते 11 अक्तूबर 2020 को डिघवा तिराहे से गिरफ्तार कर लिया और जेल भिजवा दिया। 7 नवंबर को जेल में मौत हो गई। इस मामले में पुलिस की पिटाई से शुभम की मौत का आरोप लगा था। विभिन्न संगठनों ने धरना प्रदर्शन किया था। जिसके बाद में तत्कालीन चौकी इंचार्ज को निलंबित किया गया जबकि जेएन सिंह केस मैनेज कर ले गया। परिजनों की आवाज को दबा दिया गया। उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
गौतम सिंह की मौत का मामला
बीती 13 अगस्त को भी रामगढ़ताल पुलिस पर 20 वर्षीय गौतम सिंह की पुलिस कस्टडी में संदिग्ध हालात में मौत का आरोप लगा था। बाद में पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया था। इसमें गायघाट बुजुर्ग में प्रेमिका से मिलने गए युवक की लाश मिली थी। पुलिस का कहना था कि लड़की के परिवार वालों ने पीटकर हत्या कर दी। जबकि परिजनों का आरोप था कि युवक की मौत पुलिस की पिटाई से हुई है। इस मामले को जेएन सिंह मैनेज कर ले गया और इसमें पुलिस के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था।
मनीष गुप्ता की हत्या का मामला
रामगढ़ताल इलाके के तारामंडल रोड पर स्थित एक होटल में ठहरे कानपुर के बर्रा के व्यापारी मनीष गुप्ता (36) की सोमवार की देर रात पुलिस की पिटाई से उसकी मौत हो गई। भारी जनदबाव में इस मामले में प्रभारी निरीक्षक जगत नारायण सिंह व चौकी इंचार्ज सहित छह पुलिस कर्मी निलंबित कर दिए गए हैं। हत्या का मामला दर्ज हुआ है।
जिस पर नहीं था केस उसे मुठभेड़ में मारी गोली
बीते 21 अगस्त को क्राइम ब्रांच और रामगढ़ताल पुलिस ने एक बदमाश सिकंदर को मुठभेड़ में गोली मारी थी। दावा था कि सिकंदर ने ही 16 अगस्त की दोपहर में कैश मैनेजमेंट सिस्टम के कर्मचारी नवनीत मिश्रा की आंखों मे मिर्च पाउडर झोंककर 5.28 लाख रुपये लूट की थी। पुलिस ने लूट के 1.50 लाख रुपये,घटना में इस्तेमाल बाइक और 315 बोर का तमंचा बरामद करने का दावा किया था। इस घटना के 4 दिन पहले ही यह बात सामने आ चुकी थी कि पुलिस ने एक मुखबिर को थाने में बैठा रखा है। खास बात यह कि मुठभेड़ के बाद ही सिकंदरपर पहला केस भी दर्ज हुआ। इससे पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।
एनकाउंटर किंग बनने की सनक ने बनाया अंततः अपराधी
जेएन सिंह एनकाउंटर का शौकीन है। एसटीएफ में रहने के दौरान जेएन सिंह ने 9 बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया है। जबकि गोरखपुर जिले में तैनाती के दौरान वह यहां अब तक चार बदमाशों के पैर में गोली मार गिरफ्तार कर चुका है। जेएन सिंह अपनी एनकाउंटर खूबी की बदौलत ही सिपाही से आउट ऑफ प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर की कुर्सी तक पहुंचा है।