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तिब्बती जन क्रांति दिवस के मौके पर शहीदों को याद किया गया

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रीवा   ।  तिब्बती जन क्रांति दिवस के उपलक्ष्य में गुरुवार 10 मार्च को स्थानीय जय स्तंभ चौक में दीप प्रज्वलित करके तिब्बत की आजादी और भारत की सुरक्षा के सवाल को परस्पर पूरक बताते हुए भारत तिब्बत मैत्री संघ एवं विभिन्न जन संगठनों की ओर से आयोजित कार्यक्रम में अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई । भारत तिब्बत मैत्री संघ की मध्य प्रदेश राज्य इकाई के अध्यक्ष अजय खरे ने कहा है कि यह ऐतिहासिक सच्चाई है कि भारत का पड़ोसी चीन नहीं , तिब्बत है । 63 साल पहले चीन के द्वारा तिब्बत की आजादी छीने जाने से उसका स्वतंत्र वजूद खत्म है । तिब्बत में रह रहे लोगों एवं निर्वासित तिब्बतियों के लिए यह गहरी चिंता एवं आक्रोश का विषय है । जिसके चलते अनेक तिब्बती आत्मदाह जैसे आत्मघाती कदम उठाने को विवश हो जाते हैं । श्री खरे ने कहा कि हम आत्मदाह के पक्षधर नहीं हैं लेकिन तिब्बत की आजादी के लिए हर तिब्बती की आंतरिक भावनाओं का सम्मान करते हैं।  बीसवीं सदी में जब दुनिया के अधिकांश देश आजाद हो रहे थे तब साम्राज्यवादी चीन के द्वारा तिब्बत को गुलाम बना लिया जाना और 21वीं सदी में भी उसे गुलाम बनाकर रखना दुनिया के आजादी के पक्षधरों एवं शांतिप्रिय लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती है ।  ऐसी परिस्थितियों में तिब्बती गायिका त्सेवांग नोरबू के द्वारा तिब्बत मुक्ति के लिए आत्मदाह करने का समाचार अत्यंत मार्मिक और पीड़ा जनक है ।  तिब्बती गायिका त्सेवांग नोरबू के द्वारा तिब्बत की आजादी के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान का हम सम्मान करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं ।

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