महाकौशल में बारिश का कहर; बाढ़ के चलते मंडला-डिंडोरी में स्कूलों की छुट्टी घोषित, कई नदियां खतरे से निशान से ऊपर
भारी बारिश के चलते महाकौशल के कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बाढ़ और बारिश के चलते मंडला और डिंडोरी में स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है। कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई हाईवे का संपर्क टूटा गया है।
मानसून के सक्रिय होने के कारण महाकौशल के जिलों में बारिश का कहर जारी है। मौसम विभाग ने महाकौशल के जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है। नर्मदा सहित कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मंडला और डिंडोरी में बारिश के कारण स्कूलों में 5 जुलाई तक अवकाश घोषित कर दिया गया है। नदी के पुलों में पानी होने के कारण कई जिलों के बीच सड़क संपर्क टूट गया है।
बाढ़ से कई हाईवे में यातायात ठप
डिंडोरी जिले के गोरखपुर कस्बे के पास सिवनी नदी का पुल डूबने से जाने के कारण जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे बंद हो गया है। खरमेर नदी के बढ़े जलस्तर के कारण अमरपुर जनपद का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। सुरक्षा की दृष्टि से पुल पर पुलिसकर्मी तैनात किया गया है। थावर नदी उफान पर है और पानी पुल के उपर पहुंच गया है। जिससे कारण पिंडरई से केवलारी मार्ग पर आवागमन बंद है।
बारिश के कारण शहर की सड़कें तालाब में तब्दील हो गयी है। बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस गया। अस्पताल परिसर में घुटने तक पानी भरने से परेशानी हो रही है। नगर पालिका कर्मचारी जेसीबी मशीन का उपयोग कर पानी निकाल रहे हैं।
औसत से दोगुनी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों में 118.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। डिंडौरी में सर्वाधिक 34.2 मिलीमीटर और समनापुर में न्यूनतम 1.4 मिलीमीटर वर्षा हुई। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष दोगुनी बारिश हुई है। इस साल बारिष का आंकडा 1633 मिलीमीटर पहुंच गया है। पिछले वर्ष आज के दिन तक बारिष का आंकडा आंकड़ा 822 मिलीमीटर था।
बारिश से जनजीवन प्रभावित
जबलपुर-मंडला में बारिश के कहर से लोगों को जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। जिले के कई गांव में पानी भरने के कारण लोग वोट के माध्यम से सुरक्षित स्थानों में पहुंचाया गया। नदियों के पुल में पानी होने कारण कई मार्ग में आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है।
250 ग्रामीण को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया
जिला पंचायत मंडला के सीईओ श्रेयांस कुमट ने बताया कि गांवों में बारिश का भारी भर पर ग्रामीणों की सुरक्षा का ध्यान रखा गया। सुरक्षा की दृष्टि से दस गांव के ढाई सौ से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान में पहुंच गया है। लोगों के लिए पंचायत भवन में पुनर्वास केन्द्र बनाये गये थे। प्रशासन के दौरान उनके भोजन की व्यवस्था की गई। इसके अलावा तीन स्थानों में वोट के माध्यम से रेस्क्यू कर लोगों को सुरक्षित स्थान में पहुंचाया गया।
4 लीटर पेंट के लिए 168 मजदूर और 65 राजमिस्त्री, एमपी के स्कूलों में अजब-गजब का ‘खेल’
मध्य प्रदेश के एक स्कूल में पेंट घोटाला का मामला सामने आया है। यहां पर 4 लीटर पेंट की पुताई करने के लिए 168 मजदूर और 65 राजमिस्त्री को काम पर रखा गया था। इसका बिल सामने आया है।

मध्य प्रदेश को अजब गजब क्यों कहते हैं, इसका एक उदाहरण सामने आया है। शहडोल जिले में एक स्कूल में सिर्फ 4 लीटर पेंट लगाने के लिए 168 मजदूरों को भुगतान किया गया। ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र के सकंदी और निपानिया गांव के स्कूलों में यह मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर बिल वायरल होने के बाद इस घोटाले का पता चला। आरोप है कि अधिकारियों ने मिलकर सरकारी पैसे का गलत इस्तेमाल किया है।
दरअसल, शहडोल जिले के ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र के शासकीय हाई स्कूल सकंदी में एक अजीब बिल सामने आया है। इस बिल में दिखाया गया है कि 4 लीटर ऑयल पेंट से पुताई करने के लिए 168 मजदूर और 65 राजमिस्त्री लगे थे। इसके लिए 1,06,984 रुपये का भुगतान भी किया गया। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मरपाची ने यह राशि सरकारी खजाने से निकाली। इसी तरह, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय निपनिया में भी गड़बड़ी हुई। यहां 20 लीटर ऑयल पेंट से पुताई करने, 10 खिड़कियां लगवाने और 4 दरवाजों की फिटिंग के लिए 275 मजदूर और 150 राजमिस्त्री लगाए गए। इसके लिए 2,31,685 रुपये निकाले गए।
सबसे हैरानी की बात यह है कि जिन गांवों में ये स्कूल हैं, वहां इतने मजदूर और राजमिस्त्री हैं ही नहीं। यह भी पता चला है कि बिल पर प्राचार्य (Principal) निपनिया के दस्तखत 4 अप्रैल 2025 को हुए हैं, जबकि सुधाकर कंस्ट्रक्शन ओदारी ने बिल 5 मई 2025 को तैयार किया। यानी बिल बनने से एक महीना पहले ही प्राचार्य ने उसे सत्यापित कर दिया था। इससे कई सवाल खड़े होते हैं। जिले के ट्रेजरी ऑफिसर ने भी बिना जांच किए बिल का भुगतान कर दिया।
फोटो के साथ बिल जमा करने पर भुगतान का नियम
नियमों के अनुसार, अनुरक्षण मद से कराए गए कार्यों की तस्वीरें (पहले और बाद की) बिल के साथ जमा करनी होती हैं। लेकिन, इन बिलों के साथ कोई तस्वीर नहीं थी। फिर भी ट्रेजरी ऑफिसर ने बिल पास कर दिया और भुगतान कर दिया। अनुरक्षण मद का मतलब है, रख-रखाव के लिए दिया गया पैसा। इस मामले पर जिले के शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मारपाची का कहना है कि उन्हें सोशल मीडिया से इस बारे में पता चला है। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया से यह विषय उनके संज्ञान में आया है जांच कर करवाई जाएगी।”
मध्य प्रदेश में बेलगाम रेत माफिया, तहसीलदार को ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश
:मध्य प्रदेश के मैहर जिले में रेत माफिया का दुस्साहस अब जानलेवा हमलों तक पहुंच गया है। शुक्रवार को जिले के रामनगर ब्लॉक के कुबरी गांव में अवैध रेत परिवहन कर रहे रेत माफिया ने नायब तहसीलदार रोशन रावत को ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश की। गनीमत रही कि रावत ने समय रहते खुद को बचा लिया, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
दरअसल, शुक्रवार को नायब तहसीलदार झिन्ना सर्किल रोशन रावत को एक अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने निर्देशित किया था। इसके बाद रावत अपने सहयोगियों के साथ कुबरी गांव की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक रेत से भरा ट्रैक्टर आता दिखाई दिया, जिसे रोका गया। पूछताछ करते समय चालक ने नायब तहसीलदार पर ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास किया।
रोशन रावत ने तत्काल खतरे को भांपते हुए तेजी से एक ओर छलांग लगाई और खुद को बचा लिया। हमले के बाद ट्रैक्टर चालक सड़क पर जानबूझकर रेत गिराकर फरार हो गया। एक वाहन को पकड़ लिया गया है। जिसके खिलाफ अब मुकदमे की तैयारी हो चुकी है। अधिकारियों ने तीन संदिग्धों को पकड़ने की कोशिश की। लेकिन वे हाथ नहीं लगे। घटना की शिकायत रामनगर थाने में दर्ज कराई गई है। अधिकारियों के मुताबिक, 40-50 ग्रामीण मौके पर मौजूद थे, जिन्होंने इस घटना को देखा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इसमें ट्रैक्टर चालक रविंद्र और नेपाली का नाम सामने आ रहा है।
प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंप
इस हमले के बाद पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। एक ओर जहां अधिकारियों में आक्रोश है, वहीं दूसरी ओर यह घटना माफिया के बेलगाम होने की पोल खोलती है। जैसे ही कार्रवाई की खबर इलाके में फैली, कई रेत माफिया अपने वाहन मौके पर ही छोड़कर भाग खड़े हुए। कुछ ने रेत रास्ते में गिराकर भागने में ही भलाई समझी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुबरी गांव और आसपास के क्षेत्रों में रेत माफिया का नेटवर्क वर्षों से सक्रिय है। यहां प्रतिदिन कई ट्रैक्टर और ट्रक रेत लोड कर निकलते हैं। जिनमें से अधिकांश के पास वैध अनुमति नहीं होती। यह कारोबार स्थानीय रसूखदारों की छत्रछाया में फल-फूल रहा है।
विक्रमोत्सव 2025 के लिए MP को मिला एशिया का ‘वाउ गोल्ड अवॉर्ड’, संस्कृति- विरासत क्षेत्र में बड़ी लब्धि
मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक जीवन में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। उज्जैन में आयोजित विक्रमोत्सव-2025 को एशिया के सबसे प्रतिष्ठित मंच WOW Awards Asia 2025 में “शासकीय समारोह” श्रेणी का गोल्ड अवॉर्ड मिला है। यह सम्मान न केवल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है, बल्कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सांस्कृतिक दृष्टि और समर्पण को भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मान्यता देता है। यह आयोजन महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा पिछले 18 वर्षों से किया जा रहा है, जो अब वैश्विक पहचान प्राप्त कर चुका है।
मध्य प्रदेश के लिए यह गर्व का क्षण है। उज्जैन में आयोजित भव्य विक्रमोत्सव-2025 को WOW Awards Asia 2025 द्वारा एशिया के शासकीय समारोहों की विशेष श्रेणी में गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान राज्य सरकार के संस्कृति विभाग के अंतर्गत कार्यरत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा आयोजित कार्यक्रम को मिला है। वाउ अवॉर्ड एशिया की टीम जल्द ही भोपाल आकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार सौंपेगी। इससे पहले विक्रमोत्सव 2024 को “एशिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन” घोषित किया गया था।
संस्कृति और विरासत को समर्पित आयोजन
मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने इस उपलब्धि को मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि विक्रमोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और विकास का समन्वय है, जो पिछले 18 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा है और देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी पहचान बना चुका है।
विक्रमोत्सव में रही देशभर की भागीदारी
विक्रमोत्सव 2025 में 300 से अधिक सांस्कृतिक और बहुआयामी गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें लाखों लोगों ने प्रत्यक्ष और डिजिटल माध्यमों से सहभागिता की। इन गतिविधियों में शिवरात्रि मेले, विक्रम व्यापार मेला, नृत्य-संगीत कार्यक्रम, विज्ञान समागम, कोटि सूर्योपासना, शिल्प कार्यशालाएं, विक्रम पंचांग विमोचन, कवि सम्मेलन और 1000 ड्रोन की आकर्षक प्रस्तुति शामिल थीं।
प्रधानमंत्री ने भी की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विक्रमोत्सव की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह आयोजन उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य की गरिमा और वैभव को जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रेरणादायक प्रयास है। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों को युवा पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय बताया।
वाउ अवॉर्ड एशिया का प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म
वाउ अवॉर्ड एशिया, वर्ष 2009 से लाइव इवेंट्स और अनुभव आधारित आयोजनों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने वाला एक प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म है। इस वर्ष इसका 16वां संस्करण मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित हुआ, जिसमें देश-विदेश की प्रतिष्ठित संस्थाओं ने भाग लिया।
पुश्तैनी संपत्ति मामले में शर्मिला टैगोर-सैफअली को झटका, हाईकोर्ट ने कहा ट्रायल कोर्ट फिर करे सुनवाई
अपने जमाने की मशहूर फिल्म अभिनेत्री शर्मिला टैगोर, उनके बेटे फिल्म अभिनेता सैफ अली खान सहित पटौदी परिवार को पुश्तैनी संपत्ति के मामले में हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी ने भोपाल रियासत के अंतिम नवाब मोहम्मद हमीदुल्ला खान की संपत्ति के उत्तराधिकार के संबंध में ट्रायल कोर्ट को नए सिरे से पुनः सुनवाई के आदेश जारी किए हैं। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि ट्रायल कोर्ट एक साल की निर्धारित समय अवधि ने प्रकरण की सुनवाई करे। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ ट्रायल कोर्ट द्वारा साल 2000 में पटौदी परिवार के पक्ष में पारित आदेश को निरस्त कर दिया है।भोपाल रियासत की संपत्ति विवाद में हाईकोर्ट ने पटौदी परिवार को झटका देते हुए ट्रायल कोर्ट के 2000 के फैसले को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने संपत्ति उत्तराधिकार मामले की एक साल में नए सिरे से सुनवाई के आदेश दिए हैं। शर्मिला टैगोर, सैफ अली खान पक्षकार बनाए गए हैं।
भोपाल रियासत के वंशज का दावा करते हुए बेगम सुरैया रशीद, बेगम मेहर ताज नवाब साजिदा सुल्तान, नवाबजादी कमर ताज राबिया सुल्तान, नवाब मेहर ताज साजिदा सुल्तान एवं अन्य ने भोपाल जिला न्यायालय द्वारा पारित आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में साल 2000 में दो अपील दायर की गई थीं। अपील में कहा गया था कि भोपाल रियासत का भारत संघ में विलय 30 अप्रैल 1949 में हुआ था। लिखित समझौते के अनुसार विलय के बाद नवाब के विशेष अधिकार जारी रहेंगे और निजी संपत्ति के पूर्ण स्वामित्व के उत्तराधिकार भोपाल सिंहासन उत्तराधिकार अधिनियम 1947 के तहत होंगे। नवाब की मृत्यु के बाद साजिदा सुल्तान को नवाब घोषित किया गया था। भारत सरकार ने 10 जनवरी 1962 को पत्र जारी की संविधान के अनुच्छेद 366 (22) के तहत व्यक्तिगत संपत्ति का उल्लेख निजी संपत्ति के रूप में किया था। नवाब मोहम्मद हमीदुल्ला खान की मृत्यु के पश्चात उनकी निजी संपत्ति का बंटवारा मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार वादीगण और प्रतिवादियों के बीच होना चाहिए था। भोपाल जिला न्यायालय में संपत्ति उत्तराधिकारी की मांग करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया गया था। जिला न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय पारित निर्णय के आधार पर उनका आवेदन खारिज कर दिया था।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि ट्रायल कोर्ट ने मामले के अन्य पहलुओं पर विचार किए बिना इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार प्रकरण को खारिज कर दिया था। ट्रायल कोर्ट इस तथ्य पर विचार करने में विफल रहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा विलय करने पर सिंहासन उत्तराधिकार अधिनियम को खारिज कर दिया गया था। विचाराधीन मामला विरासत के विभाजन का है, इसलिए सीपीसी के 14 नियम 23 ए के प्रावधान के मद्देनजर मेरी राय है कि इन मामलों को नए सिरे से तय करने के लिए ट्रायल कोर्ट में वापस भेजा जाता है। ट्रायल कोर्ट बदली हुई कानूनी स्थिति के मद्देनजर पक्षों को सबूत पेश करने की अनुमति दे सकता है। दायर अपील में नवाब मंसूर अली खान पटौदी, उनकी पत्नी शर्मिला टैगोर, बेटा सैफ अली खान सहित दोनों बेटियों को अनावेदक बनाया गया था।
देह व्यापार जैसे अपराध और बड़े गिरोह का शक, लव जिहाद केस में NHRC की रिपोर्ट में क्या?
मप्र की राजधानी भोपाल में सामने अए लव जिहाद केस में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने अपनी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंप दी है। मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के नाम भेजी गई इस जांच रिपोर्ट ने इस मामले में कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में कहा कहा कि यह मामला लव जिहाद के साथ हिंदू युवतियों के देह व्यापार जैसा अपराध प्रतीत हो रहा है। पुलिस ने मामले में आधा दर्जन युवकों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिफ्तार किया है। लेकिन, यह गिरोह इतना नहीं लगा। आशंका है कि यह एक बड़ा नेटवर्क है और इस नेटवर्क में कई बड़ी मछलियां शामिल हो सकती हैं। इस गिरोह का नेटवर्क दूसरे राज्यों के अपराधियों, या लोगों से भी जुड़ा हो सकता है। एनएचआरसी ने अपनी इस रिपोर्ट में पुलिस की लापरवाही का भी जिक्र किया है। कहा गया- लव जिहाद जैसे गंभीर मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।
भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र के कोकता में स्थित प्रतिष्ठित निजी कॉलेज में हिंदू छात्राओं को प्रेमजाल में फंसाकर उनके साथ दुष्कर्म किया गया था। हिंदू धर्म को अपशब्द कहते हुए युवतियों के साथ दरिंदगी की गई, इस दौरान उनके अश्लील वीडियो बनाकर मुस्लिम रीति-रिवाज मानने और मुस्लिम धर्म अपनाने का भी दबाव बनाया गया था। मामले की जांच के बाद मानव अधिकार आयोग ने अपनी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंप दी है।
पीड़ित छात्राओं की पढ़ाई पूरी कराए सरकार
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दरिंदों की दरिंदगी का शिकार कई हिंदू युवतियों ने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी। कई युवतियों की जिंदगी नर्क बन गई। समाज में ठीक से जिंदगी गुजारने के लिए राज्य सरकार सभी पीड़ित छात्राओं की पढ़ाई पूरी कराए। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि सरकार पीड़ित छात्राओं को शिक्षा दिलाने छात्रवृति भी दे। साथ ही अपराधियों से किसी भी प्रकार के डर की आशंका को देखते हुए उन्हें सुरक्षा भी मुहैया कराई जाए। आयोग ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा कि सरकार क्या कार्रवाई करती है, उसकी रिपोर्ट चार सप्ताह में और दो हफ्ते में अनुपालन रिपोर्ट भी मानव अधिकार आयोग को भेजें।
पीड़िताओं को पांच-पांच लाख दे सरकार
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने रिपोर्ट में कहा है कि मुख्यमंत्री राहत कोष से सभी पीड़िताओं को 50-50 हजार के स्थान पर पांच-पांच लाख रुपये आर्थिक सहायता दी जाए। एक नाबालिग पीड़िता को छह लाख रुपये देने की भी सिफारिश की गई है। जिस कॉलेज की छात्राओं के साथ लव जिहाद और दरिंदगी हुई है, उस कॉलेज से कुछ ही दूरी पर क्लब-90 है, इसमें लव जिहाद गिरोह के आरोपी बैठ कर रणनीति बनाते थे। छात्राओं को बात करने के लिए वहीं बुलाकर उनके साथ दोस्ती करते और क्लब-90 में बने कैबिनों में यह दरिंदे हिंदू युवतियों के साथ एकांत में समय भी बिताते थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि मानव अधिकार आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा सवाल उठाए जाने पर क्लब-90 की पूरी जांच के बिना ही उसे तोड़ दिया गया। क्लब-90 को जल्दबाजी में तोड़ने के पीछे उसमें छिपे साक्ष्यों को छिपाने और अपराधियों की बचाने की साजिश भी हो सकती है। ऐसे में राज्य सरकार क्लब-90 को तोड़ने की भी जांच कराएं।
फरहान के बड़े नामों से मिलीभगत की भी जांच हो
आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि जव जिहाद गिरोह का मास्टरमाइंड फरहान बहुत शातिर है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि वह गिरोह के अन्य युवकों द्वारा भी जिन छात्राओं से दरिंदगी की जाती है, उनके वीडियो भी अपने पास सुरक्षित रखता है। ऐसे में आशंका है कि फरहान का दूसरे राज्यों के बदमाशों, बड़े नामो और अपराधियों से मिलीभगत की भी जांच की जाए। यह सभी जांच वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी या उसके ऊपर के अधिकारी से कराई जाए।
जानें क्या है पूरा मामला?
भोपाल के कोकता क्षेत्र में स्थित निजी कॉलेज की आधा दर्जन हिंदू छात्राओं के साथ फरहान और उसके गिरोह के आधा दर्जन युवकों ने दुष्कर्म कर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया। इस केस का खुलासा इस साल अप्रैल में हुआ है। पांच पीड़िताएं बालिग हैं, जबकि एक पीड़िता की नाबालिग बहन को भी फरहान और उसके साथी ने दरिंदगी का शिकार बनाया। नाबालिग भोपाल में पढ़ाई छोड़कर इंदौर चली गई तो फरहान इंदौर भी पहुंचा और नाबालिग के साथ दरिंदगी की। इसके बाद इंदौर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन कार्रवाई नहीं की। पीड़िता भोपाल आई और दोनों बहनों ने बागसेवनिया थाने पहुंचकर प्रकरण दर्ज कराया। इसके बाद अन्य पीड़ित छात्राओं ने प्रकरण दर्ज कराया। फरहान की दरिंदगी का शिकार दो छात्राएं पढ़ाई पूरी कर शादीशुदा जिंदगी जी रही हैं। ये दोनों पीड़िता निजी जिंदगी तबाह होने के डर से प्रकरण दर्ज कराने से स्पष्ट इंकार कर चुकी हैं। एक पीड़िता का बच्चा भी है। लव जिहाद कांड का खुलासा होने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की टीमें 13 से 17 मई तक भोपाल में पीड़िताओं के बयान लेने, घटना स्थल, कॉलेज, क्लब-90 का दौरा किया था। इसके बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। मानव अधिकार आयोग ने अब अपनी विस्तृत रिपोर्ट भी राज्य सरकार को सौंप दी है। फरहान सहित सभी छह आरोपी जेल में हैं। एक आरोपी आत्महत्या कर चुका है।
मध्य प्रदेश के 27 से ज्यादा जिलों हुई बारिश,जबलपुर में 9 घंटे में 3 इंच बारिश दर्ज
मध्य प्रदेश में लगातार बारिश का दौर जारी है। कई जिलों में ज्यादा बारिश होने की वजह से नदी नाले उफान पर आ गए हैं। शुक्रवार को एमपी के 27 से अधिक जिलों में बारिश हुई। 9 घंटे में जबलपुर में 72 मिमी यानी, करीब 3 इंच पानी गिर गया। राजधानी भोपाल में भी बारिश का हुई। मंडला में भारी बारिश से नेशनल हाईवे-30 पर लैंड स्लाइड के कारण जबलपुर-मंडला मार्ग बंद हो गया है। यहां नर्मदा नदी का जलस्तर वॉर्निंग लेवल पर पहुंच गया है। जिले के कारिया गांव में पानी ज्यादा भरने से एसडीईआरएफ लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है। ग्वालियर में बारिश के चलते तिघरा डैम का जलस्तर बढ़ गया है।
इन जिलों में हुई बारिश
शुक्रवार को नरसिंहपुर में 2.6 इंच, सागर में डेढ़ इंच, छतरपुर के नौगांव में सवा इंच, मंडला-दमोह में 1 इंच, दतिया-श्योपुर में पौन इंच, बालाघाट-रीवा में आधा इंच बारिश हुई। वहीं, भोपाल, बैतूल, गुना, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, छतरपुर के खजुराहो, टीकमगढ़, सिवनी, सतना, सीधी, उमरिया, शाजापुर, देवास, सीहोर, आगर-मालवा, विदिशा, मऊगंज, कटनी समेत कई जिलों में बारिश का दौर जारी रहा। मौसम विभाग ने रात में भी प्रदेश के आधे हिस्से में बारिश होने की चेतावनी जारी की है।
चार दिन अति भारी या भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि मध्यप्रदेश से अभी एक मानसून समेत 2 टर्फ गुजर रही है। वहीं, एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की भी एक्टिविटी है। इस वजह से बारिश का सिस्टम स्ट्रॉन्ग है। अगले 4 दिन के लिए कई जिलों में अति भारी या भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
डिंडौरी में भारी बारिश के चलते स्कूल में छुट्टी
डिंडौरी में भारी बारिश के चलते कलेक्टर नेहा माराव्या ने 4 और 5 जुलाई को कलेक्टर ने जिले के सभी हाईस्कूल तक की छुट्टी घोषित कर दी है। जिले की सिवनी नदी का पानी पुल पर आने से जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे बंद हो गया है। नर्मदा नदी में मंदिर डूब गया।
एमपी में अगले 3 दिन ऐसा रहेगा मौसम
5 जुलाई : मंदसौर, राजगढ़, विदिशा, सागर, रायसेन, सिवनी, मंडला, डिंडौरी, बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। उज्जैन, रतलाम, नीमच, धार, आगर-मालवा, शाजापुर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, जबलपुर, दमोह, पन्ना और कटनी में भारी बारिश हो सकती है।
6 जुलाई : जबलपुर, कटनी, सिवनी, मंडला, डिंडौरी,बालाघाट, रतलाम और धार में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। झाबुआ, नीमच, राजगढ़, श्योपुर, ग्वालियर, सागर, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, दमोह, पन्ना, सतना, उमरिया, मैहर, शहडोल और अनूपपुर में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
7 जुलाई : राजगढ़, देवास, विदिशा, सीहोर, हरदा, विदिशा,रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में भारी बारिश हो सकती है। 24 घंटे के अंदर इन जिलों में साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। बाकी जिलों में भी बारिश का यलो अलर्ट है।
94,234 विद्यार्थियों को मिली लैपटॉप की राशि, CM बोले-अगले साल सीधे मिलेंगे अच्छी कंपनी के लैपटॉप
मध्यप्रदेश में 12वीं की परीक्षा में 75 फीसदी और उससे ऊपर नंबर लाने वाले मेधावी विद्यार्थियों को शुक्रवार को लैपटॉप की राशि दी गई। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के तहत 94,234 मेधावी विद्यार्थियों को 25-25 हजार की राशि प्रदान की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कई बार देखा गया है कि छात्रों के परिवार लैपटॉप राशि को दूसरे कार्यों में खर्च कर देते है। ऐसे में हम कोशिश करेंगे कि अगले साल से सीधे अच्छी कंपनी के लैपटॉप दिए जाए। इस दौरान छात्रों ने ने बताया कि किस प्रकार से उन्हें लैपटॉप की राशि मिलने से खुशी हो रही है। विद्यार्थियों ने बताया कि आगे वे क्या बनना चाहते हैं। एक छात्रा योगिता टांक के साथ सीएम ने संवाद किया और सेल्फी ली।
लाभार्थियों में 60% बेटियां
इस दौरन सीएम ने बताया कि इस साल योजना के लाभार्थियों में 60% बेटियां हैं। 56,246 बेटियां और 37,988 बेटे। उन्होंने कहा कि यह एक सकारात्मक संकेत है कि बेटियां न केवल बराबरी कर रही हैं, बल्कि पढ़ाई में आगे भी निकल रही हैं। अब बेटों को अपनी स्थिति मजबूत करनी होगी।
जाने क्या है योजना
मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत माध्यमिक शिक्षा मंडल की बारहवीं की परीक्षा में 75 फीसदी और उससे ऊपर नंबर लाने वाले छात्र-छात्राओं को लैपटॉप दिया जाता है। इसके लिए सरकार की तरफ से 25 हजार रुपए की एकमुश्त राशि दी जाती है। स्टूडेंट को अपनी पसंद का लैपटॉप खरीदकर उसका बिल संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल को देना होता है। प्रिंसिपल इसे आगे फॉरवर्ड करते हैं।
बगैर बसाहट वाले रुट पर मेट्रो का संचालन,यात्रियों का टोटा, फेरे कम हुए
इंदौर में मेट्रो ट्रेन में यात्रियों की संख्या तेजी से घट गई। एक माह पहले जब इंदौर में मेट्रो का संचालन शुरू हुआ था तो अधिकतम 25 हजार तक एक दिन में यात्रियों ने सफर किया था, लेकिन अब यात्रियों की संख्या 500 तक सिमट गई है। इस कारण मेट्रो के संचालन की लागत भी नहीं निकल पा रही है,जबकि मेट्रो के संचालन और स्टेशन पर 300 से ज्यादा कर्मचारियों का स्टाॅफ रखा गया है।
सुपर कॉरिडोर पर सात किलोमीटर लंबे रूट पर मेट्रो ट्रेन का संचालन हो रहा है। मेट्रो रेल कार्पोरेशन ने पहले सप्ताह में सफर मुफ्त रखा तो डेढ़ लाख से ज्यादा यात्रियों ने उसमें सफर किया, लेकिन जब टिकट लगने लगे तो यात्रियों की संख्या घट गई।
दरअसल शहरवासी मेट्रो को देखने के लिए उसमे सफर कर रहे थे। अभी जिस हिस्से में मेट्रो का संचालन हो रहा है वहां न तो बसाहट है और न ही कोई औद्योगिक क्षेत्र। इस कारण वहां मेट्रो को वास्तविक यात्री नहीं मिल रहे है। अभी भी लोग जरुरत के बजाए शौकिया तौर पर मेट्रा के सफर का आनंद लेने जा रहे है।
यात्री घटने के कारण मेट्रो रेल कार्पोरेशन ने मेट्रो ट्रेन के संचालन का समय समय बदला है। अब ट्रेन सुबह दस बजे से शाम छह बजे तक चलती है। फेरे भी कम हो गए है। अब मेट्रो ट्रेन का न्यूनतम किराया 15 रुपये है।
इसलिए नहीं मिल रहे यात्री
सुपर काॅरिडोर पर टीसीएस और इंफोसिस के बड़े कैम्पस हैं। उनमें काम करने वाले कर्मचारी भी एरोड्रम क्षेत्र, सुखलिया ग्राम या विजय नगर क्षेत्र में रहते हैं, लेकिन मेट्रो के मौजूदा रूट में ये इलाके नहीं हैं। इस कारण इन कंपनियों के कर्मचारियों को भी मेट्रो ट्रेन का ठीक से फायदा नहीं मिल पाएगा। यदि मेट्रो ट्रेन गांधी नगर से विजय नगर तक संचालित होती है तो फिर यात्री बढ़ सकते हैं, क्योंकि गांधी नगर क्षेत्र के कई लोग काम के सिलसिले में विजय नगर या उससे आगे जाते हैं। उनके लिए बेहतर कनेक्टिविटी हो जाएगी, लेकिन रुट का विस्तार होने में छह माह का समय लगेगा।
17 किलोमीटर हिस्से में ट्राली रन हुआ
गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक 17 किलोमीटर लंबाई में मेट्रो का ट्रायल रन छह माह बाद होगा। वहां तक मेट्रो के रन में सालभर का समय लग सकता है। सुपर कारिडोर के 17 किलोमीटर हिस्से में हाल ही में ट्राली रन लिया जा चुका है, लेकिन उसके आगे अभी ट्रेक और मेट्रो स्टेशनों का काम बाकी है। इस कारण बचे छह किलोमीटर के हिस्से में ज्यादा समय लगेगा। उधर मेट्रो के मध्य हिस्से में अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है, जबकि ठेकेदार कंपनी का भी चयन हो चुका है। मध्य हिस्से में अंडरग्राउंड काम होना है।
मेट्रो ट्रेन-फैक्ट फाइल
-इंदौर मेट्रो एयरपोर्ट, दो बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन को कवर करेगी। शहर के मध्य हिस्से के ट्रैफिक को कम करने में मददगार साबित होगी।
-हर 30 मिनट के अंतर से मेट्रो ट्रेन चलेगी।शहर में कुल 28 स्टेशनों से ट्रेन गुजरेगी। फिलहाल 15 जगह स्टेशनों का काम चल रहा है। 20 से लेकर 80 रुपये तक मेट्रो ट्रेन का किराया होगा। मेट्रो ट्रेन कार्पोेरेशन ने किराए के लिहाज से मेट्रो रुट को पांच जोन में बांटा है।
-मेट्रो ट्रेन का संचालन सुबह आठ बजे से शुरू होगा और रात आठ बजे तक चलेगी। फिलहाल मेट्रो का संचालन सात किलोमीटर हिस्से में हो रहा है। यात्री कम मिलने के कारण समय घटा दिया गया है।
– 20 से ज्यादा मेट्रो ट्रेन का संचालन होगा। एक ट्रेन में साढ़े चार सौ यात्री सवार हो सकेंगे। बैठने के अलाए खड़े रहकर सफर करने में भी आसानी होगी। ट्रेन के भीतर लगे पोल में चार ग्रिप दी गई है। जिसे यात्री पकड़ कर सफर कर सकते है। मेट्रो ट्रेन बाहरी और आतंरिक रुप से सीसीटीवी कैमरों से लैस होगी।
छात्रवृत्ति घोटाले में खुद को बचाने में जुटे अधिकारी, भोपाल से शुरू होकर अन्य जिलों तक फैले होने की आशंका
मध्यप्रदेश के पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में सामने आया छात्रवृत्ति घोटाला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। यह घोटाला केंद्र सरकार की ओर से उजागर हुआ है, जिसने विभाग को मामले की जांच कर कार्रवाई करने को कहा था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि विभागीय अधिकारियों ने इस पूरे घोटाले को जालसाजी का मामला बताकर भोपाल क्राइम ब्रांच में FIR दर्ज कराई है, जिससे संदेह गहराता जा रहा है कि कहीं यह कदम खुद को बचाने की कोशिश तो नहीं? केंद्र सरकार ने 11वीं और 12वीं के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति योजना में अनियमितता पाई थी। रिपोर्ट के मुताबिक कई ऐसे मदरसों और स्कूलों को छात्रवृत्ति दी गई, जिनकी मान्यता केवल 10वीं कक्षा तक थी। बावजूद इसके इन संस्थानों में 11वीं और 12वीं के नाम पर 1100 से ज्यादा छात्रों को छात्रवृत्ति जारी की गई। कुल राशि करीब 57 लाख 78 हजार रुपये है।
भोपाल में ही उजागर हुए इतने गड़बड़ी, बाकी जिलों पर भी संदेह
भोपाल जिले में ही केंद्र सरकार ने 1000 से ज्यादा अपात्र छात्रों की सूची जारी की है, जबकि विभाग ने क्राइम ब्रांच को 972 छात्रों की जानकारी दी। इसी तरह, केंद्र की रिपोर्ट में 83 संस्थान, जबकि विभाग की सूची में केवल 44 संस्थानों को संदिग्ध बताया गया। इससे यह आशंका और गहराती है कि विभागीय अधिकारी कुछ संस्थानों और कर्मचारियों को बचा रहे हैं।
जांच में संदेह के घेरे में विभागीय अधिकारी
क्राइम ब्रांच की शुरुआती जांच में कुछ विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जानकारों का मानना है कि यह केवल जालसाजी नहीं, बल्कि सरकारी राशि का दुरुपयोग है, यानी यह स्पष्ट रूप से घोटाला है। सामान्यत: इस तरह के आर्थिक अपराधों की जांच ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) से कराई जाती है, लेकिन विभाग ने मामला पुलिस को सौंप दिया। यह कदम भी संदेह को बढ़ाता है।
इन शिक्षण संस्थानों की भूमिका संदिग्ध
इस मामले में जिन मदरसों और निजी स्कूलों की भूमिका पर संदेह जताया गया है, उनमें शामिल हैं: एमएस आसिफ सईद उर्दू, हनीफ सर मैथ्यू अर्नाल्ड (करोंद), न्यू म.ज. कन्वेंट स्कूल (बैरसिया), सेंट देसूजा कॉन्वेंट (कमला पार्क), सिटी मोंटेसरी स्कूल (जहांगीराबाद), न्यू एससीबी कॉन्वेंट (अशोका गार्डन), एम. अरबिया अमीरुल इस्लाम, एम. दीनियत अयशुल उलुम, मदरसा अहद तालीमुल कुरान (बाग दिलकुशा), मदरसा ऐमन दीनी (भोईपुरा), मदरसा बुशरा दीनी (ईटखेड़ी) और अन्य।
क्या है योजना का स्वरूप?
भारत सरकार की छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को सालाना 5700 की राशि दी जाती है। यह योजना पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के तहत आती है। इस योजना के तहत छात्रों की पात्रता और संस्थानों की मान्यता को लेकर अनदेखी कर अपात्र छात्रों को लाभ दिया गया।
क्या भगवान भरोसे चल रहा NHAI का लीगल विभाग, वकील के बयान से पल्ला झाड़ना पड़ा महंगा
इंदौर-देवास हाईवे पर ट्रैफिक जाम को लेकर हाईकोर्ट में चल रही जनहित याचिका अब और विवादों में घिर गई है। इस मामले पर सोशल मीडिया पर केंद्रीय मंत्रियों और विभागों को भी टैग कर नाराजगी जाहिर की जा रही है।
कोर्ट में वकील ने यह कहा
बता दें, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान एनएचएआई की वकील ने कहा था कि लोग निकलते ही क्यों हैं… बिना काम, इतनी जल्दी? जाम तो लगेगा ही। वकील इतने पर ही नहीं रुकी, उन्होंने यहां तक कह दिया कि लोगों को मॉल, होटल जाना होता है, स्थिति तो बिगड़ेगी ही।
कंपनी ने पल्ला झाड़ा
इस तर्क पर देशव्यापी प्रतिक्रिया हुई, लोगों ने एनएचएआई को जमकर घेरा। बुधवार को अथॉरिटी ने सोशल मीडिया पर लिखा, हाईकोर्ट में वकील की ओर से जो तर्क दिया गया, वह कार्यालयीन वक्तव्य नहीं है। रीजनल ऑफिसर श्रवणकुमार सिंह ने बताया, इस संबंध में वकील को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। अब कंपनी के इस स्टैंड के बाद लोग और भी भड़क गए हैं। लोगों का कहना है कि क्या वकील ने कोर्ट में कंपनी की जानकारी के बिना ही यह सब कह दिया, और अगर यह सही है तो फिर कंपनी का लीगल विभाग भी भगवान भरोसे ही चल रहा है।
भड़के लोग, बोले क्या भगवान भरोसे चल रहा NHAI का लीगल डिपार्टमेंट
इंदौर के सुबोध खंडेलवाल ने पोस्ट करके इस मामले में एनएचएआई को घेरा है। उन्होंने लिखा कि NHAI ने X प्लेटफॉर्म पर दो ट्वीट किए हैं। उन्होंने लिखा कि वकील का बयान NHAIका अधिकृत वर्शन नहीं है। वकील ने ये बयान NHAI के ऑथोराइजेशन के बिना दिया था, ये और बड़ा मुद्दा है। मुद्दा ये है कि वकील बिना ऑथोराइजेशन के हाईकोर्ट में केंद्र सरकार की एक एजेंसी का पक्ष रखने कैसे पहुंच गई? क्या कोई भी वकील हाईकोर्ट में अपनी मर्जी से NHAI के खिलाफ लगे किसी केस में NHAI का पक्ष रखने चला जाता है? क्या NHAI का लीगल डिपार्टमेंट भी भगवान भरोसे चल रहा है? यदि वो NHAI की अधिकृत अधिवक्ता नहीं थी तो कोर्ट में कैसे गई और थी तो उनके कथन से NHAI सिर्फ ट्वीट करके या सोशल मीडिया पर बयान देकर पल्ला कैसे झाड़ सकता है? कोर्ट ट्विटर पर चलेगी क्या? NHAI के ट्वीट पर ये सवाल उठाते हुए मैंने PMO, विधि मंत्री, NHAI, केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी और विधि मंत्रालय की सचिव को ट्वीट किया है।