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*लखपति नहीं, सीधे करोड़पति बना रहा माइक्रोसॉफ्ट! जानें H-1B वालों को किस पोस्ट पर कितनी सैलरी*

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अमेरिका में H-1B वीजा की फीस बढ़ा दी गई है, जिसके बाद कंपनियों के लिए विदेशी वर्कर्स को हायर करना महंगा हो गया है। H-1B वीजा को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था, क्योंकि इसके आलोचकों का कहना था कि ये वीजा प्रोग्राम अमेरिकी लोगों की नौकरियां खा रहा है। उनका कहना था कि इसके जरिए अमेरिकी कंपनियां सस्ते विदेशी वर्कर्स की हायरिंग करती हैं। ये आरोप कई बड़ी टेक कंपनियों पर लगे, जिसमें माइक्रोसॉफ्ट भी शामिल है।

माइक्रोसॉफ्ट H-1B वीजा विवाद के केंद्र में था, क्योंकि यहां पर बड़े पैमाने पर छंटनी की गई थी। इस बीच माइक्रोसॉफ्ट में H-1B वीजा वर्कर्स को दी जाने वाली सैलरी को लेकर खुलासा हुआ है। इससे मालूम चला है कि कंपनी विदेशी वर्कर्स को भर-भरकर सैलरी दे रही है।

मबर्ग ने माइक्रोसॉफ्ट की H-1B वीजा फाइलिंग के डेटा का इस्तेमाल करते हुए बताया है कि इस टेक कंपनी में किस पॉजिशन के लिए कितनी सैलरी दी जा रही है। ये डेटा ऐसे समय पर सामने आया है, जब माइक्रोसॉफ्ट ने 9000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला। वीजा फाइलिंग डेटा के जरिए मालूम चलता है कि सैलरी जॉब पॉजिशन, लोकेशन और वरिष्ठता के आधार पर अलग-अलग है। हालांकि, ये सैलरी का सटीक आंकड़ा नहीं है, इसमें उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है। आइए जानते हैं कि माइक्रोसॉफ्ट में H-1B वीजा वर्कर्स को कितनी सैलरी दी जा रही हैं। (Pexels)

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