सेंट्रल ट्रेड यूनियन्स ने पूरे देश में भारत बंद का ऐलान किया है। मजदूर संगठनों के इस हड़ताल में कई किसान संगठन भी शामिल हैं। पश्चिम बंगाल और केरल समेत कई राज्यों में बुधवार को भारत बंद का असर दिखा। केरल में चक्का जाम की कोशिश हुई। वहीं कई राज्यों में बैंक का कामकाज भी प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक इस हड़ताल में करीब 25 करोड़ कर्मचारी हिस्सा ले रहे हैं। हड़ताल का कारण सरकार का नया श्रम कानून है। देश के 10 ट्रेड यूनियन विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं।
आज देशभर में भारत बंद का ऐलान किया है। यह बंद 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और उनके सहयोगी संगठनों ने किया है। सरकार की कथित ‘मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक’ नीतियों के खिलाफ आज देशव्यापी हड़ताल की जा रही है। इस हड़ताल से बैंकिंग के साथ डाक सेवाएं ही नहीं कोयला खनन, सरकारी कामकाज पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रभावित नजर आ रहे हैं। आज ट्रेन लेट होने और बिजली आपूर्ति में बाधा की भी आमजन को परेशान करेगी।

हड़ताल के पीछे की प्रमुख वजह
- सरकार द्वारा 17 सूत्रीय मांगों की अनदेखी।
- पिछले 10 वर्षों से राष्ट्रीय श्रमिक सम्मेलन न होना।
- जन आंदोलनों को दबाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग।
- किसानों और मजदूरों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार और समर्थन न मिलना।
- ट्रेड यूनियंस की हड़ताल में किसानों की भागीदारी
किसान संगठनों और ग्रामीण मजदूर यूनियनों ने भी भारत बंद में समर्थन जताया है। कई जगहों पर सड़कें जाम, रैलियां और प्रदर्शन हो रहे हैं।
कोयंबटूर में तमाम बसें रोकी गईं, जबकि कोझीकोड में भी भारत बंद का असर देखने को मिला। यहां सड़कों पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद नजर आया। कोट्टायम में दुकानें और शॉपिंग मॉल बंद रहे। कोच्चि में सड़कें खाली नजर आईं। यहां भी भारत बंद पूरी तरह से नजर आया। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में वामपंथी दलों के यूनियन ने जादवपुर में पैदल मार्च निकाला और भारत बंद में हिस्सा लिया।
जादवपुर रेलवे स्टेशन पर हंगामा
जादवपुर रेलवे स्टेशन पर लेफ्ट यूनियन के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। कई कार्यकर्ता रेलवे स्टेशन के अंदर घुस गए। बंद की वजह से कई जगहों पर ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हुआ है। कोलकाता में कुछ जगहों पर आगजनी की घटना भी हुई है। वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम करने की कोशिश, लेकिन मौके पर पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को मौके से भगा दिया।
ट्रेड यूनियन क्यों कर रहे हैं हड़ताल
ट्रेड यूनियन की हड़ताल का अहम कारण सरकार के चार नई श्रम संहिताओं को लागू करना है। ट्रेड यूनियन का मानना है कि नई श्रम संहिताओं की वजह से काम के घंटे बढ़ेंगे और ऐसे में कंपनी के मालिकों को ज्यादा फायदा मिलेगा। वहीं कर्मचारियों की दिक्कत बढ़ेगी। नई संहिता की वजह से हड़ताल करना भी मुश्किल होगा। उनका यह भी मानना है कि इसके कारण नौकरी और सैलरी खतरे में आ सकती है।
देशव्यापी आम हड़ताल के समर्थन में मजदूर संगठनों ने की सभा
भागलपुर। देशव्यापी आम हड़ताल के समर्थन में मजदूर संगठनों-ऐक्टू, सीटू, इंटक, सेवा व एटक ने मंगलवार को स्थानीय स्टेशन चौक पर सभा की। इसके पहले पूरे शहर और आस-पास के इलाकों, मजदूर बस्तियों व मजदूरों के जमावड़े वाले चौक -चौराहों पर माइक प्रचार किया। माइक प्रचार की शुरुआत चम्पानगर के मेदनी चौक पर सभा कर की गयी।
सभा को मुख्य रुप ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त, सीटू के जिला सचिव दशरथ प्रसाद, इंटक के जिला अध्यक्ष रवि कुमार, सेवा की मौसम देवी, एटक के मनोहर शर्मा, बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन के अमित गुप्ता, BSSRU के सुभोजितसेन गुप्ता, घरेलू कामगार संघ की अनीता शर्मा व विश्वविद्यालय कर्मचार संघ के रामा मंडल ने सम्बोधित किया।
सभा को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने हड़ताल के मुद्दों की विस्तृत चर्चा की। गरीबों – मजदूरों के वोटबंदी की भाजपाई साजिश का पुरजोर विरोध करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारत में ऐसा पहली बार हो रहा है सरकार मतदाता चुनने की कोशिश कर रही है, यह देश के लोगों के नागरिक अधिकार पर हमला है, इस संविधान विरोधी प्रक्रिया को पूरी तरह बंद किया जाए और पुराने मतदाता सूची के आधार पर आगामी विधानसभा चुनाव कराया जाए।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र और कई राज्य सरकारों के सहयोग से कॉरपोरेटों / नियोक्ताओं के वर्ग ने मजदूरों पर हमले जारी रखे हैं। कार्य के घंटे एकतरफा बढ़ाए जा रहें हैं। वैधानिक न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा का उल्लंघन किया जा रहा है। मजदूरों की छंटनी बेरोकटोक किए जा रहें हैं। बिना वजह मजदूर संगठनों का निबंधन तक खारिज किया जा रहा है। यह सब बदनाम लेबर कोड्स को चुपके से लागू करने का प्रयास है।
देश का मजदूर वर्ग इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। बार-बार कहने के बावजूद सरकार ने, न तो मजदूर संगठनों से मिलने की जहमत उठाई और न ही अब तक भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) बुलाया। इसके खिलाफ बुधवार को मजदूर हड़ताल के पक्ष में सड़कों पर उतरेंगे और अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करेंगे। वक्ताओं ने आम नागरिकों से हड़ताल का समर्थन करने और इसे शानदार रुप से सफल बनाने की की अपील की।
बैंकिंग सेवाएं हुई प्रभावित
भारत बंद का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों में देखने को मिला। अधिकांश राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं में कामकाज ठप रहा। कई जगहों पर एटीएम खाली मिले या सेवा बाधित नजर आ रही है। बैंक यूनियनों ने कहा कि सरकार के निजीकरण एजेंडे, श्रमिक अधिकारों में कटौती और वेतन असमानता के खिलाफ यह विरोध ज़रूरी था। कर्मचारी संगठनों ने चेताया कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो भविष्य में लंबी अवधि की हड़ताल की जाएगी।
परिवहन प्रणाली चरमराई
देश के विभिन्न हिस्सों में सड़क और रेल परिवहन पर बंद का असर साफ दिखाई दे रहा है। कई राज्यों में सरकारी बसें नहीं चलीं, टैक्सी सेवाएं बाधित रहीं और ऑटो चालक भी बंद में शामिल हुए। बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पंजाब में रेलवे ट्रैक पर बैठकर प्रदर्शन किए गए। यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने वैकल्पिक इंतज़ाम किए, परंतु कई रूटों पर यातायात पूरी तरह ठप रहा।
खनन और निर्माण भी बंद रहे
देश भर में कोयला, लोहा और अन्य खनिज क्षेत्रों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। ट्रेड यूनियनों ने दावा किया कि हजारों श्रमिक खदानों और निर्माण स्थलों पर काम छोड़कर प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रमुख निर्माण परियोजनाओं पर भी असर पड़ा, खासकर सरकारी अधोसंरचना योजनाओं में काम रुका। मजदूरों ने सुरक्षा, स्थायी रोजगार और मजदूरी बढ़ाने की मांग की। यूनियनों ने कहा कि श्रमिकों को लगातार नज़रअंदाज किया जा रहा है।
सरकार पर विपक्ष का वार
विपक्षी दलों ने भी इस बंद का समर्थन किया और सरकार पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस, वाम दलों, समाजवादी पार्टी, आप और किसान संगठनों ने कहा कि यह सरकार पूंजीपतियों के पक्ष में और आम जन के खिलाफ काम कर रही है। भारत बंद 2025 ने देशभर में श्रमिकों और किसानों की आवाज़ को मजबूती से उठाया। ट्रेड यूनियन नेताओं ने चेताया है कि अगर सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।
माकपा समर्थकों का रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन
पश्चिम बंगाल के हल्दिया में बंदर रेलवे स्टेशन पर भारत बंद के आह्वान में माकपा समर्थकों ने ट्रैक पर प्रदर्शन किया। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
जंतर-मंतर पर AICCTU का विरोध प्रदर्शन
दिल्ली में केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में आज बुलाए गए ‘भारत बंद’ के तहत अखिल भारतीय केंद्रीय ट्रेड यूनियन परिषद (AICCTU) के सदस्यों ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTU) ने ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है।
दिल्ली समेत कई राज्यों में बंद का असर नहीं
नेशनल ट्रेड यूनियन ने आज पूरे देश में भारत बंद का एलान किया है। हालांकि दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत उतर, मध्य और पश्चिम भारत में बंद बिल्कुल बेअसर है। इन इलाकों में सामान्य जनजीवन सुचारू रूप से चल रहा है।
यूनियनों के कार्यकर्ता और पुलिस के बीच बहस
‘भारत बंद’ रैली के बीच वामपंथी दलों के यूनियनों के कार्यकर्ताओं और कोलकाता पुलिस के बीच जुबानी जंग छिड़ गई। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है और आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ऐसे आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा रही है जो श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करते हैं।
कोलकाता में यूनियनों के कार्यकर्ता और पुलिस के बीच झड़प
कोलकाता में ‘भारत बंद’ रैली के बीच, एक बस को रास्ता देने के लिए सड़क जाम कर रहे वामपंथी दलों के यूनियनों के कार्यकर्ताओं को कोलकाता पुलिस हटाती हुई। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है और आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ऐसे आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा रही है जो श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करते हैं।
तमिलनाडु में नहीं दिखा भारत बंद का असर
तमिलनाडु के तिरुप्पुर ट्रेड यूनियन हड़ताल से अप्रभावित रहा; जिले भर में 540 बसें सामान्य रूप से चल रही हैं।
केरल के कोट्टायम में दुकानें और शॉपिंग मॉल बंद
केरल में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की तरफ से बुलाए गए ‘भारत बंद’ के समर्थन में कोट्टायम में दुकानें और शॉपिंग मॉल बंद रहे। उन्होंने केंद्र सरकार पर कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया।
कोच्चि में भारत बंद का असर
केरल के कोच्चि में सड़कें खाली रहीं, क्योंकि शहर में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की तरफ से ‘भारत बंद’ का आह्वान किया गया है। यूनियनों ने केंद्र सरकार पर “कॉर्पोरेट समर्थक” नीतियों को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया है।
ट्रेड यूनियनों की हड़ताल: केरल में पूर्ण बंद
केंद्र सरकार की कथित श्रम-विरोधी नीतियों, जिनमें चार नए श्रम संहिता भी शामिल हैं, के विरोध में ट्रेड यूनियनों की तरफ से बुलाए गए 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल से बुधवार को केरल में जनजीवन पूरी तरह ठप्प हो गया। मंगलवार मध्यरात्रि से शुरू हुई इस हड़ताल को माकपा शासित राज्य में ट्रेड यूनियनों और वामपंथी संगठनों का जबरदस्त समर्थन मिला है। ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा इस राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया गया है, जिसमें 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (सीटीयू) के साथ-साथ स्वतंत्र अखिल भारतीय क्षेत्रीय महासंघ और एसोसिएशन शामिल हैं।
केरल के कोझिकोड में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच की तरफ से बुलाए गए ‘भारत बंद’ का प्रभाव दिखा।