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अफगानिस्तान को लेकर मोदी सरकार पड़ोसी धर्म का निर्वाह करे

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प ड़ोस की आग नहीं बुझी तो खुद का घर भी जल सकता है
रीवा . अफगानिस्तान में अराजकता की स्थिति बनी हुई है । अफगानिस्तान भारत का सांस्कृतिक अंग रहा है। वहां तालिबान का आतंक जारी है । बड़े पैमाने पर महिलाओं , वरिष्ठ नागरिक , बच्चों एवं बीमार व्यक्तियों की हालत अत्यंत चिंताजनक है । इस बात को लेकर नारी चेतना मंच ने चिंता एवं आक्रोश व्यक्त करते हुए मोदी सरकार से पड़ोसी धर्म का निर्वाह करने की अपेक्षा की है । गत 20 अगस्त को अफगानिस्तान की महिला सांसद रंगिना कारगर को जिस तरह से दिल्ली एयरपोर्ट से वापस भेज दिया गया , उसे सही नहीं कहा जा सकता है । यह भारी विडंबना है कि अफगानिस्तान को लेकर मोदी सरकार ने अभी तक अपनी चुप्पी साध रखी है । फिलहाल अफगानिस्तान से भारतीयों एवं हिंदू सिख अफगान नागरिकों को भारत लाया जा रहा है । ऐसे समय में बहुत सारे लोगों के पास प्रामाणिक कागजात भी नहीं होंगे। ऐसा लगता है कि सरकार आवश्यक पूछताछ के बाद उन्हें भारत आने दे रही है । नारी चेतना मंच ने इस अभियान को अधिक तेज और व्यापक करने की जरूरत बताई है । अफगानिस्तान की स्थिति को लेकर भारत सरकार अभी तक अपनी स्पष्ट राय नहीं बना पाई है । उसे ऊंट के करवट बदलने का इंतजार है । जबकि भारत सरकार को तालिबान सोच का स्पष्ट रूप से विरोध करना चाहिए । एक अफगानी महिला सांसद रंगिना कारगर को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर जिस तरह से आनन-फानन वापस भेजा गया उस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महिला सांसद कारगर ने कहा कि उन्हें गांधी के देश से इस तरह की उम्मीद नहीं थी । इस घटनाक्रम को लेकर अफसोस जताते हुए नारी चेतना मंच ने कहा है कि यह हम सबके लिए बहुत शर्मिंदगी की बात है । अफगानी महिला सांसद द्वारा भारत में शरण नहीं मांगी गई थी । लेकिन हमारा फर्ज बनता है कि उनसे हम बेहतर संवाद बना कर रखते । उनका लौटने का टिकट 22 अगस्त का था लेकिन उन्हें 20 अगस्त को ही दिल्ली एयरपोर्ट से तत्काल वापस कर दिया गया । ऐसा लगता है कि अफगानिस्तान की स्थिति को देखते हुए मोदी सरकार किंकर्तव्यविमूढ़ की स्‍थिति में है और किसी तरह का जोखिम लेने का साहस नहीं जुटा पा रही है । कायदे से मोदी सरकार को पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान की उक्त महिला सांसद की खैर खबर तो लेना चाहिए था । नारी चेतना मंच ने कहा कि पड़ोस की आग नहीं बुझी तो खुद का घर भी जल सकता है ।
नारी चेतना मंच ने कहा कि अफगानिस्तान की टॉप पॉप स्टार अरयाना सईद को मौजूदा हालात में भारत से काफी उम्मीदें हैं । तालिबान के दुष्प्रभाव बढ़ने से अफगानिस्तान के हालात बेहद अराजक एवं हिंसक हो चुके हैं । वहां जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है । ऐसी स्थिति में एक पड़ोसी मित्र देश के नाते अफगानिस्तान के लोग भारत से काफी उम्मीद रखते हैं लेकिन भारत सरकार का अभी तक का रवैया अफगानिस्तान से केवल भारतीयों और गैर मुस्लिस अफगानियों को सुरक्षित वापस लाने का रहा है । मोदी सरकार को अफ़ग़ानिस्तान स्थित भारतीयों को सुरक्षित निकालने की मुहिम तेज करने के साथ ऐसे तमाम अफगान लोगों को बिना धार्मिक भेदभाव के भारत में शरण देना स्वीकार कर लेना चाहिए जो वहां के हालात को देखते हुए अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं । यह ऐतिहासिक सच्चाई है कि भारत शरण देने में कभी पीछे नहीं रहा है बल्कि प्राण जाए पर वचन न जाए की भूमिका निभाई है  । भारत का संविधान धर्मनिरपेक्ष है लेकिन यह भारी विडंबना है कि सरकार में बैठे लोग शरणार्थियों की भी जाति धर्म पूछ रहे हैं । इससे शर्मनाक स्थिति किसी देश के लिए और क्या हो सकती है । अफगानिस्तान जैसे मुस्लिम देश में हिंदू सिख सांसद हो सकता है लेकिन भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में किसी अफगानी मुस्लिम को शरण मिलने की बात क्या यहां आने की भी इजाजत नहीं है । भारत सरकार से उम्मीद है कि अफगानिस्तान में शांति प्रयासों को तेज करने में अहम भूमिका निभाए । भारत सरकार को अफगानिस्तान के लोगों के अमन चैन को लेकर अविलम्ब न्यायोचित हस्तक्षेप करना चाहिए ।

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