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मोदी जी ने ठीक कहा, अजब है गजब है मध्यप्रदेश, जिसमें शिवराज के राज में किसानों से चेक से रिश्वत लेते नौकरशाह

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भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। चाहे प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी हों या शिवराज सिंह चौहान दोनों ही कहते हैं ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा इसके बाद भी मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सत्ता पर काबिज होने के बाद उनके शासन की कार्यशैली का संकेत उनके परिजनों ने दिया था, वह प्रथा आज भी इस प्रदेश में बदस्तूर जारी है, कहने को तो प्रधानमंत्री यह दावा करते हैं कि शिवराज सिंह ने कांग्रेस के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के शासनकाल में जो मध्यप्रदेश बीमारू राज्यों की श्रेणी में आता था लेकिन शिवराज सिंह ने सत्ता संभालते ही अपनी शासन की कार्यशैली के चलते विकास के नाम पर भेरूबाबा तो खड़े कर दिये, तो वहीं सबका साथ सबका विकास के नारे को बुलंद करते हुए प्रदेश में बही भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डुबकी लगाकर अधिकारियों ने शासकीय खजाने को खूब चूना लगाया जिसके परिणाम मध्यप्रदेश में इन दिनों जांच एजेंसी, लोकायुक्त व ईओडब्ल्यू के द्वारा मारे जा रहे छापों में उजागर हो रहे हैं

लेकिन मजे की बात यह है कि जहां जांच एजेंसियां छापा मारने के बाद इस बात का खुलासा करती हैं कि १२ हजार रुपये मासिक वेतन पानी वाला करोड़पति कैसे बन गया? लेकिन इसी प्रदेश में शिवराज के शासनकाल के सत्ता संभालने के बाद सबका साथ, सबका विकास के नारे के साथ-साथ स्वर्णिम मध्यप्रदेश के ढिंढोरे के चलते वह भाजपाई नेता जिनकी हैसियत शिवराज के सत्ता संभालने के पूर्व टूटी साइकल तक खरीदने की नहीं थी आज वह आलीशान भवनों और लग्जरी वाहनों में फर्राटे भरते नजर आ रहे हैं इसी अजब-गजब मध्यप्रदेश में किसानों के हितैषी बनकर किसानों के साथ तमाम तरह की वारदातें हुई हैं जिनमें कभी नकली मूंग के बीज किसानों को बांटकर उनकी फसल चौपट करने का काम भी शिवराज के शासनकाल में हुआ तो वहीं शिवराज सिंह ने अपने फार्म हाउस में डेढ़ एकड़ में लाखों के फूल पैदा होने का ढिंढोरा पीटकर फूलों की खेती की ओर आकर्षित किया तो कभी अनार तो कभी शिमला मिर्च, टमाटर और भिंडी लगाने की किसानों को खूब सलाह दी लेकिन उनके उस फार्म हाउस में जिसमें वह सभी फसलों से लाखों रुपये कमाने का ढिंढोरा तो पीटा लेकिन उन्होंने किसानों को यह नहीं बताया कि उनके फार्म हाउस की देखरेख कृषि अधिकारियों के सामने होता है, इसी प्रदेश की जनता ने प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक इस ढिंढोरे की खूब गूंज सुनी जिसमें ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा का दावा किया गया लेकिन इसी प्रदेश की स्थिति यह है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार की गंगोत्री ऊपर से नीचे तक बह रही है कि प्रदेश का नौकरशाह किसानों से रिश्वत में नकदी की बजाये चेक से भी रिश्वत लेने की जुर्रत करता है, शायद मोदी की पारखी नजरों में अजब-गजब होने की तस्वीर जिसमें जमकर भ्रष्टाचार की गंगोत्री बह रही है, यही नहीं कि प्रदेश के सत्ता के मुखिया शिवराज सिंह भी वाकिफ नहीं हो, इन्हीं शिवराज सिंह ने इस मध्यप्रदेश में अधिकारियों को सूखा पर्यटन के नाम पर जमीनी हकीकत का जायजा लेने भेजा गया था, जिन अधिकारियों को भेजा गया था उन अधिकारियों ने प्रदेश के जमीनी हालात का जायजा लेते हुए जो रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी थी उसमें इस बात का खुलासा उन अधिकारियों ने किया था कि प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी हितग्राहियों को नहीं है, यही नहीं हितग्राहियों को योजना का लाभ उठाने के लिये अधिकारियों की सेवा तक देनी पड़ती है। लेकिन इस सब परिस्थितियों से अवगत होने की वजह से २०१८ के विधानसभा चुनाव में इन्हीं शिवराज और भाजपा की सरकार से बेदखल होना पड़ा था। अब चौरी बार वह जब उधार के सिंदूर से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बने हैं फिर भी उनकी कार्यशैली में आज भी कोई परिवर्तन नजर नहीं आ रहा है बल्कि यूं कहें कि भाजपा नेताओं की माली हालत देखते हुए अधिकारियों की यह हिम्मत हो गई है कि अब वह रिश्वत की राशि नगद नहीं बल्कि चेक से भी लेने की हिमाकत करने लगे हैं। इन घटनाओं को देखकर यही कहा जा सकता है। कि अजब है मध्यप्रदेश अजब है, मध्यप्रदेश गजब है…? 

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