एस पी मित्तल, अजमेर
आम परिवारों की गृहणी की तरह मोनिका जैन भी एक गृहणी हैं। कुछ वर्ष पहले जब उन्हें गिर नस्ल की गाय के दूध और घी के महत्व का पता चला तो उन्होंने अजमेर के लोहागल रोड स्थित अपना घर के निकट श्री सुधासागर डेयरी फार्म की शुरुआत की। तब डेयरी शुरू करने का मकसद अजमेर के लोगों को गिर नस्ल की गाय का शुद्ध दूध और घी उपलब्ध करवाना था। लेकिन कोरोना काल में जब इम्यूनिटी बढ़ाने की समस्या आई तो यही गिर गाय का दूध लोगों के लिए अमृत बन गया। मोनिका का कहना है कि टीवी चैनलों पर इम्यूनिटी बढ़ाने के उत्पादों के कितने भी विज्ञापन आए, लेकिन गिर गाय के दूध से जो इम्यूनिटी बढ़ती है उसका कोई मुकाबला नहीं है। बाजार में विभिन्न कंपनियां अपने च्यवनप्राश को लेकर इम्यूनिटी बढ़ाने का दावा करती है, लेकिन यदि 15 दिनों तक गिर गाय के दूध का सेवन कर लिया जाए तो फिर किसी भी च्यवनप्राश की जरूरत नहीं है। मोनिका ने बताया कि उनके डेयरी फार्म में गुजरात से लाई गई गिर नस्ल की 25 गाय हैं। एक गाय की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपए हैं। दूध की मांग लगातार बढ़ रही है, दूध से बिलोना पद्धति से घी भी बनाया जाता है, जिसकी मांग भी लगातार बढ़ रही है। मोनिका ने बताया कि जो लोग उनके डेयरी फार्म के दूध का सेवन कर रहे हैं, वे बताते हैं कि इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ साथ पुराने रोगों का भी इलाज हो रहा है। बच्चों के लिए तो गिर गाय का दूध बहुत ही उपयोगी होता है। जो बच्चे सरकारी डेयरी अथवा देसी गायों या अन्य पशुओं का दूध पीने से परहेज करते हैं वे बच्चे भी आसानी से गिर गाय का दूध पीते हैं। चिकित्सा वैज्ञानिकों का मानना है कि मां के बाद गिर का दूध भी बच्चों के लिए सर्वोत्तम है। यह दूध कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करता है। एसिडिटी, टीबी, डायबिटीज, कैंसर आदि रोगों को मिटाने में भी यह दूध सहायक है। गिर गाय के दूध में अमीनो एसिड होता है जो पाचन शक्ति को बढ़ाता है। दूध में विटामिन ए, बी-1, बी-2, बी 3, बी-4 एवं बी-12, विटामिन डी और ओमेगा-3 भी होता है। गिर गाय का दूध मोटापा भी कम करता है। मोनिका जैन ने बताया कि उनके डेयरी फार्म का मकसद लाभ कमाना नहीं है, उनका मकसद लोगों को रियायती दर पर गीर गाय का शुद्ध दूध और घी उपलब्ध करवाना है। अजमेर शहर में होम डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध है। गिर गाय के दूध और घी की गुणवत्ता की और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9928817500 तथा 8769912345 पर मोनिका जैन से ली जा सकती है। श्रीमती जैन ने बताया कि उनके डेयरी फार्म में आने वाले दिनों में प्राकृतिक खेती पर जोर दिया जाएगा। प्राकृतिक खेती में किसी भी प्रकार से कीटनाशक पदार्थों का उपयोग नहीं होता है। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि गाय के गोबर और मूत्र से उत्तम क्वालिटी की खाद और कीटनाशक पदार्थ तैयार किए जा सकते हैं। प्राकृतिक खेती पर वे लगातार अध्ययन कर रही है।

