मध्य प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों के एक लाख से ज्यादा पद से खाली पड़े हुए हैं. इससे प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की चिंताजनक स्थिति सामने आई है. बजट सत्र के दौरान विधानसभा में शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने इस पर बड़ी बात कही है.
भोपाल मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है. इस दौरान विधानसभा में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप और प्रत्यारोप का दौर देखने को मिला. विधायक प्रताप ग्रेवाल ने मध्य प्रदेश के स्कूल में शिक्षकों के खाली पड़े पदों को लेकर प्रश्न पूछा. जिस पर शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने जवाब दिया है.
मध्य प्रदेश के स्कूलों में इतने पद हैं रिक्त
शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न पर जानकारी देते हुए बताया है कि मध्य प्रदेश में शिक्षकों के 1 लाख 15 हजार 678 पद खाली पड़े हुए हैं. स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षक के स्वीकृत 289005 पद हैं. इसमें से 174419 कार्यरत और 115678 पद रिक्त हैं, जो स्वीकृत पद के 40% हैं. प्राथमिक विद्यालय में स्वीकृत 133576 पद में 55626, माध्यमिक विद्यालय में 110883 पद में 44546 तथा उच्च माध्यमिक के 44546 पद में से 15506 पद रिक्त हैं.
उदय प्रताप सिंह ने बताया कि 22973 परिसर में एक शाला, एक परिसर के तहत 49477 शाला विलय कर दी गई. प्रदेश में 83514 विद्यालय में से 1968 स्कूलों में एक शिक्षक तथा 46417 विद्यालय में दो शिक्षक हैं. तथा उनमें नामांकन क्रमशः 41965 तथा 1373270 हैं.
जीर्ण शीर्ण भवनों की भी दी गई जानकारी
स्कूल में एक शिक्षक के मामले में मध्य प्रदेश का धार जिला पहले नंबर पर है, जहां सबसे ज्यादा 144 विद्यालय हैं, जिनमें सिर्फ एक ही शिक्षक है. प्रताप ग्रेवाल द्वारा जीर्ण शीर्ण भवन तथा शौचालय की जानकारी मांगने पर बताया कि 5735 प्राथमिक विद्यालय जीर्ण शीर्ण है. 1725 विद्यालय में बालक शौचालय तथा 1784 में बालिका शौचालय भी नहीं है.
उच्च माध्यमिक विद्यालय में 75 में बालक शौचालय और 43 में बालिका शौचालय नहीं है. जीर्ण शीर्ण विधालय में सबसे ज्यादा झाबुवा में 618 तथा धार में 550 विधालय हैं.
20 से कम विद्यार्थी वाले हैं इतने स्कूल
मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा संचालित 20 से कम विद्यार्थी वाले स्कूल 11889 हैं, जिनमें 148817 छात्र हैं तथा 23873 अध्यापक हैं. इस तरह से प्रत्येक विद्यालय में औसतन 13 विद्यार्थी तथा दो अध्यापक हैं. इसके अलावा जनजाति कार्य विभाग द्वारा संचालित 3773 शाला में 51230 विद्यार्थी तथा 7490 अध्यापक हैं.

