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मुकेश मल्होत्रा की बची विधायकी,लेकिन राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे 

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 विजयपुर विधानसभा सीट को लेकर चल रहे घमासान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया है. अब मुकेश मल्होत्रा की विधायकी बच गई है, लेकिन वह राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के आदेश को खारिज कर दिया था.

कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है. उनको अगली सुनवाई तक स्टे मिल गया है. अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी. मुकेश मल्होत्रा की तरफ से विवेक तन्खा ने की पैरवी की. लेकिन सुप्रीम कोर्ट की तरफ से यह भी बताया गया है कि उन्हें विधायक के तौर पर मिलने वाले भत्ते और पेंशन नहीं मिलेंगे. इसके अलावा वह राज्यसभा चुनाव में वोट भी नहीं डाल पाएंगे.

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं, जिनके लिए जून में चुनाव में होना है. लेकिन अब कांग्रेस का एक विधायक पहले से ही कम हो गया है, जब मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे. जबकि कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे लगातार बीजेपी के मंच पर ही नजर आती हैं. मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों की जरूरत है. जबकि कांग्रेस के पास 65 MLA हैं.

कांग्रेस के लिए राज्यसभा जीतने के लिए बढ़ीं मुश्किलें
अब मुकेश मल्होत्रा के केस में ऐसा फैसला आया है, जिसमें उन्हें भी राज्यसभा चुनाव में वोट डालने का मौका नहीं मिल पाएगा. ऐसे में कांग्रेस के पास वोट डालने के लिए सिर्फ 63 विधायक ही बचे हैं. अगर इनमें से 6 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी, तो कांग्रेस के लिए राज्यसभा की सीट जीत पाना मुश्किल होगा.

हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने चुनाव को किया था शून्य
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने मुकेश मल्होत्रा को आपराधिक मामले छिपाने के लिए चुनाव शून्य घोषित कर दिया था. इसके बाद भाजपा नेता रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था, तब रामनिवास ने अपने समर्थकों में इस बात की खुशी मनाई थी और मिठाइयां भी बांटी थीं. ग्वालियर हाईकोर्ट की बेंच ने मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए 15 दिन का समय दिया था.

कांग्रेस बोली असहज करने वाला फैसला
कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. विक्रम चौधरी ने कहा कि हाईकोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया था जो सबको असहज कर रहा था. क्योंकि न्यायालय व्यवस्था में कड़ी सजा का प्रावधान तो है लेकिन परंपरा नहीं है, अब भी जो फैसला दिया है वह भी समझ से परे नजर आ रहा है. जब उनको स्टे दिया गया है तो यह क्यों कहा गया कि वह राज्यसभा में वोटिंग नहीं कर पाएंगे और वेतन भत्ते भी नहीं ले पाएंगे, जबकि सीधा स्पष्ट आदेश होना चाहिए यदि स्टे दिया है, तो वह विधायक के सभी दायित्वों का निर्वहन कर पाएंगे.

मुकेश मल्होत्रा ने कही ये बात
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कांग्रेस के विधायक मुकेश मल्होत्रा का बयान भी सामने आ गया है. उन्होंने कहा कि कोर्ट ने जो भी फैसला सुनाया है. उससे मैं संतुष्ट हूं. यह विजयपुर के मतदाताओं की जीत है. हमने चुनाव के दौरान किसी भी तरीके की कोई जानकारी नहीं छुपाई थी. सारी जानकारियां और केस के बारे में बताया था. इन्हीं को आधार मानकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है. मेरे कुछ अधिकारों पर रोक लगाई गई है, लेकिन हम पूरी ताकत के साथ जनता की लड़ाई लड़ते रहेंगे.

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