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खतरे के निशान से 18 मीटर ऊपर बह रही नर्मदा नदी, बैकवाटर से कई गांव घिरे,रात 12 तब गांवों में रही मेधा पाटकर

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बड़वानीप्रदेश सहित बड़वानी जिले में भी भारी बारिश का दौर जारी है। नर्मदा नदी खतरे के निशान 123.300 से 18 मीटर ऊपर 141 मीटर पर बह रही है। जिससे सरदार सरोवर बांध के बैकवाटर से नर्मदा पट्टी के गांवों में डूब का खतरा मंडराने लगा है। बड़वानी जिले के राजघाट, कसरावद, जंगरवा, पिछोडी, कुंडीया, धनोरा, चिपा खेड़ी, अवलदा, भिलखेड़ा, भवती, बिजासन सहित आसपास के गांवों में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। यहां बाढ़ में 5 गांव टापू बन गए हैं। शनिवार रात को यहां के ग्रामीणों को घर-सामान को छोड़कर अन्य स्थानों पर शरण लेना पड़ी।

बड़वानी जिले के अंजड़ तहसील के छोटा बड़दा गांव को प्रशासन ने खाली करा दिया है। ग्रामीणों को पुनर्वास स्थल भेजा गया।

रात 12 तब गांवों में रही मेधा पाटकर

बड़वानी जिले की अंजड़ तहसील के छोटा बड़दा गांव को प्रशासन ने खाली कराया है। प्रभावितों को पुनर्वास स्थल भेजा गया, जहां सुविधाएं नहीं मिलने से लोग परेशान होते रहे और पूरी रात सो नहीं पाए। रविवार को ग्राम भवती के आक्रोशित डूब प्रभावितों ने पुतला दहन कर प्रदर्शन किया।

नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर भी रात 12 बजे तक डूब गांवों में रही। उनका आरोप है कि यह डूब गुजरात सरकार की सुनियोजित डूब है। सरदार सरोवर के 17 मीटर ऊंचे गेट बंद हैं। हम लगातार गेट खोलने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नर्मदा बैकवाटर के सभी गांव जलमग्न हैं ओर पुनर्वास स्थलों पर कोई सुविधाएं भी नहीं हैं।

बाढ़ में घिरे लोगों को नाव से बाहर निकाला गया। उनको पुनर्वास स्थल भेजा गया है, लेकिन लोगों का कहना है कि वहां सुविधाएं नहीं हैं।

ग्राम भवती में प्रभावितों ने किया प्रदर्शन

जिले के ग्राम भवति में बाढ़ प्रभावितों ने सरकार व जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, और पुतला बनाकर अर्थी निकाली। ग्रामीणों का कहना है कि हमें पता ही नहीं था कि हम भी डूब प्रभावित क्षेत्र में शामिल हैं।

वाहनों में भरकर लोगों ने अपना सामान दूसरी जगह ले गए।

खतरे के निशान से 18 मीटर ऊपर बह रही नर्मदा

बड़वानी जिले में नर्मदा नदी का खतरे का निशान 138.68 मीटर है। जबकि रविवार को नर्मदा का जलस्तर 142 मीटर पार हो गया है। यह खतरे के निशान से 18 मीटर ऊपर है। ग्रामीणों का कहना है कि भवति कभी भी डूब क्षेत्र का हिस्सा नहीं रहा। इस वजह से 25 से 30 परिवार के लोग बिना बिजली पानी टीन शेडों में रहने को मजबूर हैं।

गांव में 2-4 मकान ही बचे

बिछोड़ी के ग्रामीण हऊ सिंह अवासा ने कहा कि हमें तो पता ही नहीं था कि पानी इतना आ जाएगा। मकानों में पानी घुस गया। मेरा घर धंस गया। गांव में 2-4 मकान ही बचे हैं। रात में पानी भराया तब भी हमने सीएम हेल्प लाइन में शिकायत की थी, लेकिन कोई मदद नहीं आई।

कनक सिंग और बहादुर सिंग ने बताया कि हम लोग बाढ़ के बावजूद टीन शेड में बुजुर्गों और मवेशियों के साथ रहने को मजबूर हैं।

राजघाट में बाढ़ के बीच रह रहे 17 परिवार

राजघाट के टापू पर रहने वाले कनक सिंग और बहादुर सिंग ने बताया कि हम लोग बाढ़ के बावजूद टीन शेड में बुजुर्गों और मवेशियों के साथ रहने को मजबूर हैं। इन लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन ने मुआवजे की राशि भी नहीं दी है और टीन शेड में रहने के लिए कहता है, जहां मावेशियों के साथ रहना अशंभव है, इसलिए हम अपनी मांगों को लेकर यहां बैठे हैं।

लोगों को नाव की सहायता से दूसरी जगह ले जाया गया। जयस प्रवक्ता संदीप नरगावे ने बताया कि डूब प्रभावित लोग मरने के लिए मजबूर हैं।

पूरा गांव टापू बन चुका: राहुल यादव

नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े राहुल यादव ने कहा कि सरदार सरोवर का जलस्तर 142 तक पहुंच चुका है। यहां के जांगरवा गांव में 70 मकान के विस्थापितों को संपूर्ण पुनर्वास नहीं हुआ है। अवाल्दा में पूरा में पूरा गांव टापू बन चुका है। लोगों को तो निकाला जा रहा है, लेकिन मवेशियों को कैसे लाए।

लोग मरने को मजबूर: जयस

जयस प्रवक्ता संदीप नरगावे ने बताया कि डूब प्रभावित लोग मरने के लिए मजबूर हैं। लोगों को समय पर मुआवजा दिया गया होता वे अपने गांव में नहीं रुकते। हमने कलेक्टर से चर्चा कर स्थिति से अवगत कराया है।

कांग्रेस नेता राजन मंडलोई ने कहा कि ग्रामीणों को उम्मीद थी कि डूब 138 मीटर तक आती है, लेकिन पानी 145 मीटर तक पहुंच गया।

घरों में घुस आया पानी, प्रशासन ने कोई खबर नहीं ली

कांग्रेस नेता राजन मंडलोई ने कहा कि ग्रामीणों को उम्मीद थी कि डूब 138 मीटर तक आती है, लेकिन पानी 145 मीटर तक पहुंच गया। कई घरों में पानी घुस गया। अनाज बह गया। प्रशासन ने कोई चेतावनी नहीं दी। कोई खबर लेने वाला तक नहीं था। लोगों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया। लोगों ने दूसरे की मदद कर खुद को बचाया। मंत्री-सांसद हालचाल तक लेने नहीं आए।

ग्रामीणों का कहना है कि पानी खतरे के निशान से ऊपर है और प्रशासन ने कोई चेतावनी नहीं दी।

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