जबरन वीआरएस नीति वापस लेनी चाहिए: श्रमिकों की आजीविका के अधिकार को बनाए रखे!!!
एनएपीएम से जोडी देशभरके अनेक संघटन – आंदोलन सेंचुरीके श्रमिकोंके साथ हैं। श्रमिक जनता संघ को एनएपीएमका पूरा समर्थन है।
हम जानते हैं कि सेंचुरी डेनिम इकाई के श्रमिकों के द्वारा 44 महीने से मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में एबी रोड पर ग्राम सतराटी में आंदोलन किया जा रहा है। सेंचुरी के हजारों कार्यकर्ता महामारी से पहले और उसके दौरान, प्रबंधन और शांतिपूर्वक संगठित होने की मजदूर विरोधी नीतियों से लड़ रहे हैं। जहां देश भर के एनएपीएम सहीत तमाम संगठन व्यक्ति हर वर्ग के लोगों ने पहुंचकर इस अद्भुत संघर्ष को अपना समर्थन दिया है।
29 जून 2021 को कारखाना प्रबंधक द्वारा श्रमिक एवं कर्मचारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) के संबंध में पत्र लिखकर कहा गया कि 13 जुलाई 2021 तक सभी श्रमिक एवं कर्मचारी वीआरएस ले लें। सेंचुरी डेनिम का यह निर्णय गैरकानूनी है तथा 90 प्रतिशत श्रमिकों को मंजूर नही है।
हम जानते हैं कि श्रमिक जनता संघ की याचिका के चलते औद्योगिक ट्रिब्यूनल, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर मिल बंद होने के बावजूद श्रमिकों को वेतन दिया जा रहा है।
आपका अद्भुत संघर्ष रहा है। जिसमें कंपनी के कर्मचारियों ने स्वयं मिल चलाने की चुनौती को भी स्वीकार किया। मिल मालिकों को बता दिया कि हम आप मजदूर भी मिल चला सकते हैं। मिल मालिक खुद ही पीछे हटे।
वीआरएस का खेल कंपनी कई बार खेल चुकी और अब कंपनी ने हाल ही में 1,000 से अधिक कर्मचारियों पर वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) के गैरकानूनी फैसले को लादने की कोशिश की है। इस ‘वीआरएस नोटिस’ को चुनौती देने के लिए मुंबई में कंपनी मुख्यालय पहुंचे। जहां पर उन्होंने पुलीस ज्यादती भी भुगती। हम आपकी मांग के साथ हैं : 1-जबरन वीआरएस नीति वापस लेनी चाहिए।2-श्रमिकों के आजीविका के अधिकार को बनाए रखना जरूरी है।
विनित,
अरूंधती धुरू, ऋचा सिंह, मीरा संघमित्रा, आशिष रंजन, फैजल खान, विमल भाई, संजय मंगला गोपाळ*राष्ट्रीय संयोजन समिती, जन आंदोलनोंका राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम)*
मोटरसाइकल रैली और पद रैली आकर के सेंचुरी के गेट पर सैकड़ों श्रमिकों ने आवाज उठायी
सेंचुरी मैनेजमेंट ने ( यार्न/डेनिम मिल्स, म. प्र. के) श्रमिकों को 13 जुलाई की समय सीमा के साथ, 29 जून के रोज धमकी वजा नोटिस लगाकर चुनौती दी थी। बहुसंख्य श्रमिकों ने, जिनमें से अधिकांश श्रमिक जनता संघ के सदस्य हैं, VRS नकारकर रोजगार के लिए अपना ‘सत्याग्रही’ संघर्ष जारी रखा है। करीबन 30 कर्मचारियों ने भी VRS नकारा है। श्रमिकों की साथ दी है। आज, 14 जुलाई की सुबह मोटरसाइकल रैली और पद रैली आकर के सेंचुरी के गेट पर सैकड़ों श्रमिकों ने आवाज उठायी। श्रमिकों के परिवारों से महिलाओं ने भी आकर सहभाग लिया है। कल से उपवास पर बैठे अनशनकारी भी साथ में है। मध्य प्रदेश के करीबन 70 जन संगठन तथा कई मान्यवर प्रा. आनंदकुमार, प्रा. प्रफुल्ल समंत्रा ओडिसा, प्रा.वरिष्ठ पत्रकार अरुण त्रिपाठी, प्रा. ड़ॉ. संदीप पांडेय सोशलिस्ट पार्टी, प्रा.बी आर पाटिल बंगलूरु, प्रा. हिम्मत सेठ राजस्थान, प्रा. अविक साहा किसान आंदोलन, प्रा.अरुण कुमार श्रीवास्तव दिल्ली, प्रा. शाहिद कमाल बिहार, तथा ड़ॉ. सुनीलम मध्यप्रदेश और अन्य ने श्रमिकों को सहयोग और समर्थन घोषित किया है।

