अग्नि आलोक

देश में फासीवादी सरकार को परास्त करने के लिए एकजुटता की जरूरत -कल्याण जैन

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अतीत की गलतियों से सबक लेकर फासीवाद के विरोध में प्रतिरोध संगठित करना होगा

 स्मृति दिवस पर समाजवाद के स्वप्नदृष्टाओं को किया याद

 इंदौर। विचार अभियान  द्वारा शहीद ए आजम भगत सिंह, क्रांतिकारी कवि अवतार सिंह पाश की शहादत तथा समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया एवं क्रांतिकारी हेमू कालानी के जन्मदिवस पर एक स्मृति सभा का आयोजन किया गया। सभा में वक्ताओं ने समाजवादी समाज के स्वप्नदृष्टाओं के संकल्पों के प्रति प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए देश में आहट दे रहे  फासीवाद को परास्त करने के लिए प्रतिरोध खड़ा करने का आवाहन किया।

वरिष्ठ समाजवादी नेता, पूर्व सांसद कल्याण जैन ने इस अवसर पर कहा कि भगत सिंह मार्क्सवाद से तथा लोहिया गांधीजी से प्रभावित थे। लोहिया कहते थे कि बुराइयों को मिटाने के लिए उसकी बुनियाद पर चोट करना चाहिए। देश में फासीवादी सरकार को परास्त करने के लिए एकजुटता की जरूरत है। गैर भाजपा विपक्ष को कांग्रेस के वर्ग चरित्र पर पुनर्विचार करना चाहिए। वर्तमान समय में सरकार विरोधी आंदोलनों में कांग्रेस को भी साथ लेने की जरूरत है। वर्तमान शासक ऊंचे स्वर में झूठ बोलकर उसे बार-बार प्रचारित कर सच पर पर्दा डाल रहे हैं। देश का लोकतंत्र खतरे में है। पूंजीपतियों के अपराधों को छिपाने के लिए सरकार संसद को चलने नहीं दे रही है। शासक दल का दोहरा चरित्र है । उनकी कथनी और करनी में अंतर है।

बैंक अधिकारी नेता अरविंद पोरवाल ने कहा कि समाज और राजनीति पर सरमायेदार इस तरह कब्जा कर चुके हैं कि समाजवाद, साम्यवाद पर चर्चा करना मुश्किल तो हो गया है लेकिन यह जरूरी है। पूंजीवाद मरणासन्न अवस्था में है। वह अपने आप को बचाने के लिए उग्र हो रहा है और अमानवीय फासीवाद में बदल रहा है। देश की व्यवस्था पर कारपोरेट और धर्मांधता काबिज हो चुके हैं। इसे बदलने के लिए एकमात्र मार्ग संघर्ष ही है। जब तक असमानता है तब तक साम्यवाद और समाजवाद प्रासंगिक बना रहेगा। देश में प्रतिरोध की आवाज को वामपंथ की आवाज के रूप में पहचाना जाता है। देश में जारी आंदोलनों का एकीकरण करने की आवश्यकता है।

आयोजन का संचालन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार रामस्वरूप मंत्री ने कहा कि भगत सिंह और लोहिया समकालीन थे। जब भगत सिंह को फांसी दी जा रही थी उसी दौरान जिनेवा में लीग ऑफ नेशंस का अधिवेशन चल रहा था, जिसमें भारत के प्रतिनिधि के रूप में बीकानेर के राजा पहुंचे थे। वहां राजा ने अंग्रेज शासन का गुणगान किया जिससे दर्शक दीर्घा में बैठे राम मनोहर लोहिया आक्रोशित हो गए और नारे लगाते हुए भगत सिंह की फांसी का विरोध करने लगे थे।

प्रगतिशील लेखक संघ इंदौर इकाई के सचिव हरनाम सिंह के अनुसार वामपंथियों को अतीत की गलतियों से सबक लेकर फासीवाद के विरोध में प्रतिरोध संगठित करना होगा। युवाओं, मजदूरों, किसानों, दलितों, महिलाओं एवं पीड़ितों के आंदोलनों में शरीक रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भगत सिंह के नाम पर आडंबर जारी है। उनके विचारों को इरादतन छिपाया जा रहा है। राजनीति के बोने लोग भगत सिंह का नाम लेकर अपना कद बढ़ा रहे हैं। भगत सिंह धर्मनिरपेक्षता, समाजवादी समाज के स्वप्न दृष्टा थे वर्तमान शासक और उनका दल पूरी तरह इन मूल्यों के विरोध में खड़ा है।

 प्र ले स कोषाध्यक्ष विवेक मेहता ने कहा कि भगत सिंह का चिंतन मौजू है। उनका सोच आज भी प्रासंगिक है। देश के बारे में भगत सिंह के आकलन और विश्लेषण ने ही उन्हें समाजवाद की ओर प्रेरित किया। उन्होंने तत्कालीन राजनीति और समाज की विसंगतियों पर लिखा। प्रमोद नामदेव के अनुसार आज का समाज विचार शून्य हो गया है। सोशल मीडिया का प्रचार युवा पीढ़ी को गलत दिशा में ले जा रहा है। भगत सिंह ने जेल में 14 सौ किताबें पढ़ी थी। वह एक विचार के रूप में हमारे बीच मौजूद हैं। वाम आंदोलनों को सही दिशा देने की जरूरत है।

 चुन्नीलाल वाधवानी ने शहीद हेमू कालानी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वह भगत सिंह से प्रेरित था। सिंध में उन्हें सिंध के भगत सिंह के नाम से याद किया जाता है। हेमू कालानी को ऐसे अपराध में सजा दी गई जो कि घटा ही नहीं था। हेमू कालानी ने माफी मांगने के स्थान पर शहादत को स्वीकार किया। महिला नेत्री सारिका श्रीवास्तव, कर्मचारी नेता ओमप्रकाश खटके , विजय दलाल, अनिल सोनी ने भी अपने विचार रखे।

 सीपीआई नेता रूद्र पाल यादव भी मंचासीन थे। आभार माना मोहम्मद शफी ने।

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