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नीरज की जीत : कहा -गोल्ड जीतने के बाद बोले – दूसरा थ्रो फेंकते ही समझ गया था ये बेस्ट होगा

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टोक्यो

जेवलीन थ्रो में भारत को गोल्ड जिताने वाले एथलीट नीरज चोपड़ा ने शनिवार रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी जीत का मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि मैंने पहले ही सोच लिया था कि मेरे शुरुआती कुछ थ्रो में ही बेस्ट आ जाना चाहिए। ऐसा करने पर दूसरे खिलाड़ियों पर प्रेशर आ जाता है। दूसरा थ्रो करते ही मैं समझ गया था कि ये बेस्ट है।

उन्होंने कहा कि जैसे जर्मनी के एथलीट योहानेस वेटेर का वर्ल्ड परफॉर्मेंस अच्छा रहा है, लेकिन वे आज के खेल में उतना अच्छा वे परफॉर्म नहीं कर पाए। मुझे इस बात का दुख है कि वर्ल्ड लेवल का खिलाड़ी इस तरह हार गया। उन्होंने मेरे बारे में कहा था कि मुझे उनके पास पहुंचने में काफी समय लगेगा, लेकिन मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहता। मैंने सिर्फ अपना बेस्ट देने के बारे में सोचा था। अब मैं और ज्यादा मेहनत करूंगा और 90 मीटर का रिकॉर्ड बनाने की कोशिश करूंगा।

घर पर नहीं हो सकी बात
उन्होंने बताया कि जीत के बाद आने वाली बधाइयों के बीच वे इतने व्यस्त हो गए कि रात 9 बजे तक अपने परिवार से बात नहीं कर पाए। लेकिन, उन्होंने अपने गांव में खुशी के माहौल के कुछ वीडियो देखे। उसमें सब नाचते हुए दिखाई दे रहे हैं।

टेक्निक का खेल है जेवलिन थ्रो
नीरज ने बताया कि जेवलिन टेक्निकल इवेंट है। इसमें जरा सी टेक्निक गलत होने पर खेल बिगड़ जाता है। काफी मेहनत करनी पड़ी। इसके लिए फोकस्ड होना बहुत जरूरी था। उन्होंने बता कि कोच की बात मानकर उन्होंने काफी वर्कआउट किया। ऐसा करना उन्हें अच्छा लगता है। उन्होंने अपना पूरा फोकस अपनी ट्रेनिंग पर रखा। आज जो गोल्ड मिला है, वह सालों की मेहनत का नतीजा है।

हर बार हम चूक जाते थे
एथलेटिक्स में पहली बार गोल्ड आने पर उन्होंने कहा कि सभी खेलों में हमारे देश में गोल्ड आते रहे हैं। हॉकी में भी गोल्ड आते रहे हैं, लेकिन एथलेटिक्स में वर्ल्ड लेवल पर हमारे खिलाड़ी थोड़े अंतर से चूक जाते थे। अब गोल्ड जीतना जरूरी हो गया था। मेडल आने से एथलेटिक्स और जेवलिन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

खेल के पहले कोई दबाव नहीं था
नीरज ने कहा कि मेरे मन में तो था कि अभी तक देश में एक भी गोल्ड नहीं आया और आखिरी खेल मेरा ही था, लेकिन इस बात का कोई दबाव नहीं था। खासतौर पर जब में जेवलिन लेकर रनवे पर होता हूं तो मेरे मन में यह सब बातें नहीं होती। मेरा फोकस सिर्फ अपने खेल पर होता है।

अंजू बॉबी जॉर्ज से बात की
जीत के बाद उन्होंने लॉन्ग जंप खिलाड़ी अंजू बॉबी जॉर्ज से भी बात की। अंजू ने उन्हें बधाई दी और कहा कि वे नीरज के भारत आने का इंतजार कर रही हैं और उन्हें लेने एयरपोर्ट आएंगी। इस पर नीरज ने उनका शुक्रिया अदा किया और बोले कि वे उनके नक्शेकदम पर ही चल रहे हैं।

फ्लाइंग सिख को मेडल समर्पित कर नीरज बोले- वे स्वर्ग से देख रहे होंगे

फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह के दुनिया से रुखसत होने के करीब पौने 2 महीने के बाद उनका सपना साकार हो गया। मिल्खा चाहते थे कि कोई भारतीय फील्ड और ट्रैक पर यानी एथलेटिक्स में ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीते। जेवलिन थ्रो में गोल्ड जीतकर हरियाणा के नीरज चोपड़ा ने इसे सच कर दिया। मिल्खा सिंह का कोविड संक्रमण के बाद 18 जून को निधन हो गया था।

मिल्खा सिंह ने 1956 के मेलबर्न ओलिंपिक, 1960 के रोम ओलिंपिक और 1964 के टोक्यो ओलिंपिक में हिस्सा लिया था, लेकिन वे मेडल नहीं जीत सके थे। उन्होंने रोम ओलिंपिक में 400 मीटर रेस में हिस्सा लिया था, लेकिन मेडल जीतने से सेकेंड के दसवें हिस्से से चूक गए थे और चौथे स्थान पर रहे थे। इसके बाद से ही वे अक्सर ख्वाहिश जताते थे कि कोई भारतीय एथलेटिक्स में गोल्ड जीते।

पदक के साथ मिल्खा सिंह से मिलना चाहता था
हरियाणा के पानीपत में रहने वाले नीरज ने पदक जीतने के बाद कहा, ‘मैं अपने गोल्ड मेडल को महान मिल्खा सिंह को समर्पित करता हूं। वे शायद मुझे स्वर्ग से देख रहे होंगे। मैं पदक के साथ मिल्खा सिंह से मिलना चाहता था। मैंने स्वर्ण पदक जीतने के बारे में तो नहीं सोचा था, लेकिन कुछ अलग करना चाहता था। मैं जानता था कि आज अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगा। मैं ओलिंपिक का रिकॉर्ड तोड़ना चाहता था, शायद इसी वजह से अच्छा प्रदर्शन कर पाया।’

जेवलिन थ्रो के फाइनल में नीरज चोपड़ा ने पहले राउंड में 87.58 मीटर थ्रो किया, पूरे फाइनल में उनसे आगे कोई नहीं निकल पाया।

नीरज बोले- मेरा गोल्ड देश के एथलीट्स को समर्पित
नीरज ने अपना गोल्ड मेडल उड़नपरी पीटी उषा और उन एथलीट्स को समर्पित किया, जो ओलिंपिक पदक जीतने के करीब पहुंचे लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। नीरज ने आगे कहा कि जब राष्ट्रगान बज रहा था और भारतीय तिरंगा ऊपर की ओर जा रहा था, वे रोने वाले थे।

ओलिंपिक को लेकर बेहद उत्साहित रहते थे मिल्खा सिंह
मिल्खा सिंह ओलिंपिक को लेकर बेहद उत्साहित रहते थे। उनका कहना था कि कई एथलीट ओलिंपिक तो गए लेकिन मेडल नहीं जीत पाए। उन्हें एथलीट हिमा दास से भी काफी उम्मीदें थीं और उन्होंने हिमा को टिप्स भी दिए थे। हालांकि चोट की वजह से हिमा टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई थीं।

मिल्खा सिंह ने रोम ओलिंपिक में 400 मीटर की रेस में 45.6 सेकेंड का समय निकाला था, लेकिन वे मेडल से चूक गए थे।

अच्छे प्रदर्शन के बाद भी ओलिंपिक मेडल से चूके थे मिल्खा सिंह
मिल्खा सिंह कहते थे कि रोम ओलिंपिक जाने से पहले उन्होंने दुनियाभर में करीब 80 रेसिंग मुकाबलों में हिस्सा लिया, जिनमें 77 में जीत हासिल की थी। उस वक्त पूरी दुनिया को उम्मीद थी कि रोम ओलिंपिक में 400 मीटर की दौड़ भारत के मिल्खा सिंह ही जीतेंगे।

मिल्खा सिंह ने रोम ओलिंपिक में 400 मीटर की रेस में 45.6 सेकेंड का समय निकाला था, लेकिन वे मेडल से चूक गए थे। इसके बाद जब भी ओलिंपिक को लेकर कोई बात होती थी, तो वे एथलेटिक्स की बात शुरू करते हुए किसी इंडियन के मेडल जीतने की ख्वाहिश जरूर जाहिर करते थे।

मिल्खा सिंह के बेटे ने नीरज को कहा शुक्रिया

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