इंदौर। पार्श्व गायिका उषा तिमोथी ने कहा कि नई पीढ़ी के गायक कलाकार रातों-रात फेमस होना चाहते हैं। बेहतर गायक बनने के लिए पुरजोर रियाज के अलावा कोई विकल्प नहीं है। देश के नामचीन गायकों ने ताउम्र अपनी गायकी को उम्दा बनाने के लिए रोजाना रियाज की।
सुश्री तिमोथी स्टेट प्रेस क्लब मध्य प्रदेश के रूबरू कार्यक्रम में मीडिया कर्मियों से चर्चा कर रही थी । उन्होंने कहा कि पुराने दौर के गायक गीत गजलों के भाव को अपनी आवाज में उतार लेते थे और यह भी ध्यान रखते थे कि वह गीत किस कलाकार पर फिल्माया जा रहा है । पुराने गीतों की उम्र इसीलिए अधिक रहती थी क्योंकि गायक उसमें अपना सर्वस्व लगा देते थे।
सुश्री तिमोथी ने गायक मोहम्मद रफी के साथ देश-विदेश में सैकड़ों कार्यक्रम प्रस्तुत किए हैं । उन्होंने रफी साहब को सदी का महान गायक बताया और कहा कि वह रिकॉर्डिंग हो या लाइव कार्यक्रम पूरी शिद्दत से गीत पेश करते थे। उन्होंने बताया कि ऐसा कई मर्तबा ऐसा हुआ जब संगीतकार ने एक-दो बार में ही गाने की रिकॉर्डिंग को ओके कर दिया, लेकिन रफी साहब ने गाकर ही ओके करवाया । उन्होंने फख्र से बताया कि वह उनके सिर पर आज भी रफी साहब का हाथ महसूस करती हैं क्योंकि उन्होंने सदा बेटी का दर्जा दिया।
सुश्री तिमोथी ने स्वीकार की एक दौर में कतिपय गायिकाओं और संगीतकारों ने गायक-गायिकाओं के साथ भेदभाव किया । इस मामले में वह ज्यादा नहीं बोलेंगे क्योंकि ऐसा करने वालों का भी गायकी के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान तो रहा है।
उन्होंने कहा कि उनकी तमन्ना है कि नई पीढ़ी के गायकों को गीतों की बारीकियां सिखाएं।
उन्होंने इंदौर में भी युवा कलाकारों के लिए कार्यशाला लगाने की इच्छा जताई। उन्होंने उस्ताद आमिर खा, लता मंगेशकर, किशोर कुमार का जिक्र करते हुए इंदौर की सर जमीं को प्रणाम किया।
सुश्री तिमोथी ने बताया कि नागपुर में उनका परिवार शास्त्रीय गायन और वादन से जुड़ा रहा। उनके पिताजी दीनानाथ जी मंगेशकर के साथ हारमोनियम और बाद में उनके बड़े भाई तबला और वायलिन बजाते थे। उन्होंने बचपन में गणपति उत्सव से गायन की शुरुआत की और मात्र सात साल की उम्र में नागपुर में मोहम्मद रफी, मुकेश, हेमंत और मन्नाडे के साथ फिल्मी गीत प्रस्तुत किया। तेरह वर्ष की उम्र में उन्हें फिल्मी गीत रिकॉर्डिंग का मौका मिला। तब से आज तक उन्होंने हिंदी, पंजाबी, मलयालम, मराठी आदि भाषा में कई गीत रिकॉर्ड किया और स्टेज प्रोग्राम में 6000 से अधिक गाने प्रस्तुत किया।
प्रारंभ में सुश्री तिमोथी का स्वागत प्रवीण खारीवाल, रचना जौहरी, संजीव गवते एवं सीमा माहेश्वरी ने किया। स्मृति चिन्ह अभिनय कला समाज के प्रधानमंत्री सत्यकाम शास्त्री ने एवं कैरीकेचर गोविंद लाहोटी कुमार ने भेंट किया आभार दीपक माहेश्वरी ने व्यक्त किया।

