नए संसद भवन का उद्घाटन 28 मई को होना है। कांग्रेस समेत 19 विपक्षी दलों ने समारोह के बहिष्कार का फैसला किया है। विपक्षी दलों ने एक साझा बयान भी जारी किया। संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विपक्षी दलों से बायकॉट के फैसले पर फिर विचार करने की अपील की है। उधर, पीएम नरेंद्र मोदी ने सिडनी में अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज से द्विपक्षीय बातचीत की। तीन देशों का दौरा निपटाकर पीएम दिल्ली लौट आएंगे। इधर, दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत को गर्मी से राहत मिलने के आसार हैं। बुधवार को बादल छाए रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, आंधी और हल्की बारिश हो सकती है। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का एलिमिनेटर मुकाबला आज खेला जाएगा। लखनऊ सुपर जायंट्स और मुंबई इंडियंस के बीच शाम 7.30 से मैच होगा।
PM मोदी नई संसद में सेंगोल रखेंगे, आजादी से 15 मिनट पहले इसे नेहरू को सौंपा गया था
5 फीट लंबा ये सेंगोल चांदी से बना है। इस पर सोने की परत है, शीर्ष पर नंदी विराजमान हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि PM मोदी 28 मई को दोपहर 12 बजे नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे। वे यहां सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक चिह्न सेंगोल भी स्थापित करेंगे। इसे स्पीकर की कुर्सी के बगल में रखा जाएगा। फिलहाल ये प्रयागराज म्यूजियम में है।
गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को दो केंद्रीय मंत्रियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को दोपहर 12 बजे नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे।
प्रधानमंत्री नए भवन में सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक चिह्न सेंगोल भी स्थापित करेंगे।
सेंगोल चोल साम्राज्य की परंपरा रही है। जब भी कोई राजा बनाता था, उसे यह राजदंड दिया जाता था। सेंगोल का अर्थ होता है- संपदा से सम्पन्न।
शाह ने बताया कि 14 अगस्त 1947 को रात 10:45 बजे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने सेंगोल अंग्रेजों से लिया था। तब इसे तमिलनाडु से मंगवाया गया था। अभी यह प्रयागराज के एक म्यूजियम में रखा गया है।
नई बिल्डिंग में इसे स्पीकर की कुर्सी के बगल में रखा जाएगा। यह आजादी के अमृत महोत्सव का प्रतिबिंब होगा। गृह मंत्री ने कहा, हालांकि 1947 के बाद कांग्रेस पार्टी ने इसे भुला दिया। कहीं भी इसका जिक्र नहीं होता था। बाद में 24 साल बाद एक तमिल विद्वान ने इसकी चर्चा की। सरकारी डेटा में 2021-22 में इसका जिक्र मिलता है।
शाह ने बताया- 96 साल के जो तमिल विद्वान पंडित नेहरू को सेंगोल सौंपते समय मौजूद थे। 28 मई को भी वह संसद के नए भवन में सेंगोल के स्थापना के समय मौजूद रहेंगे।
सेंगोल की तस्वीरें..
14 अगस्त, 1947 की रात थिरुवदुथुरै अधीनम के प्रतिनिधि श्री ला श्री कुमारस्वामी थम्बिरन ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को सुनहरा राजदंड भेंट किया था।
सेंगोल का इस्तेमाल जवाहरलाल नेहरू ने अंग्रेजों से सत्ता हस्तांतरण के दौरान किया था। बाद में सेंगोल को प्रयागराज के एक म्यूजियम में रखा गया था।
सेंगोल पर सबसे ऊपर नंदी हैं और बगल में कुछ कलाकृति बनी हैं। यह सोने और चांदी का बना होता है।
सेंगोल शब्द संस्कृत के ‘संकु’ से लिया गया है। इसका मतलब शंख होता है।
कहां से आया सेंगोल, पहली बार कब इस्तेमाल हुआ
सेंगोल शब्द संस्कृत के ‘संकु’ से लिया गया है। इसका मतलब शंख होता है। सेंगोल पर सबसे ऊपर नंदी हैं और बगल में कुछ कलाकृति बनी हैं। यह सोने और चांदी का बना होता है। भारत में सेंगोल का इतिहास काफी पुराना है। सबसे पहले मौर्य साम्राज्य (322-185 ईसा पूर्व) द्वारा इसका उपयोग किया गया था।
इसके बाद गुप्त साम्राज्य (320-550 ईस्वी) फिर चोल वंश में आया। जहां इसका इस्तेमाल ज्यादा किया जाता था। बाद में यह मुगलों के पास आया और जब अंग्रेज भारत आए तो ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने इस पर अपना अधिकार जमा लिया।
19 विपक्षी दल नई संसद के इनॉग्रेशन में नहीं जाएंगे, कहा- लोकतंत्र की आत्मा सोख ली गई
कांग्रेस समेत 19 विपक्षी दल नई संसद के उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होंगे। इनकी मांग है कि PM मोदी की बजाय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उद्घाटन करें। इन्होंने एक जॉइंट स्टेटमेंट में लिखा, ‘जब संसद से लोकतंत्र की आत्मा ही खींच ली गई हो, ऐसे में हमें नई इमारत की कोई कीमत नजर नहीं आती है।’
इन पार्टियों का कहना है कि राष्ट्रपति के हाथों उद्घाटन न होना, देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है। 19 विपक्षी दलों में आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), जनता दल-यूनाइटेड (JDU), नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP), सपा और शिवसेना (UBT) शामिल हैं।
कांग्रेस समेत विपक्ष के 19 दल संसद के नए भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होंगे। बुधवार को इन दलों ने एक जॉइंट स्टेटमेंट में बायकॉट करने की जानकारी दी। इन्होंने कहा, ‘जब संसद से लोकतंत्र की आत्मा को ही खींच लिया गया हो, ऐसे में हमें नई इमारत की कोई कीमत नजर नहीं आती है।’
भाजपा के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिर एलायंस ( NDA) भारत के विपक्षी दलों के फैसले पर कहा कि यह भारत के लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों का घोर अपमान है। पिछले 9 सालों में, विपक्ष ने संसदीय प्रक्रियाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया, संसद के सत्रों को बाधित किया,वॉकआउट किया। संसद के प्रति विपक्ष का घोर अनादर बौद्धिक दिवालिएपन को दर्शाता है। लोकतंत्र के लिए अवमानना करता है। विपक्ष का यह स्टैंड राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का और SC, ST का सीधा अपमान है।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे पहले ही कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से करवाने की मांग कर चुके हैं। PM नरेंद्र मोदी 28 मई को संसद के नए भवन का उद्घाटन करेंगे।
इस बीच गृहमंत्री अमित शाह ने आज सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘नए संसद भवन को 60 हजार श्रमयोगियों ने रिकॉर्ड समय में बनाया है। इसलिए PM इस मौके पर सभी श्रमयोगियों का सम्मान भी करेंगे। इसे राजनीति से ना जोड़ें। राजनीति तो चलती रहती है। हमने सबको आमंत्रित किया है। हमारी इच्छा है कि सभी इस कार्यक्रम में हिस्सा लें।’
इनॉगरेशन के दिन संसद भवन में स्पीकर की कुर्सी के बगल में सेंगोल (राजदंड) रखा जाएगा। यह सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक है।
19 पार्टियां बायकॉट करेंगी, अकाली दल-BJD शामिल होंगी
कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), जनता दल-यूनाइटेड (JDU), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP), समाजवादी पार्टी, उद्धव ठाकरे का शिवसेना गुट, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, झारखंड मुक्ति मोर्चा, केरला कांग्रेस (मणि), विदुथलाई चिरूथाइगल कच्छी, राष्ट्रीय लोक दल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, रेवॉल्युशनरी सोशलिस्ट पार्टी और मरूमलारची द्रविड मुनेत्रद कडगम (MDMK) इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनेंगे।
वहीं, ओडिशा की बीजू जनता दल, पंजाब की शिरोमणि अकाली दल और आंध्र प्रदेश के YSR कांग्रेस ने उद्घाटन समारोह में शामिल होने का फैसला किया है।
PM मोदी ने 10 दिसंबर 2020 को संसद भवन की नई बिल्डिंग का भूमिपूजन किया था।
विपक्ष के विरोध को सिलसिलेवार पढ़ें…
संजय राउत बोले- सब PM के लिए हो रहा, यह पॉलिटिकल इवेंट
संजय राउत ने बुधवार को कहा- हमारी संसद ऐतिहासिक है। यह अभी सौ साल चल सकती है। इसे बनाने में RSS और भाजपा का कोई हाथ नहीं है। अब नई इमारत बनाकर उसमें शिला लगाई जाएगी कि इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने किया है। इसी के लिए इतना खर्चा हो रहा है। चलो ये भी ठीक है।
लेकिन राष्ट्रपति जो इस देश की प्रमुख हैं। आदिवासी महिला हैं। पार्लियामेंट की कस्टोडियन हैं। आप उनको नहीं बुला रहे। उनके हाथों से नए संसद भवन का उद्घाटन कराना तो प्रोटोकॉल है, लेकिन आप नहीं कर रहे हैं, क्योंकि आप प्रधानमंत्री के हाथों उद्घाटन करवाकर एक पॉलिटिकल इवेंट कर रहे हैं। इसलिए सभी विपक्षी पार्टियों ने तय किया है कि हम इसमें नहीं जाएंगे।
TMC सांसद डेरेक बोले- यह राष्ट्रपति का अपमान
TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने भी संसद की नई बिल्डिंग का राष्ट्रपति द्वारा उद्घाटन नहीं करने पर उनका अपमान बताया। ब्रायन ने कहा- यह भारत के दलित आदिवासी और वंचित समाज का अपमान है। उन्होंने आगे कहा, संसद सिर्फ एक नई इमारत नहीं है, यह पुरानी परंपराओं, मूल्यों, मिसालों और नियमों और भारतीय लोकतंत्र की नींव है। PM मोदी के लिए बिल्डिंग का इनॉग्रेशन सिर्फ उनके लिए है, हमारे लिए नहीं।
AAP और CPI ने क्या कहा
आप नेता संजय सिंह ने कहा- AAP भी इनॉग्रेशन का बॉयकाट करेगी क्योंकि PM ने राष्ट्रपति को आमंत्रित नहीं किया। CPI नेता डी राजा ने भी कहा कि उनकी पार्टी उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होगी। CPI(M) ने भी इस समारोह का बहिष्कार करने की घोषणा की है।
खड़गे बोले- प्रेसिडेंट देश की पहली नागरिक, उन्हें उद्घाटन करना चाहिए
22 मई को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ना बुलाए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा- ऐसा लगता है कि मोदी सरकार सिर्फ चुनावी फायदा उठाने के लिए दलित और आदिवासी समुदाय से राष्ट्रपति बनाती है। वे देश की पहली नागरिक हैं। पूरी खबर पढ़ें…
राहुल बोले- नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति करें, PM नहीं
21 मई को राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा- संसद के नए भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ही करना चाहिए, प्रधानमंत्री को नहीं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, कांग्रेस ने कहा- 28 मई को हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर की जयंती है। इसी दिन नए संसद भवन का उद्घाटन करना राष्ट्र निर्माताओं का अपमान है। पूरी खबर पढ़ें…
862 करोड़ रुपए में तैयार हुआ
नए संसद भवन में लोकसभा कक्ष में 888 सदस्य और राज्यसभा कक्ष में 300 सदस्य आराम से बैठ सकते हैं।
862 करोड़ रुपए में बने नए संसद भवन का काम पूरा हो गया है। प्रधानमंत्री ने 10 दिसंबर 2020 को इसकी आधारशिला रखी थी। नए संसद भवन का निर्माण 15 जनवरी 2021 को शुरू हुआ था। इस बिल्डिंग को पिछले साल नवंबर में पूरा हो जाना था। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बनी ये बिल्डिंग प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसे 28 महीने में बनाया गया।
4 मंजिला बिल्डिंग, भूकंप का असर नहीं
पुराना संसद भवन 47 हजार 500 वर्गमीटर में है, जबकि नई बिल्डिंग 64 हजार 500 वर्ग मीटर में बनाई गई है। यानी पुराने से नया भवन 17 हजार वर्ग मीटर बड़ा है। नया संसद भवन 4 मंजिला है। इसमें 3 दरवाजे हैं, इन्हें ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार नाम दिया गया है। सांसदों और VIPs के लिए अलग एंट्री है। इस पर भूकंप का असर नहीं होगा। इसका डिजाइन HCP डिजाइन, प्लानिंग एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने तैयार किया है। इसके आर्किटेक्ट बिमल पटेल हैं।
12 जुलाई 2022 को संसद भवन में बने अशोक स्तंभ का अनावरण PM नरेंद्र मोदी ने किया था।
नई संसद की खासियत
- अभी लोकसभा में 590 लोगों की सीटिंग कैपेसिटी है। नई लोकसभा में 888 सीटें हैं और विजिटर्स गैलरी में 336 से ज्यादा लोगों के बैठने का इंतजाम है।
- अभी राज्यसभा में 280 की सीटिंग कैपेसिटी है। नई राज्यसभा में 384 सीटें हैं और विजिटर्स गैलरी में 336 से ज्यादा लोग बैठ सकेंगे।
- लोकसभा में इतनी जगह होगी कि दोनों सदनों के जॉइंट सेशन के वक्त लोकसभा में ही 1272 से ज्यादा सांसद साथ बैठ सकेंगे।
- संसद के हर अहम कामकाज के लिए अलग-अलग ऑफिस हैं। ऑफिसर्स और कर्मचारियों के लिए भी हाईटेक ऑफिस की सुविधा है।
- कैफे और डाइनिंग एरिया भी हाईटेक है। कमेटी मीटिंग के अलग-अलग कमरों में हाईटेक इक्विपमेंट लगाए गए हैं।
- कॉमन रूम्स, महिलाओं के लिए लाउंज और VIP लाउंज की भी व्यवस्था है।
क्यों बनाई गई नई बिल्डिंग
मौजूदा संसद भवन को 96 साल पहले 1927 में बनाया गया था। मार्च 2020 में सरकार ने संसद को बताया था कि पुरानी बिल्डिंग ओवर यूटिलाइज्ड हो चुकी है और खराब हो रही है। इसके साथ ही लोकसभा सीटों के नए सिरे से परिसीमन के बाद जो सीटें बढ़ेंगीं, उनके सांसदों के बैठने के लिए पुरानी बिल्डिंग में पर्याप्त जगह नहीं है। इसी वजह से नई बिल्डिंग बनाई जा रही है।
जनवरी 2021 में शुरू हुआ था निर्माण
तिकोने आकार के नए संसद भवन का निर्माण 15 जनवरी 2021 को शुरू हुआ था। इस बिल्डिंग को पिछले साल नवंबर में पूरा हो जाना था। पीएम नरेंद्र मोदी ने 10 दिसंबर 2020 को नए संसद भवन की आधारशिला रखी थी। तब उन्होंने कहा था कि संसद की नई बिल्डिंग से अधिक सुंदर कुछ नहीं हो सकता, जब भारत अपनी आजादी के 75 साल मनाएगा।
आजम खान हेट स्पीच मामले में बरी, केस करने वाले BJP नेता अब रामपुर के विधायक हैं
सपा का कहना है कि जनप्रतिनिधि कानून में बदलाव की जरूरत है। BJP ताकत का गलत इस्तेमाल कर रही है। (फाइल फोटो)
यूपी की रामपुर विधानसभा सीट से विधायक रहे सपा नेता आजम खान हेट स्पीच केस में बरी हुए हैं। 27 अक्टूबर 2022 को इसी मामले में निचली अदालत ने उन्हें 3 साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद आजम की विधानसभा सदस्यता चली गई।
इसके बाद सीट पर उप चुनाव हुआ, जिसमें आजम पर केस करने वाले BJP नेता आकाश सक्सेना विधायक चुने गए। आजम की विधायकी अभी भी बहाल नहीं होगी। क्योंकि 15 साल पुराने मामले में 13 फरवरी, 2023 को मुरादाबाद कोर्ट ने आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला खान को 2 साल की सजा सुनाई थी।
IPL से संन्यास पर धोनी बोले- फैसले के लिए 8-9 महीने, अभी से सिरदर्द नहीं लेना चाहता
IPL से रिटायरमेंट के सवाल पर धोनी ने कहा कि फैसला लेने के लिए अभी 8-9 महीने का वक्त है। इसे लेकर सिरदर्द नहीं लेना चाहता। उन्होंने बताया कि वे बतौर खिलाड़ी चेन्नई सुपरकिंग्स के साथ भले न रहें, लेकिन किसी और भूमिका में टीम से जुड़े रहेंगे।
कप्तानी पर धोनी ने कहा- मैं परिस्थितियों के अनुसार फील्डिंग को बदलता रहता हूं। ऐसे में साथी खिलाड़ियों के लिए कष्ट देने वाला कप्तान हो सकता हूं। पर मुझे पता है कि कब किस खिलाड़ी का कहां उपयोग करना है। मैंने वैसा ही किया।
इमरान की पार्टी पर बैन की तैयारी, सरकार ने कहा- PTI ने मुल्क की इज्जत पर हमले किए
पाकिस्तान सरकार पूर्व PM इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को बैन कर सकती है। डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ ने कहा कि इस पार्टी ने फौज ही नहीं, मुल्क की इज्जत पर भी हमले किए हैं।
आसिफ के बयान के बाद इमरान ने समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं, बल्कि पाकिस्तान को तबाह किया जा रहा है। मुल्क का लोकतंत्र खतरे में है।’ वहीं PTI के 2 और बड़े नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। इनमें इमरान की करीबी शिरीन मजारी और फाइनेंसर फैयाज-उल-चौहान शामिल हैं।
मैडम के हिसाब से लगी थी हर महंगी चीज, शीशमहल को सजाने के पीछे केजरीवाल की पत्नी का हाथ
नई दिल्ली: दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का सरकारी बंगला लगातार सर्खियों में है। हमारे सहयोगी टाइम्स नाउ नवभारत के ऑपरेशन शीशमहल में किए खुलासे में कई चौंकाने वाली बातें निकलकर सामने आई थीं। जनता ने सीएम केजरीवाल के सरकारी बंगले में लगे 45 करोड़ का सच जाना था। इसके बाद से ही केजरीवाल के साथ आम आदमी पार्टी भी बैकफुट पर है। इसी कड़ी में आज हमारे सहयोगी ने एक और बड़ा खुलासा किया है। ऑपरेशन शीशमहल के भाग 7 में मैडम सीएम के बारे में पता चला है। आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह मैडम सीएम कौन हैं। यह कोई और नहीं बल्कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पत्नी हैं। जी हां, पड़ताल में यह बात निकलकर सामने आई है कि केजरीवाल सरकार के मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों को पत्नी सुनीता केजपीवाल निर्देश देती थीं। उनका यह निर्देश अमल में भी लिया जाता था। टाइम्स नाउ नवभारत को जो दस्तावेज मिले हैं, उसमें इस बात का खुलासा हुआ है।
YSRCP और BJD ने निकाल दी विपक्षी एकजुटता की हवा
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी नए संसद भवन के उद्घाटन के बहिष्कार में विपक्षी दलों के साथ नहीं आएगी। वाईएसआरसीपी के सूत्रों ने पुष्टि की कि पार्टी के सांसद उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। वाईएसआरसीपी संसदीय दल के नेता वी. विजयसाई रेड्डी और पार्टी के सांसद 28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे।
न्यायमूर्ति एस वैद्यनाथन मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त
न्यायमूर्ति एस वैद्यनाथन को बुधवार को मद्रास उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। मौजूदा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टी राजा 62 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर बुधवार शाम सेवानिवृत्त हो गए। न्याय विभाग, कानून मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के मुताबिक, न्यायमूर्ति वैद्यनाथन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर 25 मई से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। न्यायमूर्ति वैद्यनाथन, 25 अक्टूबर 2013 को मद्रास उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किये गये थे। उन्हें 14 अप्रैल 2015 को स्थायी न्यायाधीश बनाया गया था।
केंद्र कर्नाटक में भी दिल्ली जैसा अध्यादेश ला सकता है : आम आदमी पार्टी
आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार भविष्य में कर्नाटक और अन्य राज्यों में भी सेवाओं के नियंत्रण को लेकर अध्यादेश ला सकती है। कांग्रेस नेता अजय माकन ने एक दिन पहले ही अध्यादेश के मुद्दे पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का समर्थन नहीं करने पर जोर दिया था, जिसके बाद ‘आप’ की यह प्रतिक्रिया आई है। भारद्वाज ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘अजय माकन कर्नाटक की जीत पर खुशी मना रहे हैं लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए कि केंद्र कल कर्नाटक में इसी तरह का अध्यादेश ला सकता है और वहां (सरकार से) पुलिस की शक्ति छीन सकता है। तब वे क्या करेंगे? हमारे द्वारा अध्यादेश का मुद्दा उठाने के बाद कांग्रेस सक्रिय हो गई है, वरना यहां अजय माकन को कौन जानता है?’
मोदी साहब, आप पीछे हट जाइए… नई संसद के उद्घाटन से पहले असदुद्दीन ओवैसी ने PM से की अपील’
संसद की नई इमारत का उद्घाटन 28 मई को होना है। AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि पीएम मोदी को संसद की नई बिल्डिंग का उद्घाटन नहीं करना चाहिए। ओवैसी ने पीएम मोदी से मांग की कि ‘आप पीछे हट जाइए और स्पीकर ओम बिरला को उद्घाटन करने दें।’ उन्होंने कहा कि अगर पीएम इस बात पर राजी हो जाते हैं तो AIMIM इस समारोह में शामिल होगी। अगर ऐसा नहीं होता तो उनकी पार्टी नहीं जाएगी।
कांग्रेस समेत 19 विपक्षी दलों ने साझा बयान जारी कर उद्घाटन समारोह का बायकॉट करने का फैसला किया है। AIMIM इन 19 दलों में नहीं है। जब पार्टी के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को ‘अछूत’ समझा जाता है। ओवैसी ने भी कहा कि पीएम मोदी को संसद की नई बिल्डिंग का उद्घाटन नहीं करना चाहिए। ओवैसी ने पीएम मोदी से मांग की कि ‘आप पीछे हट जाइए और स्पीकर ओम बिरला को उद्घाटन करने दें।’ उन्होंने कहा कि अगर पीएम इस बात पर राजी हो जाते हैं तो AIMIM इस समारोह में शामिल होगी। अगर ऐसा नहीं होता तो उनकी पार्टी नहीं जाएगी। ओवैसी ने कहा कि अगर पीएम उद्घाटन करते हैं तो गलत परंपरा पड़ जाएगी।
ओवैसी ने कहा, ‘नए संसद भवन की जरूरत है इसको कोई अस्वीकार नहीं कर सकता लेकिन इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा नहीं होना चाहिए क्योंकि यह शक्ति के पृथक्करण के सिद्धांत के खिलाफ है।’ AIMIM नेता ने कहा कि ‘विपक्षी दलों ने हमारी पार्टी से संपर्क नहीं किया है… उद्घाटन लोकसभा स्पीकर को करना चाहिए क्योंकि वह संसद के अभिरक्षक हैं।

