देशभर के व्यापारियों ने पाकिस्तान का समर्थन करने वाले तुर्किये और अजरबैजान के साथ व्यापार खत्म करने की योजना बनाई है। इस पर कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की ओर से विभिन्न राज्यों के प्रमुख व्यापारी नेताओं की शुक्रवार को बुलाई गई बैठक में फैसला हो सकता है। तुर्किये और अजरबैजान से व्यापारिक रिश्ते खत्म करने से दोनों देशों को अरबों डॉलर का नुकसान होगा। इसके अलावा, भारत के भगोड़े नीरव मोदी की मुश्किल एक बार फिर बढ़ गई है। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने जमानत के लिए लंदन की एक अदालत में याचिका दाखिल की है। याचिका में नीरव ने अदालत से भारत प्रत्यर्पण तक उसे जमानत पर रिहा करने का अनुरोध किया। जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है। 55 वर्षीय नीरव ने कहा कि उसकी जान को भारत सरकार से खतरा है, इसलिए वह ब्रिटेन से फरार नहीं होगा। इसके अलावा, फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) वाशिंगटन स्थित भ्रष्टाचार दस्ते में से एक को भंग करेगी। इस दस्ते को कांग्रेस के सदस्यों और अन्य संघीय अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और सार्वजनिक भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने का जिम्मा मिला था। एफबीआई के इस बदलाव के बारे में बृहस्पतिवार को मामले से परिचित लोगों ने जानकारी दी।

देशभर के व्यापारियों ने पाकिस्तान का समर्थन करने वाले तुर्किये और अजरबैजान के साथ व्यापार खत्म करने की योजना बनाई है। इस पर कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की ओर से विभिन्न राज्यों के प्रमुख व्यापारी नेताओं की शुक्रवार को बुलाई गई बैठक में फैसला हो सकता है। तुर्किये और अजरबैजान से व्यापारिक रिश्ते खत्म करने से दोनों देशों को अरबों डॉलर का नुकसान होगा।इस पर कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की ओर से विभिन्न राज्यों के प्रमुख व्यापारी नेताओं की शुक्रवार को बुलाई गई बैठक में फैसला हो सकता है। तुर्किये और अजरबैजान से व्यापारिक रिश्ते खत्म करने से दोनों देशों को अरबों डॉलर का नुकसान होगा।
CAIT: तुर्किये-अजरबैजान से कारोबार करें या नहीं, आज तय करेंगे देशभर के व्यापारी; कैट ने बुलाई बैठक
देशभर के व्यापारियों ने पाकिस्तान का समर्थन करने वाले तुर्किये और अजरबैजान के साथ व्यापार खत्म करने की योजना बनाई है। इस पर कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की ओर से विभिन्न राज्यों के प्रमुख व्यापारी नेताओं की शुक्रवार को बुलाई गई बैठक में फैसला हो सकता है। तुर्किये और अजरबैजान से व्यापारिक रिश्ते खत्म करने से दोनों देशों को अरबों डॉलर का नुकसान होगा।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा, जो भी देश भारत के खिलाफ है, उसके साथ व्यापार करने का कोई सवाल ही नहीं है। यह देश के व्यापारियों के लिए अपनी देशभक्ति दिखाने का उचित समय है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए यह बैठक बुलाई गई है, जिसमें तुर्किये और अजरबैजान से व्यापारिक रिश्ते खत्म करने पर फैसला लिया जाएगा। साथ ही, भारतीय सेना के शोर्य और पराक्रम के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए देशभर में तिरंगा यात्रा निकाला जाएगा।
भारत-पाकिस्तान में मध्यस्थता के बयान से पलटे ट्रंप, अब किया नया दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर अपने ही दावे से पलट गए हैं। उन्होंने दोहा में भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के दावे को खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने समस्या को सुलझाने में मदद की, ना कि युद्ध को रोकने में मध्यस्थता की। भारत ने शुरू में ही ट्रंप के दावे को खारिज कर दिया था।
दोहा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कतर की राजधानी दोहा में भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर अपने ही दावे से पलट गए हैं। उन्होंने दोहा में अमेरिकी सैनिकों को संबोधित करते हुए मध्यस्थता के दावे को खारिज कर दिया। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि इस समस्या को सुलझाने में उन्होंने जरूर मदद की। हालांकि, भारत ने ट्रंप के दावे को कोई महत्व नहीं देते हुए दो-टूक लहजे में कहा था कि भारत-पाकिस्तान में संघर्ष विराम आपसी बातचीत के बाद हुआ है।
ट्रंप ने अब क्या कहा?
ट्रंप ने कहा, “मैं ये नहीं कहूंगा कि मैंने किया, लेकिन मैंने निश्चित रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले सप्ताह बढ़ते तनाव को सुलझाने में मदद की।” उन्होंने कहा, “हालात और अधिक तनावपूर्ण होते जा रहे थे और अचानक, आप वहां अलग तरह की मिसाइलें देखने लगते, लेकिन हमने इसे सुलझा लिया।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “मुझे लगता है कि यह सुलझ गया है। हमने उनसे (भारत और पाकिस्तान से) व्यापार पर भी बात की। कहा- चलो व्यापार करें, युद्ध नहीं। पाकिस्तान इससे बहुत खुश था, भारत भी इससे बहुत खुश था और मुझे लगता है कि वे अब सही दिशा में बढ़ रहे हैं।”
ट्रंप ने पहले क्या कहा था?
ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि उन्होंने व्यापार में कटौती का मुद्दा उठाकर दोनों देशों को शत्रुता समाप्त करने के लिए मजबूर किया। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान से कहा कि यदि वे संघर्ष रोक दें, तो अमेरिका उनके साथ ‘बहुत सारा व्यापार’ करेगा। उन्होंने कहा, “हम आप लोगों के साथ बहुत सारा व्यापार करेंगे। चलो इसे रोकते हैं। अगर आप इसे रोकते हैं, तो हम व्यापार करेंगे। अगर आप इसे नहीं रोकते हैं, तो हम कोई व्यापार नहीं करने जा रहे हैं।”
ट्रंप ने खुद की थपथपाई थी पीठ
ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं आपको बता सकता हूं कि लोगों ने कभी भी व्यापार का उस तरह से उपयोग नहीं किया, जैसा मैंने किया। और अचानक उन्होंने (भारत और पाकिस्तान ने) कहा, ‘मुझे लगता है कि हम इसे रोकने जा रहे हैं।’’ ट्रंप ने दावा किया, ‘‘और उन्होंने ऐसा किया है तथा उन्होंने ऐसा कई कारणों से किया है, लेकिन व्यापार एक बड़ा कारण है। हम पाकिस्तान के साथ बहुत सारा व्यापार करने जा रहे हैं। हम भारत के साथ बहुत सारा व्यापार करने जा रहे हैं। हम अभी भारत के साथ बातचीत कर रहे हैं। हम जल्द ही पाकिस्तान के साथ बातचीत करने जा रहे हैं, और हमने एक परमाणु संघर्ष को रोका है।’’
भारत-फ्रांस ने आर्मेनिया को कौन-कौन से हथियारों से किया लैस
येरेवन: भारत और फ्रांस ने आर्मेनिया के साथ कई बड़े रक्षा समझौते किए हैं। इससे आर्मेनिया की सैन्य ताकत कई गुना बढ़ गई है। आर्मेनिया का अपने पड़ोसी देश अजरबैजान के साथ जमीन को लेकर पुराना विवाद है। दोनों देश नार्गोनो काराबाख नाम के इस टुकड़े के लिए कई बार युद्ध भी लड़ चुके हैं। सितंबर 2023 में अजरबैजान ने नार्गोनो काराबाख पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद आर्मेनिया अपनी सैन्य ताकत को बढ़ा रहा है। आर्मेनिया की बढ़ती सैन्य क्षमता से अजरबैजान की टेंशन बढ़ सकती है। अजरबैजान पाकिस्तान और तुर्की का करीबी है। वह कश्मीर मुद्दे पर भी पाकिस्तान का समर्थन करता है।भारत और फ्रांस ने आर्मेनिया के साथ रक्षा समझौते किए। इससे आर्मेनिया की सैन्य ताकत बढ़ी है। आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच जमीन को लेकर विवाद है। अजरबैजान ने नार्गोनो काराबाख पर कब्जा कर लिया था। आर्मेनिया भारत से हथियार खरीद रहा है। फ्रांस भी आर्मेनिया का रक्षा साझेदार बना है। रूस के साथ आर्मेनिया की दूरी बढ़ी है।
आर्मेनिया ने भारत से कौन-कौन से हथियार खरीदे
रूसी अंतर्राष्ट्रीय मामलों की परिषद (RIAC) की एक रिपोर्ट के अनुसार, आर्मेनिया ने 2022 और 2023 के बीच भारत के साथ 1.5 बिलियन डॉलर से ज़्यादा के रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों में 214 मिमी पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर, 155 मिमी ATAGS आर्टिलरी सिस्टम, ZADS काउंटर-ड्रोन सिस्टम, आकाश-1S और आगामी आकाश-NG एयर डिफेंस सिस्टम, कोंकुर एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम (रूसी लाइसेंस के तहत निर्मित), मोर्टार और विभिन्न युद्ध सामग्री का अधिग्रहण शामिल है।
फ्रांस भी आर्मेनिया का बड़ा रक्षा साझेदार बना
फ्रांस भी आर्मेनिया का एक प्रमुख रक्षा भागीदार बन गया है, जिसके साथ 2023 और 2024 के बीच लगभग 250 मिलियन डॉलर के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इनमें ग्राउंडमास्टर 200 रडार, मिस्ट्रल 3 मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम और सीज़र सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी यूनिट शामिल हैं।
आर्मेनिया की रूस से बढ़ी दूरी
रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस के साथ आर्मेनिया का आखिरी बड़ा रक्षा सौदा, जिसकी कीमत 400 मिलियन डॉलर थी, 2021 में हस्ताक्षरित किया गया था, लेकिन यह अभी भी आंशिक रूप से ही पूरा हुआ है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के अनुसार, 2011 से 2020 तक, आर्मेनिया के हथियारों के आयात में रूस का हिस्सा 94% था। हालांकि, 2024 तक यह हिस्सा घटकर 10% रह गया, जिसका मुख्य कारण यूक्रेन में युद्ध के दौरान डिलीवरी को पूरा करने में कठिनाइयां थीं।
आर्मेनिया को किन देशों से खतरा
रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्मेनिया में रूस के बारे में धारणाएं काफी हद तक बदल गई हैं। कभी एक मित्र राष्ट्र के रूप में देखे जाने वाले रूस को अब राजनीतिक खतरों के स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट द्वारा 2023 के एक सर्वेक्षण में कथित खतरे की रैंकिंग में रूस को अज़रबैजान और तुर्की के बाद तीसरे स्थान पर रखा गया। योगदान देने वाले कारकों में 2020 के नागोर्नो-कराबाख युद्ध और उसके बाद आर्मेनिया-अज़रबैजान सीमा संघर्षों के दौरान रूस की मौन प्रतिक्रिया शामिल है।
भारत, पाकिस्तान और चीन को लेकर क्या बोल गए रूसी विदेश मंत्री
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिमी देश भारत और पाकिस्तान को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं। सरकारी समाचार एजेंसी टीएएसएस की खबर के मुताबिक, लावरोव ने मॉस्को में ‘सीमाओं के बिना संस्कृति : सांस्कृतिक कूटनीति की भूमिका और विकास’ विषय पर आयोजित डिप्लोमैटिक क्लब की बैठक में यह टिप्पणी की।
मॉस्को: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिमी देश भारत और पाकिस्तान को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं। सरकारी समाचार एजेंसी टीएएसएस की खबर के मुताबिक, लावरोव ने मॉस्को में ‘सीमाओं के बिना संस्कृति : सांस्कृतिक कूटनीति की भूमिका और विकास’ विषय पर आयोजित डिप्लोमैटिक क्लब की बैठक में यह टिप्पणी की।
रूसी विदेश मंत्री ने कहा, “एशिया-प्रशांत क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों पर गौर करें, जिसे पश्चिम ने अपनी नीति को स्पष्ट रूप से चीन विरोधी रुझान देने के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र कहना शुरू कर दिया है-इस उम्मीद के साथ भी कि इससे हमारे महान मित्रों और पड़ोसी देशों भारत व चीन के बीच टकराव पैदा किया जा सकेगा।”
क्वाड पर भी भड़का रूस
चीन के बढ़ते प्रभाव से निपटने के लिए स्थापित चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद (क्वाड) के मुखर आलोचक लावरोव ने ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका के सैन्य गठबंधन एयूकेयूएस के गठन के बाद इसकी आलोचना कम कर दी है। क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और अमेरिका शामिल हैं।
आसियान को कमजोर करने का आरोप लगाया
लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देश एशिया में आसियान (दक्षिण-पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन) की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, “पश्चिमी सहयोगी दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह यहां भी प्रभावशाली भूमिका में आना चाहते हैं। वे आसियान की केंद्रीय भूमिका को कमजोर करना चाहते हैं, जो कई दशकों से सभी के लिए अनुकूल थी और जो आसियान देशों और उनके सहयोगियों की ओर से राजनीति के क्षेत्र में, सैन्य सहयोग के क्षेत्र में और रक्षा के क्षेत्र में बातचीत में कायम एकमत पर आधारित थी।”
पश्चिमी देशों पर कायदे-कानून न मानने का आरोप लगाया
आसियान दक्षिण-पूर्वी एशिया के 10 देशों का एक क्षेत्रीय समूह है, जिसका उद्देश्य अपने सदस्यों के बीच आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है। इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपीन, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, म्यांमा, कंबोडिया, लाओस और वियतनाम इसके सदस्य देश हैं। रूसी विदेश मंत्री ने कहा, “आम सहमति के नियम, साझा आधार की तलाश-इन सभी को हमारे पश्चिमी सहयोगी धीरे-धीरे दरकिनार करना शुरू कर रहे हैं और कुछ आसियान देशों को एकीकृत मंचों के बजाय खुले तौर पर प्रतिरोधी मंचों से जुड़ने के लिए प्रलोभन दे रहे हैं।”
लावरोव ने यूरेशिया की तारीफ की
उन्होंने यूरेशिया में सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का भी आह्वान किया। लावरोव ने कहा, “यूरेशिया जैसा कोई दूसरा महाद्वीप नहीं है, जहां इतनी सारी सभ्यताएं एक साथ रहती हैं और जिन्होंने आधुनिक युग में भी अपनी पहचान एवं प्रासंगिकता बनाए रखी है। हालांकि, यूरेशिया एकमात्र ऐसा महाद्वीप भी है, जहां कोई महाद्वीप-व्यापी मंच नहीं है। यूरेशिया में इस तरह के एकीकृत मंच की जरूरत है, ताकि कई बड़ी, वास्तव में महान शक्तियों और सभ्यताओं के हितों में सामंजस्य स्थापित किया जा सके।”
उन्होंने याद दिलाया कि अफ्रीका में जहां उप-क्षेत्रीय मंचों के अलावा अफ्रीकी संघ मौजूद है, वहीं लातिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में लातिन अमेरिकी और कैरीबियाई राज्यों का समुदाय (सीईएलएसी) है, जबकि यूरेशिया में अभी तक ऐसा कोई मंच नहीं बनाया जा सका है।
पाकिस्तान, तुर्की, अजरबैजान… भारत के लिए खतरा बना ‘थ्री ब्रदर एलायंस
भारत के खिलाफ पाकिस्तान, तुर्की और अजरबैजान के ‘थ्री ब्रदर एलायंस’ से खतरे को देखते हुए मोदी सरकार ने पलटवार की रणनीति बनाई है। इस तिकड़ी ने सैन्य सहयोग बढ़ाया है और कश्मीर जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान का समर्थन किया है। हाल के भारत-पाकिस्तान संघर्ष में भी तुर्की और अजरबैजान ने इस्लामाबाद का समर्थन किया था।भारत के खिलाफ पाकिस्तान, तुर्की और अजरबैजान के ‘थ्री ब्रदर एलायंस’ से खतरे को देखते हुए मोदी सरकार ने पलटवार की रणनीति बनाई है। इस तिकड़ी ने सैन्य सहयोग बढ़ाया है और कश्मीर जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान का समर्थन किया है। हाल के भारत-पाकिस्तान संघर्ष में भी तुर्की और अजरबैजान ने इस्लामाबाद का समर्थन किया था।
भारत-पाकिस्तान संघर्ष में एक नया गठबंधन तेजी से उभरकर सामने आया है। इस गठबंधन का नाम ‘थ्री ब्रदर एलायंस’ है। इसमें पाकिस्तान और उसके दो दोस्त तुर्की और अजरबैजान शामिल हैं। ये तीनों देश एक दूसरे को आंख मूंदकर समर्थन करते हैं, चाहें मुद्दा कुछ भी हो। भारत के खिलाफ इन दोनों देशों ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता भी प्रदान की थी। ऐसे में इस तथाकथित थ्री ब्रदर एलायंस से भारत की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में मोदी सरकार ने इस तिकड़ी के काउंटर के लिए एक प्लान तैयार किया है, जिससे पाकिस्तान, तुर्की और अजरबैजान की बोलती बंद हो जाएगी।
भारत के खिलाफ काम कर रहे ये तीनों देश
पाकिस्तान, तुर्की और अजरबैजान भारत को चुनौती देने के लिए एक साथ काम कर रहे हैं। 2021 में, पाकिस्तान, तुर्की और अजरबैजान ने बाकू शहर में एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन का आयोजन किया था। इस सम्मेलन में तीनों देशों के संबंधों को गहरा करने और सैन्य सहयोग को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचाने को लेकर सहमति बनी थी। तीनों देशों ने एक दूसरे के विवादित मुद्दों पर समर्थन देने का भी फैसला किया था। इन तीनों देशों के अर्ध-गठबंधन को “थ्री ब्रदर्स एलायंस” के रूप में जाना जाता है
पाकिस्तान समर्थक हैं तुर्की और अजरबैजान
तुर्की और अजरबैजान ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद कूटनीतिक रूप से पाकिस्तान का समर्थन किया है। इन दोनों देशों ने बाकायदा बयान जारी कर और पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व को फोन करके अपना समर्थन जताया था। इतना ही नहीं, उन्होंने पाकिस्तान की उस मांग का समर्थन भी किया था, जिसमें पहलगाम आतंकवादी हमले की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की गई थी। तुर्की ने तो ट्रांसपोर्ट विमानों के जरिए पाकिस्तान को सैन्य हार्डवेयरों की सप्लाई भी की थी। अजरबैजान ने भी यही राग अलापा था और पाकिस्तान की संप्रभुता का समर्थन किया था।
एर्दोगन ने अपने फायदे के लिए बनाया है गठबंधन
इन तीन देशों के गठबंधन के पीछे तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन का दिमाग है। एर्दोगन तुर्की के प्रभाव को उन देशों के साथ संबंध बनाकर बढ़ाना चाहते हैं, जो तुर्की के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रखते हैं। वह इस्लामी जगत का नया खलीफा बनने का सपना देख रहे हैं। उनकी कोशिश सऊदी अरब को रास्ते से हटाकर खुद को मुस्लिम देशों का नया लीडर घोषित करने की है, लेकिन वह इस काम में कई बार मुंह की खा चुके हैं। अजरबैजान और तुर्की की साझा तुर्की विरासत है और तीनों ही देश बहुसंख्यक इस्लामी देश हैं। इस गठबंधन के निर्माण से तीनों देशों को फ़ायदा हुआ है। उदाहरण के लिए, तुर्की के सैन्य समर्थन ने 2020 के नागोर्नो-करबाख संघर्ष में अज़रबैजान को आर्मेनिया को हराने में मदद की।
रोहित और विराट के बिना 18 साल का सूखा खत्म कर पाएगी टीम इंडिया
भारतीय क्रिकेट टीम जून में टेस्ट सीरीज के लिए इंग्लैंड दौरे पर जाएगी। इस सीरीज से ठीक पहले विराट कोहली और रोहित शर्मा ने टेस्ट से संन्यास का ऐलान कर दिया है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि नए कप्तान की अगुवाई में क्या टीम इंडिया 18 साल का सूखा खत्म कर पाएगी।
भारतीय क्रिकेट टीम टेस्ट सीरीज के लिए जून में इंग्लैंड दौरे के लिए रवाना होगी। टीम इंडिया के लिए यह सीरीज बहुत ही चुनौतीपूर्ण होने वाले है, क्योंकि विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे सीनियर खिलाड़ियों के रिटायरमेंट में अब टीम में एक खालीपन आ गया है। वहीं शुभमन गिल को इस सीरीज के लिए भावी कप्तान माना जा रहा है। हालांकि, स्क्वाड में जसप्रीत बुमराह और रविंद्र जडेजा जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी होंगे। ऐसे में पूरी उम्मीद है टीम इंडिया इंग्लैंड को उसके घर में कड़ी टक्कर देगी।
हालांकि, भारतीय टीम के लिए यह इतना आसान नहीं है। इसमें कोई शक नहीं है कि भारत एक मजबूत टीम है। पिछले एक दशक से ज्यादा समय से टीम इंडिया ने विदेशी धरती पर अपना खूब डंका बजाया है, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ उसके घर में रिकॉर्ड कुछ खास नहीं रहा है। ऐसे में नए कप्तान के नेतृत्व में उम्मीद होगी कि टीम इंडिया इंग्लैंड की धरती पर 18 साल के सूखे को खत्म करें।
साल 2007 में टीम इंडिया ने जीती आखिरी सीरीज
भारतीय क्रिकेट टीम के लिए इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीतना थोड़ा मुश्किल रहा है। पिछले 18 साल में टीम इंडिया ने कई बार इंग्लैंड का दौरा किया, लेकिन टेस्ट सीरीज जीतने में सफल नहीं हो पाई है। भारतीय टीम ने आखिरी बार राहुल द्रविड़ की कप्तानी में साल 2007 में इंग्लैंड को उसके घर में पटखनी देकर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज को 1-0 से अपने नाम किया था, लेकिन इसके बाद से टीम इंडिया का कोई भी कप्तान टेस्ट सीरीज जीतने में सफल नहीं हो सके हैं।
ब्रिटेन में नहीं चली नीरव मोदी की होशियारी, ब्रिटिश कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका
लंदन: भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की भारत प्रत्यर्पण तक जमानत पर रिहा होने की मांग को लंदन की एक अदालत ने गुरुवार को खारिज कर दिया। इस याचिका में नीरव मोदी ने दलील दी थी कि उसकी जान को खतरा है। ऐसे में वह जमानत मिलने के बाद ब्रिटेन से कहीं नहीं भागेगा। हालांकि, कोर्ट ने नीरव मोदी की दलील को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता लगभग साफ हो गया है। नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक घोटाले का आरोपी है। वह 2018 में भारत से भाग गया था, हालांकि घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद 2019 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को लंदन की अदालत से फिर झटका लगा है। प्रत्यर्पण से बचने के लिए उसने जमानत याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। नीरव ने अपनी जान को खतरा बताते हुए ब्रिटेन से न भागने की दलील दी थी, लेकिन अदालत ने इसे नहीं माना।
उसके वकील का कहना है कि 55 वर्षीय नीरव मोदी ने किसी भी गलत काम से साफ इनकार किया है। उसे भारत प्रत्यर्पित करने के फैसले के खिलाफ उसकी अपील को लंदन के उच्च न्यायालय ने नवंबर 2022 में खारिज कर दिया था। इसके अलावा उसके मामले को ब्रिटेन के सर्वोच्च न्यायालय में ले जाने की मांग को भी खारिज किया जा चुका है।
वकील ने गोपनीय कानून का दिया हवाला
मोदी के वकील एडवर्ड फिट्जगेराल्ड ने गुरुवार को उच्च न्यायालय को बताया कि, हालांकि प्रत्यर्पण का मामला तकनीकी रूप से समाप्त हो चुका है। ऐसे में नीरव लेकिन मोदी को भारतीय अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया जा सकता। फिट्ज़गेराल्ड ने बिना विस्तार से बताए कहा, “ऐसे गोपनीय कानूनी कारण हैं, जिनकी वजह से नीरव मोदी को प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता।”
भारतीय अधिकारियों के वकील ने क्या तर्क दिया
भारतीय अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील निकोलस हर्न ने तर्क दिया कि नीरव मोदी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि वह भागने की कोशिश कर सकता है। वकील ने नीरव मोदी की वानुअतु की नागरिकता के लिए पिछली बोली का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि नीरव मोदी गवाहों के काम में दखलंदाज़ी कर सकता है। हालांकि, फिट्ज़गेराल्ड ने तर्क दिया कि नीरव मोदी भारत सरकार के डर से ब्रिटेन से भाग नहीं जाएगा, क्योंकि उसकी जान को खतरा है।
सुप्रीम कोर्ट में विजय शाह केस की सुनवाई आज:एक दिन पहले अर्जेंट हियरिंग से इनकार किया
मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस लगातार मंत्री से इस्तीफे की मांग कर रही है। बुधवार को अलग-अलग थानों में कांग्रेस ने देशद्रोह के मुकदमे के लिए आवेदन दिया था। वहीं, एमपी हाईकोर्ट के निर्देश पर मंत्री के खिलाफ केस दर्ज हो गया है। सीएम मोहन यादव ने देर रात एक्स पर लिखकर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अब पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। वहीं, अब देखना होगा कि मंत्री का इस्तीफा होता है कि नहीं।मंत्री विजय शाह की मुश्किलें कम नहीं हो रही है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था। सुप्रीम कोर्ट से भी विजय शाह को राहत नहीं मिली है। साथ ही उनकी भाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है। इस मामले में अब अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।
मंत्री विजय शाह के मामले को लेकर सीएम मोहन यादव ने गुरुवार की देर शाम प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ने जो आदेश दिया है। हमारी सरकार ने यथायोग्य तरीके से पालन किया है। और न्यायालय जो कहेगा हम उस हिसाब से चलते रहेंगे। कांग्रेस के पद से इस्तीफे की मांग जमकर फटकार लगाई। उस पर कहा कांग्रेस तो कहती रहेगी। कांग्रेस तो सीतारमैया से मांग ले। कांग्रेस के सारे मंत्रियों पर मुकदमे चल रहे हैं।
इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में पोस्टर से विजय शाह का फोटो हटाया
इंदौर में आयोजित ‘वन अधिकार अधिनियम 2006 के जिला स्तरीय वन अधिकार समितियों का प्रशिक्षण कार्यशाला’ में मंत्री विजय शाह के फोटो वाले पोस्टर लगे। विवादों के चलते आनन-फानन में अधिकारियों ने पोस्टर से फोटो छिपाए। मंत्री की जगह पीएम मोदी का फोटो लगाया। साथ ही जिम्मेदारों को अधिकारियों ने कड़ी फटकार लगाई।
- मंत्री विजय शाह को मिला अपनी ही पार्टी की इस मंत्री का समर्थन
- विवादों में घिरे मंत्री विजय शाह को नगरीय विकास एवं आवास विभाग की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का समर्थन मिला है। शाह का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी मंशा किसी का अपमान करने की नहीं थी। उन्होंने कहा कि विजय शाह के उपयोग किए गए शब्द निश्चित रूप से अनुपयुक्त थे। लेकिन उन्होंने स्पष्टीकरण दिया और माफी भी मांगी है।
- बीजेपी के शाह पर निर्णय नहीं लेने से हैरान सीनियर पूर्व सांसद
- पूरे देश में एमपी बीजेपी सरकार में मंत्री विजय शाह पर बीजेपी की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं होने पर पूर्व सीनियर सांसद रघुनंदन शर्मा ने दुख जताया है। शर्मा ने कहा कि मुझे लगता है कि इसके ऊपर तत्परता से पहले दिन ही कार्रवाई हो जाना चाहिए थी।
- मंत्री विजय शाह ने साधी चुप्पी, कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर हुए अंडरग्राउंड
- जनजातीय मंत्री विजय शाह की मुश्किलें कम नहीं हो रही है। किसी कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। इसके बाद मंत्री विजय शाह अंडरग्राउंड हो गए हैं। साथ ही मीडिया से दूरी बना ली है। वहीं, भोपाल में उनके घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
- झारखंड के मंत्री इरफान कुरैशी ने विजय शाह को बर्खास्त करने की मांग की
- झारखंड के मंत्री इरफान कुरैशी ने सीएम मोहन यादव से मांग की है कि विजय शाह को बर्खास्त करें। उन्होंने कहा कि सुन लो, विजय शाह बिगड़े घोड़े पर मुझे नकेल डालना आता है। अगर जुबान नहीं संभाली तो जुबान खींच लूंगा। मैं जल्द ही मध्य प्रदेश आ रहा हूं।
- मंत्री विजय शाह की बर्खास्तगी पर डेप्युटी जगदीश देवड़ा का बड़ा बयान
- आयामंत्री विजय शाह को बर्खास्त करने की मांग लगातार उठ रहे हैं। इस बीच डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा का बड़ा बयान आया है। देवड़ा ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर शीर्ष नेतृत्व गंभीर है। बर्खास्तगी पर फैसला वही लेंगे।
- बसपा प्रमुख मायावती ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर को सही ठहराया
- बसपा प्रमुख मायावती ने कर्नल सोफिया कुरैशी के संबंध में आपत्तिजनक बयान देने पर मध्य प्रदेश के मंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने को उचित ठहराया है। मायावती ने गुरुवार को ‘एक्स’ पर लिखा कि पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान के आतंकवादियों के खिलाफ संचालित ‘आपरेशन सिंदूर’ की जानकारी देश के साथ साझा करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी पर मध्यप्रदेश के मंत्री ने अभद्र टिप्पणी की। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद कल देर रात मंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई जो उचित है लेकिन भाजपा ने कोई कदम नहीं उठाया।
- मंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा कि विजय शाह की मंशा अपमान का नहीं
- मंत्री विजय शाह की वजह से बीजेपी की फजीहत हो रही है। राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी उनके बचाव में आई हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि शाह की मंशा अपमान करने की नहीं थी। उन्होंने अपने बयान के लिए माफी मांग ली है। शब्दों की हेराफेरी जरूर हुई है।
- उमा भारती ने मंत्री विजय शाह को फिर से बर्खास्त करने की मांग की
- मंत्री विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पूर्व सीएम उमा भारती मुखर हो रही हैं। उन्होंने 24 घंटे के अंदर दूसरी बार मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की है। उमा भारती ने एक्स पर लिखा कि हमारे राज्य के मेरे सगे भाई जैसे प्रिय मंत्री को या तो हम बर्खास्त करें या वह इस्तीफा दे दें, क्योंकि उनका असभ्य कथन हम सबको शर्मिंदा कर रहा है, उनकी बर्खास्तगी में असमंजस आश्चर्य का विषय है।
- मंत्री विजय शाह के घर जा रहीं महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका
- एमपी में मंत्री विजय शाह का विरोध शुरू हो गया है। महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता विजय शाह के घर पर प्रदर्शन करने जा रही थीं। इस दौरान भोपाल पुलिस ने उन्हें रोक दिया है। मंत्री के बंगले के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती है। महिला कांग्रेस की नेत्री मंत्री को बर्खास्त करने की मांग कर रही हैं।
- 01:00 PM, May 15 2025कांग्रेस नेता ने फोन लगाकर मंत्री विजय शाह से कहा कि इस्तीफा दोमंत्री विजय शाह अब उलझते जा रहे हैं। कांग्रेस अनुसूचित विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने मंत्री विजय शाह को फोन किया है। साथ ही कहा कि आपने कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में गलत बात की है। आप अपनी पद से इस्तीफा दे दीजिए। इसके बाद विजय शाह ने फोन काट दिया।
- मंत्री विजय शाह के खिलाफ पुलिस ने शुरू की जांच
- मंत्री विजय शाह पर दर्ज एफआईआर की जांच इंदौर पुलिस ने शुरू कर दी है। हाईकोर्ट की टिप्पणी पर डीआईडी निमिष अग्रवाल ने कहा कि शाम तक हाईकोर्ट के आदेश मिलने के बाद एफआईआर में बदलाव किया जाएगा। जिन धाराओं में केस दर्ज किया गया है, उसमें कोर्ट से जमानत होगी या थाने से नोटिस देकर छोड़ा जाएगा। उसे लेकर कानूनी जानकारों से सलाह लेंगे।
- मंत्री विजय शाह पर एफआईआर के नाम पर खानापूर्ति, एमपी हाईकोर्ट फिर भड़की
- मंत्री विजय शाह के मामले में एमपी हाईकोर्ट में भी गुरुवार को सुनवाई हुई है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी की है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि एफआईआर में खानापूर्ति हुई है। फिर से एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि हम इसकी मॉनिटरिंग करेंगे।
एफबीआई निदेशक काश पटेल
US में बड़े बदलाव के संकेत: FBI वाशिंगटन भ्रष्टाचार दस्ते में एक भंग करेगी
फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) वाशिंगटन स्थित भ्रष्टाचार दस्ते में से एक को भंग करेगी। इस दस्ते को कांग्रेस के सदस्यों और अन्य संघीय अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और सार्वजनिक भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने का जिम्मा मिला था। एफबीआई के इस बदलाव के बारे में बृहस्पतिवार को मामले से परिचित लोगों ने जानकारी दी।
फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) वाशिंगटन स्थित भ्रष्टाचार दस्ते में से एक को भंग करेगी। इस दस्ते को कांग्रेस के सदस्यों और अन्य संघीय अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और सार्वजनिक भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने का जिम्मा मिला था। एफबीआई के इस बदलाव के बारे में बृहस्पतिवार को मामले से परिचित लोगों ने जानकारी दी।
मामले से परिचित एफबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि यह कदम वाशिंगटन फील्ड ऑफिस के पुनर्गठन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि एफबीआई अब भी सरकारी अधिकारियों के भ्रष्टाचार की जांच जारी रखेगी। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि दस्ते में काम कर रहे एजेंटों को अब कहां तैनात किया जाएगा। हालांकि, वाशिंगटन और वर्जीनिया में एफबीआई की कुछ और टीमें पहले से ही भ्रष्टाचार की जांच में लगी हुई हैं।
अधिकारियों के स्थानांतरण से जुड़ा है फैसला
अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कार्मिक परिवर्तनों के बारे में चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह फैसला उन अधिकारियों के स्थानांतरण से जुड़ा है, जिसकी पहले कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई थी। यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है, जब ट्रंप प्रशासन भ्रष्टाचार से निपटने के अपने तौर-तरीकों में बदलाव कर रहा है। इसमें न्याय विभाग के अभियोजकों के एक प्रतिष्ठित अनुभाग के आकार में कटौती करना शामिल है, जो निर्वाचित नेताओं के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामलों को संभालने के लिए जिम्मेदार है।
न्यूयॉर्क के मेयर का भ्रष्टाचार मामला खारिज किया
ट्रंप प्रशासन ने एक ऐसे कानून के आपराधिक प्रवर्तन में विराम लगाने की भी घोषणा की है, जो अमेरिकी कंपनियों को व्यापार के लिए विदेशी अधिकारियों को रिश्वत देने से रोकता है। इसके अलावा, न्याय विभाग ने फरवरी में न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मामले को खारिज कर दिया, ताकि वह अवैध आव्रजन के खिलाफ प्रशासन की कोशिशों में सहयोग कर सकें।
पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ
शहबाज शरीफ शांति के लिए भारत से बातचीत को तैयार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बृहस्पतिवार को भारत से बातचीत का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान शांति के लिए भारत के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है। उन्होंने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में कामरा एयरबेस के दौरे के दौरान यह टिप्पणी की। हालांकि, शहबाज ने यह भी कहा कि शांति की शर्तों में कश्मीर का मुद्दा भी शामिल है।
: मधुमेह का जोखिम कम करने को स्कूलों में लगेंगे शुगर बोर्ड
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूलों में अब जल्द ही शुगर बोर्ड बनेंगे। सीबीएसई ने बच्चों में बढ़ रही मधुमेह बीमारी पर चिंता जताते हुए शुगर बोर्ड स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। सीबीएसई ने कहा है कि इन पर छात्रों को अत्यधिक चीनी सेवन. जंक फूड (पिज्जा, बर्गर, मोमोज), कोल्ड ड्रिंक्स जैसे खाद्य और पेय पदार्थों से जुड़े जोखिम की जानकारी प्रदर्शित करने के लिए कहा है।
तुर्किये बहिष्कार से कश्मीरी सेब की मांग बढ़ी
भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के दौरान तुर्किये द्वारा पाकिस्तान के समर्थन के बाद दिल्ली के फल बाजारों में तुर्किये सेब का बहिष्कार जोर पकड़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप, व्यापारियों और उपभोक्ताओं ने तुर्किये सेब की खरीद बंद कर दी है, जिससे इन सेबों की आपूर्ति बाजारों में लगभग खत्म हो गई है। दूसरी ओर कश्मीरी अम्बरी सेब की मांग में वृद्धि देखी जा रही है, क्योंकि उपभोक्ता स्वदेशी विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
ट्रंप और उनके दामाद जेरेड कुशनर का परिवार
US-PAK Ties: बेटे-दामाद की कंपनी बचाने के लिए पाकिस्तान की पैरवी कर रहे ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम का श्रेय ले रहे हैं। इस बीच ट्रंप के बार-बार संघर्ष विराम के लिए पाकिस्तान की पैरवी करने की बड़ी वजह सामने आई है। बताया जा रहा है कि ट्रंप ने संघर्ष विराम की आड़ में पाकिस्तान के साथ बड़ा क्रिप्टो समझौता किया है।