वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को लगातार 8वां बजट पेश करने का रिकॉर्ड बनाएंगी। उम्मीद है कि आम बजट में कमजोर पड़ती आर्थिक वृद्धि को सहारा देने तथा महंगाई और स्थिर वेतन वृद्धि से जूझ रहे मध्यम वर्ग को राहत देने के उपाय किए जाएंगे।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को लगातार 8वां बजट पेश करने का रिकॉर्ड बनाएंगी। उम्मीद है कि आम बजट में कमजोर पड़ती आर्थिक वृद्धि को सहारा देने तथा महंगाई और स्थिर वेतन वृद्धि से जूझ रहे मध्यम वर्ग को राहत देने के उपाय किए जाएंगे। इसके साथ ही सीतारमण पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई द्वारा अलग-अलग समयावधि में पेश किए गए 10 बजटों के रिकॉर्ड के करीब पहुंच जाएंगी। देसाई ने 1959-1964 के दौरान वित्त मंत्री के रूप में कुल छह बजट और 1967-1969 के बीच चार बजट पेश किए थे। सीतारमण को 2019 में भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री बनाया गया था। इसी साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्र में लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। तब से सीतारमण ने सात बजट पेश किए हैं।
स्वतंत्र भारत का पहला आम बजट 26 नवंबर, 1947 को देश के पहले वित्त मंत्री आर के शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था। पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और बाद में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में वित्त मंत्री के तौर पर कुल 10 बजट पेश किए हैं। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने नौ मौकों पर बजट पेश किया। प्रणब मुखर्जी ने वित्त मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान आठ बजट पेश किए। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 1991 से 1995 के बीच लगातार पांच बार बजट पेश किया, जब वह पी वी नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री थे।
सबसे लंबा बजट भाषण सीतारमण ने एक फरवरी, 2020 को दो घंटे 40 मिनट का दिया। वर्ष 1977 में हीरूभाई मुलजीभाई पटेल का अंतरिम बजट भाषण अब तक का सबसे छोटा भाषण है, जिसमें केवल 800 शब्द हैं। बजट पारंपरिक रूप से फरवरी के आखिरी दिन शाम पांच बजे पेश किया जाता था। वर्ष 1999 में समय बदला गया और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिंह ने सुबह 11 बजे बजट पेश किया। तब से बजट सुबह 11 बजे पेश किया जाता है। इसके बाद 2017 में बजट पेश करने की तिथि बदलकर एक फरवरी कर दी गई, ताकि सरकार मार्च के अंत तक संसदीय मंजूरी की प्रक्रिया पूरी कर सके।
31 जनवरी को होगा पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25
आर्थिक सर्वेक्षण2024-25 को 31 जनवरी को संसद में पेश किया जाएगा। यह रिपोर्ट भारत की अर्थव्यवस्था का व्यापक विश्लेषण करेगी और आर्थिक नीतियों, विकास दर, प्रमुख सेक्टर्स जैसे एग्रीकल्चर, इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर की स्थिति पर रोशनी डालेगी।
इस सर्वे को मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की देखरेख में तैयार किया गया है, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में प्रस्तुत करेंगी। इसके बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार मीडिया के सवालों के जवाब देंगे।

क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण?
आर्थिक सर्वेक्षण सरकार द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो देश की आर्थिक सेहत और वित्तीय प्रगति का आकलन करता है। यह रिपोर्ट बीते वित्त वर्ष के प्रदर्शन का लेखा-जोखा देती है और आने वाले वर्षों के लिए संभावनाओं और नीतिगत दिशा की झलक दिखाती है।
इस रिपोर्ट को वित्त मंत्रालय के अंतर्गत तैयार किया जाता है और इसमें आर्थिक सुधारों, सरकारी योजनाओं, औद्योगिक विकास, व्यापार नीति और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का विश्लेषण किया जाता है।
इकोनॉमिक सर्वे का महत्व और उद्देश्य
- विकास की समीक्षा: देश की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन और विकास दर का मूल्यांकन।
- चुनौतियों की पहचान: महंगाई, बेरोजगारी, राजकोषीय घाटा जैसी आर्थिक चुनौतियों पर फोकस।
- भविष्य की नीतियां: बजट से पहले सरकार के आर्थिक एजेंडे और प्राथमिकताओं का संकेत।
- विभिन्न सेक्टर्स की स्थिति: कृषि, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और व्यापार के रुझानों का विश्लेषण।
- दो भागों में होता है पेश
2015 के बाद से आर्थिक सर्वेक्षण को दो भागों में प्रस्तुत किया जाने लगा।
पहला भाग: बजट से पहले पेश किया जाता है, जिसमें अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति, सरकारी वित्तीय स्थिति और प्रमुख आर्थिक रुझानों की जानकारी होती है।
दूसरा भाग: जुलाई या अगस्त में जारी किया जाता है, जिसमें विस्तृत आर्थिक आंकड़े और सेक्टर-वार विश्लेषण शामिल होते हैं।