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भाजपा से दूर जा रही निषाद पार्टी, अकेले दम पर लड़ेगी यूपी पंचायत चुनाव

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,लखनऊ 

भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी ने कई मुद्दों को लेकर अपने तेवर तल्ख कर लिए हैं। पार्टी ने राज्य में होने जा रहे पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य की सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने का फैसला किया है। मछुआ बिरादरी को एससी में शामिल नहीं किए जाने पर वर्ष 2022 विधानसभा चुनाव में पार्टी सभी विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारने का मन बना चुकी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद का दावा है कि निषाद बाहुल्य 100 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पर उनकी पार्टी जीत हासिल करने में सक्षम है।
 
शुक्रवार को प्रेसवार्ता कर डा. संजय निषाद ने कहा कि भाजपा ने मछुआ समुदाय को एससी में शामिल करने का वादा किया था, जिसे अभी तक पूरा नहीं किया। इस वादाखिलाफी के कारण मछुआ समुदाय में रोष है। आगामी विधानसभा सत्र में भाजपा सरकार यदि मछुआ बिरादरी को एससी में शामिल नहीं करती है तो उनकी पार्टी 2022 के विधानसभा चुनावों में सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी। उन्होंने कहा है कि भाजपा से अलग होने की स्थिति में वह किसी दूसरी पार्टी के साथ भी गठबंधन में जा सकते हैं, गठबंधन का दरवाजा उन्होंने बंद नहीं किया है। 

राज्यसभा, मंत्रिमंडल और पार्टी कार्यालय भी नाराजगी की वजह

डा. संजय निषाद ने कहा है कि पूरे प्रदेश में मछुआ समुदाय के वोटरों की संख्या करीब 18 फीसदी है। 160 सीटें ऐसी हैं जहां पर 80 हजार से लेकर एक लाख तक वोटर हैं। इनमें से कम से कम 100 सीटें ऐसी हैं जहां पर उनकी पार्टी बगैर किसी के सहयोग के जीत दर्ज करने की क्षमता में है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेजने की बात कही थी, जिसे पूरा नहीं किया। प्रदेश मंत्रिमंडल में जगह देने की बात थी उसे भी पूरा नहीं किया। वादे के बावजूद आज तक लखनऊ में पार्टी के लिए कार्यालय तक नहीं दिया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यदि मछुआ समुदाय को एससी में शामिल कर लिया जाता है तो गठबंधन के तहत भाजपा जितनी सीटें देगी उनकी पार्टी स्वीकार करेगी।

पहले सपा-बसपा के पाले रहे हैं निषाद

प्रदेश के सियासी समीकरणों में निषाद खासी अहमियत रखते हैं। करीब 15 वर्षों तक पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी निषाद वोट बैंक के जरिये सत्ता हासिल करते रहे हैं। नब्बे के दशक में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने फूलनदेवी की रिहाई करवा कर इस वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई। पूर्वांचल में जमुना प्रसाद निषाद सपा के कद्दावर नेता रहे। वह 1999 में समाजवादी पार्टी से गोरखपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़े और योगी आदित्यनाथ से सात हजार वोट से हारे थे।

पिछले चुनावों यानी 2017 से पहले भाजपा ने गैर यादव ओबीसी को पाले में लाने की कोशिश की और भाजपा को इसका लाभ मिला। आजाद भारत में मछुआ (निषाद) समाज लंबे समय तक कांग्रेस के साथ रहा। सबसे अधिक निषाद राप्ती, घाघरा, यमुना, गंगा, बेतवा, रोहिणी जैसी बड़ी नदियों के किनारे गोरखपुर, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, बलिया, गाजीपुर, मिर्जापुर, प्रयागराज, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, संतकबीर नगर, अयोध्या, गोंडा, हमीरपुर, जालौन, आगरा, बुलंदशहर, बागपत, फिरोजाबाद में हैं। 1980 से पूर्व प्रदेश में मछुआ बिरादरी एससी में थीं। 

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