पटना: छठ महापर्व का दूसरा दिन, जिसे खरना के नाम से जाना जाता है, इस पर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक और शारीरिक शुद्धता का प्रतीक है. इस दिन व्रती सूर्यास्त से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और पूजा की तैयारी करते हैं. खरना के दिन व्रत रखने वाले लोग दिनभर उपवास करते हैं और शाम को विशेष पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं. यह दिन छठ पूजा की तैयारी को और गहराई देता है, जिसमें भक्त सूर्य देव और छठी मइया के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण को और मजबूत करते हैं.
चिराग के घर पहुंचे नीतीश
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चिराग पासवान के घर जाकर खरना का प्रसाद ग्रहण किया. चिराग ने सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर कर लिखा, ‘धन्यवाद माननीय मुख्यमंत्री जी, जो आज आप मेरे आवास पर आए और खरना का प्रसाद ग्रहण किया. इस दौरान मेरे परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर छठ महापर्व की शुभकामनाएं देने के लिए हार्दिक आभार.’
खरना की पूजन विधि और महत्व
खरना की पूजन विधि में व्रती सूर्यास्त के समय स्नान कर स्वच्छ स्थान पर पूजा स्थल तैयार करते हैं. मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर और रोटी बनाई जाती है, जिसे प्रसाद के रूप में छठी मइया और सूर्य देव को अर्पित किया जाता है. पूजा में केले, नारियल, और अन्य फल भी चढ़ाए जाते हैं. पूजा के बाद व्रती और परिवार के सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं, जो 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत का संकेत देता है. खरना का महत्व इसकी सादगी और भक्ति में निहित है, जो परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की सुरक्षा और दीर्घायु के लिए किया जाता है. यह पूजा भक्तों को आत्मिक शांति और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करती है.
मिट्टी के चूल्हे पर तैयार होगा प्रसाद
खरना के दिन प्रसाद की तैयारी में मिट्टी के चूल्हे का विशेष महत्व है. इस दिन गुड़ की खीर, जिसे रसियाव भी कहा जाता है उसे मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी की आग में बनाया जाता है. यह प्रक्रिया न केवल पारंपरिक है, बल्कि पर्यावरण के प्रति सम्मान और शुद्धता का भी प्रतीक है. मिट्टी का चूल्हा और लकड़ी की आग प्रसाद को पवित्रता प्रदान करती है, और इसे तैयार करने में स्वच्छता और भक्ति का विशेष ध्यान रखा जाता है. यह प्रसाद सूर्य देव और छठी मइया को अर्पित किया जाता है, जो भक्तों के लिए आशीर्वाद का माध्यम बनता है.

