एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी यूपी के चुनावी दंगल में कूद पड़े हैं. उन्होंने पहले कैंडिडेट का ऐलान भी कर दिया है. साथ ही ये पत्ता भी फेंक दिया कि बीजेपी को हराने वाली ताकतें अगर एक साथ आती हैं तो वे भी साथ देने को तैयार हैं. जब इस बारे में कांग्रेस नेता इमरान मसूद से पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा, हम लोग सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ हैं, यह गठबंधन होगा या नहीं, इस पर अभी कोई चर्चा नहीं है. लेकिन सपा के साथ अलायंस की बात तो चल रही है.
न्यूज18इंडिया के शो ‘आरपार’ में एंकर अमिश देवगन ने इमरान मसूद से पूछा कि ओवैसी कह रहे हैं कि मुसलमान अब दरी नहीं बिछाएगा, इस पर आपकी क्या राय है? इस पर इमरान मसूद ने कहा, देश में मौजूदा माहौल को देखते हुए सबसे बड़ी जरूरत नफरत और सांप्रदायिकता को खत्म करने की है. समाज में जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव तथा लोगों के साथ होने वाले अन्याय को रोकना जरूरी है. मुसलमानों की भागीदारी घट रही है, यह सच है, लेकिन अभी वक्त है सब साथ मिलकर समाज को बांटने वाली राजनीति का मुकाबला करें.
ओवैसी से गठबंधन के सवाल पर…
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और ओवैसी की पार्टी के संभावित गठबंधन पर उन्होंने कहा फिलहाल ऐसी कोई चर्चा नहीं है. उन्होंने कहा, ये अलायंस मुझे नहीं लगता कि अभी कोई चर्चा इस पर हो भी रही है. जब कोई चर्चा ही नहीं है तो मैं क्या बता सकता हूं. गठबंधन संबंधी फैसले पार्टी नेतृत्व ही करेगा. जब अमिश ने उनसे पूछा… लेकिन सपा से बातचीत तो चल रही है. आपने कहा कि 170 सीटों पर लड़ेंगे, वो आपको 40 सीटें देने की फिराक में हैं, 50 मैक्सिमम… इस पर इमरान मसूद ने कहा, ना मैनें कहा कि 170 सीटों पर लड़ेंगे और ना ही हम उनसे मांगने जा रहे हैं. उन्हें भी पता है कि बड़ी पार्टी तो कांग्रेस है, एक राष्ट्रीय पार्टी है.
सपा से अलायंस के सवाल पर
समाजवादी पार्टी के साथ सीट बंटवारे के सवाल पर इमरान मसूद ने कहा कि कांग्रेस भीख मांगने की राजनीति नहीं करती. उन्होंने बताया कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर संगठनात्मक तैयारी की है और 70 प्रतिशत से अधिक बूथों पर अध्यक्ष तथा समितियां नियुक्त की जा चुकी हैं. उनके मुताबिक कांग्रेस ने 170 से अधिक ऐसी सीटों की पहचान की है, जहां वह मजबूती से चुनाव लड़ सकती है. हालांकि अंतिम फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करेगा.
देखिए ओवैसी कहीं बीजेपी को फायदा तो नहीं पहुंचा रहे
ओवैसी की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए इमरान मसूद ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों से यह सवाल उठता है कि कहीं विपक्षी वोटों के बंटवारे का फायदा भाजपा को तो नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि जो भी राजनीति भाजपा को फायदा पहुंचाती है, उस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस हर प्रकार की सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ है.
असदुद्दीन ओवैसी पूरे मुस्लिमों के नेता नहीं
रैपिड फायर राउंड में इमरान मसूद ने कहा कि वह असदुद्दीन ओवैसी को पूरे मुस्लिम समाज का नेता नहीं मानते. ममता बनर्जी और उनकी पार्टी की मौजूदा स्थिति पर उन्होंने कहा कि जो कुछ हो रहा है वह गलत है, हालांकि इसके लिए पार्टी नेतृत्व भी कुछ हद तक जिम्मेदार है. वहीं प्रियंका गांधी और राहुल गांधी में से किसी एक को बड़ा नेता चुनने के सवाल पर उन्होंने दोनों को समान महत्व देने की बात कही.
राहुल गांधी विपक्ष की वैचारिक धुरी बने
राहुल गांधी की भूमिका पर इमरान मसूद ने कहा कि वर्तमान समय में देश की राजनीति दो विचारधाराओं के बीच संघर्ष के रूप में देखी जा सकती है. उनके अनुसार एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विचारधारा है, जबकि दूसरी तरफ राहुल गांधी विपक्ष की वैचारिक धुरी के रूप में उभरे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दलों के लिए राहुल गांधी के साथ मिलकर चलना राजनीतिक रूप से अधिक लाभकारी साबित हो सकता है.
अशोक गहलोत के बयान पर
अशोक गहलोत के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि इंदिरा गांधी आज जीवित होतीं तो भाजपा को बैन कर देतीं, इमरान मसूद ने कहा कि गहलोत का बयान उस माहौल के संदर्भ में था जिसमें नफरत की राजनीति बढ़ने की बात कही जा रही है. उनके अनुसार कांग्रेस की विचारधारा नफरत की राजनीति के खिलाफ रही है और गहलोत का आशय भी इसी संदर्भ में था. सरदार पटेल ने बैन किया था, नेहरू ने बैन हटाया था. लेकिन देखिए आज क्या-क्या बोलते हैं नेहरू के बारे में… जब उनसे पूछा गया कि बीजेपी को चुनाव में हरा नहीं पाएंगे तो क्या बैन करेंगे? इस पर इमरान मसूद ने कहा, उन्होंने ऐसी बात नहीं की. उन्होंने कहा कि बीजेपी जैसी नफरत फैलाने वाली संस्थाओं को बैन कर देती.
