सीपीए को बंद करने की स्थिति में वल्लभ भवन, विधानसभा और सतपुड़ा व विंध्याचल भवन जैसे 15 भवनों का मेंटेनेंस लेने के लिए कोई राजी नहीं है। पीडब्ल्यूडी ने सड़क लेने पर सहमति दी है, जबकि सीपीए की फॉरेस्ट विंग को नगर निगम और वन विभाग दोनों लेने पर राजी हैं। सोमवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में सीपीए को बंद करने के बाद की स्थिति पर निर्णय होगा।
सीपीए जिन बिल्डिंग का मेंटेनेंस कर रहा है, उनमें शौर्य स्मारक के साथ तात्या टोपे स्टेडियम और बाबे अली स्टेडियम भी शामिल हैं। वल्लभ भवन और विधानसभा जैसे भवनों में मुख्यमंत्री, मंत्री व अन्य वीआईपी की आवाजाही होने से अफसर इनका रखरखाव हाथ में रखने से बच रहे हैं। कुछ माह पूर्व वल्लभ भवन की एक लिफ्ट खराब होने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी सामने आई थी।
सीपीए बंद होने पर इस डिविजन का क्या होगा
सीपीए का एक डिविजन गैस राहत विभाग के अधीन कार्य करता है। इनको मिलाकर यह डिविजन कुल 16 बिल्डिंग का मेंटेनेंस करता है। कमला नेहरू अस्पताल में आग लगने पर यह बात सामने आई थी कि इस डिविजन पर प्रशासनिक व वित्तीय नियंत्रण गैस राहत विभाग का है। ऐसे में अभी यह भी सवाल बना हुआ है कि सीपीए के बंद होने पर इस डिविजन का क्या होगा।
इन भवनों का मेंटेनेंस करता है सीपीए
विस, मंत्रालय, सतपुड़ा, विंध्याचल, टीटी नगर स्टेडियम, बाल भवन, प्रशासन अकादमी, संस्कृति भवन, गीतांजलि कॉलेज, निर्वाचन, राज्य निर्वाचन आयोग, पाठ्य पुस्तक भवन, सीटीई बिल्डिंग, सीपीए ऑफिस, गैस राहत विभाग के 16 भवन, बाबे अली स्टेडियम।
सीएम हुए थे नाराज
अगस्त में सड़क खराब होने पर सीएम नाराज हुए थे और उन्होंने सीपीए को बंद करने का फरमान सुनाया था। इसके बाद से इसकी कवायद चल रही है।
अंतिम निर्णय उच्च स्तर पर ही होगा
सीपीए के समापन पर नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सुझाव मांगे थे। सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी लेने को तैयार है। सीपीए को पूरी तरह बंद करने की बजाय रखरखाव का एक डिविजन बनाए रखा जा सकता है। अंतिम निर्णय उच्च स्तर पर ही होगा। -पीसी बारस्कर, सेक्रेटरी, पीडब्ल्यूडी

