केंद्र सरकार महंगाई भत्ते का मूल्यांकन जब कोरोना काल में कर रही है तब एरियर्स भुगतान पर आनाकानी क्यों ?
सरकार की नीयत में खोट है
* अजय खरे *
रीवा 3 अगस्त . समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने कहा है कि कोरोना के शुरुआती प्रकोप के दौरान मोदी सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों के द्वारा अपने सभी कर्मचारियों और पेंशनरों को हर 6 महीने में दी जाने वाली महंगाई भत्ते की किस्त जून 2021 तक रोक दी थी .यहां तक उनको मिलने वाली सालाना वेतन वृद्धि भी स्थगित कर दी गई . केंद्र सरकार द्वारा जनवरी 2020 से कर्मचारियों के रोके गए महंगाई भत्ता वृद्धि को इधर बहाल किया गया है जिसके चलते केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 17℅ से बढ़कर 28 फीसदी हो गया है . जनवरी 2020 में DA 4 फीसदी बढ़ा था , फिर जून 2020 में 3 फीसदी बढ़ा और जनवरी 2021 में यह 4 फीसदी बढ़ा है. अब इन तीनों किस्तों का भुगतान होना है. कर्मचारियों को अभी जून 2021 के महंगाई भत्ते के डाटा का भी इंतजार है . जानकारी मिली है कि महंगाई भत्ते की अगली किस्त के रूप में 3% वृद्धि और की जा सकती है . इस तरह केंद्रीय कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता 31% हो जाएगा . श्री करे ने कहा कि कोरोना लॉकडाउन 25 मार्च सन 2020 से लागू हुआ था लेकिन कर्मचारियों को जनवरी 2020 से मिलने वाले महंगाई भत्ते की किस्त के भुगतान को भी रोक दिया गया था . इधर केंद्र सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते का पिछला मूल्यांकन करके उसे जुलाई 2021से प्रभावशील किया है लेकिन पुराना बकाया देने के बारे में आनाकानी कर रही है . कायदे से कर्मचारियों को जनवरी 2020 से बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता अदा किया जाना चाहिए . उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार खुद कह रही है कि महंगाई भत्ता जनवरी 2020 , जून 2020 और जनवरी 2021 से बढ़ाया गया है तो ऐसी स्थिति में उसे जुलाई 2021 से प्रभावशील माने जाने की बात औचित्यहीन नजर आती है .सरकार को यदि जनवरी 2020 से महंगाई भत्ता नहीं देना है तो उसका मूल्यांकन उस समय से नहीं किया जाना चाहिए था . जनवरी 2020 से बढ़ाए गए महंगाई भत्ते की पिछली बकाया राशि का भुगतान नहीं किए जाने की बात कर्मचारियों की अमानत राशि में खयानत वाली कहावत चरितार्थ कर रही है . आमतौर पर प्रत्येक कर्मचारी की पिछले 18 महीने की महंगाई भत्ते की कुल बकाया राशि ₹100000 से भी अधिक बैठती है . यदि सरकार इस राशि को प्रधानमंत्री केयर फंड में भी डालती है तो उसका उल्लेख भी उसे करना होगा . ऐसी स्थिति में कर्मचारियों को आयकर में छूट मिल सकती है . लेकिन सरकार कर्मचारियों को किसी तरह की छूट देने को तैयार नहीं है . श्री खरे ने कहा कि एक तरह से सरकार कर्मचारियों का पैसा डकार गई है . यह साफ नजर आ रहा है कि केंद्र सरकार की नीयत में खोट है . इसका असर केंद्र सरकार के कर्मचारियों पर ही नहीं , पेंशनरों पर भी पड़ा है जिनकी संख्या कुल मिलाकर एक करोड़ से भी अधिक हैं . केंद्र सरकार के इस रवैए के चलते राज्य सरकारें भी उसी रास्ते पर चल रही हैं . इसे लेकर देश भर के करोड़ों सरकारी कर्मचारियों एवं पेंशनरों की नाराजगी स्वाभाविक है .
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का एरियर्स भुगतान न करना , अमानत में खयानत है

