बैतूल जिले के आमला की रहने वाली डिप्टी कलेक्टर और छतरपुर के लवकुशनगर SDM निशा बांगरे के खिलाफ नोटिस जारी हुआ है। भोपाल में सरकारी आवास पर अवैध रूप से कब्जा रखने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने उन्हें नोटिस दिया है। बांगरे का छतरपुर ट्रांसफर होने के बावजूद भोपाल के सरकारी आवास पर कब्जा है। निशा बांगरे ने गुरुवार को पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव को त्यागपत्र भेजा। अंतरराष्ट्रीय सर्वधर्म शांति सम्मेलन के आयोजन और अपने इस्तीफे को लेकर वे चर्चा में हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग ने निशा बांगरे को नोटिस दिया है।
BJP प्रदेशाध्यक्ष बोले- PM मोदी का भोपाल में रोड शो होगा
27 जून को मध्यप्रदेश आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भोपाल में रोड शो होगा। BJP प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भोपाल में रोड शो करेंगे। हालांकि, इससे पहले PMO ने रोड शो की मंजूरी नहीं दी थी। PM भोपाल में वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने और बूथ विस्तारक कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं। शर्मा ने बताया, ‘रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर बालाघाट से पांच यात्राओं की शुरुआत हुई थी। 27 जून को PM मोदी इन पांचों यात्राओं का समापन करेंगे। प्रधानमंत्री जब भोपाल आएंगे, तो रोड शो भी होगा। भाजपा के कार्यकर्ता प्रधानमंत्री का स्वागत करेंगे।’
सागर में घर गिराए जाने पर प्रियंका गांधी ने कहा, सत्ता के अहंकार में भाजपा
सागर में गरीबों के मकान गिराए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। नेशनल लीडरशिप इसमें इनवॉल्व हो चुकी है। अब कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने शिवराज सरकार को घेरा है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, ‘मध्यप्रदेश में दलितों पर भाजपा सरकार का अत्याचार चरम पर है। सागर जिले में 10 दलित परिवारों के घर ढहा दिए गए। जो परिवार मजदूरी करने गए थे, बिना कोई सूचना दिए उनकी सारी गृहस्थी तहस-नहस कर दी। PM आवास योजना के तहत बने घर भी ढहा दिए। सत्ता के अहंकार में भाजपा यह भूल गई है कि सरकार का काम लोगों को उजाड़ना नहीं, बल्कि बसाना है। दलितों, आदिवासियों और गरीबों पर अत्याचार करने वाली भाजपा सरकार को मध्यप्रदेश की जनता सबक सिखाएगी।’
इससे पहले शुक्रवार को बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती का ट्वीट आया था। उन्होंने लिखा था, ‘मध्यप्रदेश सरकार की विध्वंसकारी – द्वेषपूर्ण बुलडोजर राजनीति लोगों के घर और स्कूल तोड़ते-तोड़ते अब PM आवास योजना के अंतर्गत बने गरीबों के मकान भी तोड़ने लगी है, जो अति निंदनीय है। इसी क्रम में सागर जिले में PM योजना के तहत बने 7 दलित परिवारों के घरों का ध्वंस शर्मनाक।’
डिप्टी कलेक्टरनिशा बांगरे ने बताई इस्तीफा देने की वजह
अंतरराष्ट्रीय सर्वधर्म शांति सम्मेलन के आयोजन और अपने इस्तीफे को लेकर एक बार फिर से डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे सुर्खियों में हैं।
उन्होंने अब कभी प्रशासनिक सेवा में नहीं लौटने का संकल्प दोहराते हुए आमला में होने वाले आयोजन को षड्यंत्र का शिकार होने की बात भी कही है। निशा ने इसके लिए सीधे-सीधे जिले के मुखिया और एक माननीय को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इस्तीफा देने के पीछे राजनीतिक कारणों को भी खारिज कर दिया है।
डिप्टी कलेक्टर बांगरे वही हैं, जिन्होंने डीएसपी और डिप्टी कलेक्टर की परीक्षा एक साथ पास की थी, लेकिन एक साथी प्रतियोगी की रिक्वेस्ट पर उन्होंने डीएसपी का पद छोड़ दिया था। डिप्टी कलेक्टर बन गई थीं।
इस पूरे मामले को लेकर निशा बांगरे से बात की और जाना कि आखिर प्रशासनिक पद से इस्तीफे की क्या वजह रही?अब वे आगे क्या करने वाली हैं, राजनीति में तो हाथ नहीं आजमाने जा रही हैं?
सबसे पहले प्रशासनिक पद से इस्तीफे की वजह…
जिले और शासन के मुखिया और एक माननीय को बताया जिम्मेदार
निशा बांगरे 25 जून काे आमला में हाेने जा रहे अंतरराष्ट्रीय सर्वधर्म शांति सम्मेलन में शामिल होना चाहती थीं। शासन ने सिविल सेवा नियमों के खिलाफ बताते हुए अनुमति नहीं दी। इससे नाराज होकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उनके नए मकान का उद्घाटन भी कार्यक्रम वाले दिन ही है।
सर्वधर्म शांति सम्मेलन में थाईलैंड से तथागत बुद्ध की अस्थियां दर्शन के लिए आमला आने वाली हैं। आयोजन गगन मलिक फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है। इसमें श्रीराम, श्रीकृष्ण, श्रीविष्णु एवं बुद्ध की भूमिका निभाने वाले अभिनेता गगन मलिक, श्रीलंका के न्याय मंत्री सहित 11 देशों के मेहमान आएंगे। कार्यक्रम के संयोजक सुरेश अग्रवाल डिप्टी कलेक्टर बांगरे के पति हैं। अग्रवाल ने बताया सम्मेलन में विश्व शांति पुरस्कार दिए जाएंगे। शिक्षा केंद्र का लोकार्पण भी होगा। इस कार्यक्रम का किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है।
बांगरे का कहना है कि मेरी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। अपने घर के उद्घाटन में शामिल होने के मौलिक अधिकार से रोका जा रहा था, इसलिए मैंने इस्तीफा दिया है। उनके कार्यक्रम को नहीं होने देने के पीछे प्रशासनिक लोग हैं, जो जिले के मुखिया हैं और शासन के मुखिया हैं। एक माननीय हैं, यह उन्हीं का षड्यंत्र है। बहुत सारे प्रयास किए जा रहे हैं। हर दिन हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हर दिन मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। मुझे, मेरे परिवार, मेरी टीम को प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। यह हम बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे।
डिप्टी कलेक्टर और छतरपुर लवकुश नगर एसडीएम निशा बांगरे द्वारा सामान्य प्रशासन प्रमुख सचिव को भेजा गया इस्तीफा। इस पर फिलहाल शासन की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।
पहले मंदिरों में जाने नहीं देते थे, अब घर में जाने से रोक रहे हैं
निशा ने कहा- कार्यक्रम को रोकना प्रशासन और शासन की छोटी मानसिकता है। यह अपने पद और पावर का दुरुपयोग कर रहे हैं। एक अनुसूचित जाति की महिला को सर्वधर्म के कार्यक्रम में जाने से रोक रहे हैं। पहले मंदिरों में नहीं जाने दिया जाता था। आज अपने घर में ही नहीं जाने दिया जा रहा है। यह प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों षड्यंत्र है।
हां, किसी पार्टी ने कहा होगा मैडम को टिकट दिया जाए..
निशा बांगरे को लेकर अक्सर चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जाती रही हैं। इसे लेकर उन्होंने कहा कि मैंने अपनी तरफ से कभी नहीं कहा कि मुझे चुनाव लड़ना है। यह जनता ने कहा होगा। मीडिया के सर्वे में आया होगा। किसी पार्टी की तरफ से यह कहा गया होगा कि मैडम को टिकट दिया जाए। मैंने अपनी तरफ से कभी ऐसा प्रयास ना किया और ना ही ऐसा चाहा है। न ही इस प्रयास से कभी कार्य किया है। राजनीति में जाने का मेरा कोई इरादा नहीं है। इसके लिए मैंने पद से इस्तीफा नहीं दिया है।अंतरराष्ट्रीय सर्वधर्म शांति सम्मेलन में श्रीलंका के न्याय मंत्री सहित 11 देशों के मेहमान आएंगे। कार्यक्रम के संयोजक सुरेश अग्रवाल डिप्टी कलेक्टर बांगरे के पति हैं।
अब इस्तीफा वापस नहीं लूंगी, 25 के बाद सोचूंगी क्या करना है
इस्तीफे की वजह यही रही कि जो मेरा धार्मिक आयोजन मेरे पति और गगन फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है, उसमें मुझे शामिल होने की अनुमति शासन और प्रशासन नहीं दे रहा है। प्रशासन द्वारा इस कार्यक्रम को नहीं होने देने काे लेकर भी षड्यंत्र किए जा रहे हैं। प्रशासन और शासन के इस तानाशाही रवैया से दुखी हूं। सर्वधर्म की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है। इसी से दुखी होकर मैंने इस्तीफा दिया है।
अब मैं अपने इस्तीफे को वापस नहीं लूंगी। इस तरह स्वतंत्रता का हनन हो, मौलिक अधिकारों की आजादी नहीं दी जाए। हम उसका उपयोग नहीं कर सकते तो मैं इस पद के साथ न्याय नहीं कर पाऊंगी। 25 तारीख के बाद सोचेंगे कि आगे क्या करना है, जो भी करेंगे। आज से बेहतर करेंगे, समाज को आज से ज्यादा देंगे।
अब ‘घर-घर अफसर, हर घर अफसर’ मिशन
निशा बांगरे के इस्तीफे के बाद लगाए जा रहे कई कयासों को उन्होंने खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि मेरा उद्देश्य शैक्षणिक है। हमारा मिशन रहा है घर-घर अफसर, हर घर अफसर। यह कार्यक्रम हमारे द्वारा चलाया गया था। गरीब बच्चों को शिक्षा देने के लिए, अच्छा अधिकारी बनाने के लिए, इस तरह के अधिकारी बनाने के लिए जो सर्वधर्म की प्रार्थना को नहीं रोकें, देश में अच्छा संदेश लेकर जाएं, देश में भाईचारा बनाने की भावना के लिए अधिकारी बने, उसी मिशन को चलाना है।निशा बांगरे ने लंबे समय से उनके राजनीति में जाने की अटकलों को विराम दे दिया है। उन्होंने कहा- राजनीति में जाने को कोई इरादा नहीं है।
पहले एक प्रतियोगी की रिक्वेस्ट पर डीएसपी का पद छोड़ा
निशा बांगरे पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहीं। कॉलेज में बेस्ट सोशल वर्कर के अवॉर्ड से नवाजी गईं, जबकि फाइनल ईयर में उन्हें बेस्ट स्टूडेंट का अवॉर्ड मिला। एनसीसी में सी सर्टिफिकेट प्राप्त कैंडिडेट रहीं। स्काउट में उन्हें राज्यपाल द्वारा पुरस्कार से नवाजा गया। मां तुझे प्रणाम योजना में उन्होंने कई यात्राएं कीं। उनके टॉपर रहने का सबसे बड़ा उदाहरण यही रहा कि उन्होंने डीएसपी की परीक्षा और डिप्टी कलेक्टर की परीक्षा एक साथ पास की। एक ही समय में उन्हें दोनों नौकरियों के आदेश प्राप्त हो गए, लेकिन एक प्रतियोगी की रिक्वेस्ट पर उन्होंने डीएसपी का पद छोड़ दिया और डिप्टी कलेक्टर के पद पर ज्वॉइनिंग की।
बालाघाट में जन्मीं, आमला से काफी लगाव, यहीं बसूंगी
यह सवाल अक्सर उठता रहा है कि बालाघाट में जन्म लेने के बावजूद उनका आमला से ऐसा क्या रिश्ता है। उन्होंने बताया कि यहां लोग उन्हें बेहद सरल लगे। यहां के लोगों की वजह से ही वे आमला में बसना चाहती हैं। मैं भी चाहती हूं कि मैं यहीं रहूं। 3 साल की सेवा में बैतूल की जनता ने जो स्नेह दिया, उसी लगाव के कारण वे बैतूल का ही होकर रहना चाहती हैं।
बैंकाक में संविधान की शपथ लेकर शादी
निशा बांगरे की चर्चा डिप्टी कलेक्टर बनने के बाद उनकी शादी को लेकर भी हुई थी। उन्होंने संविधान को साक्षी मानकर अपनी शादी की थी। निशा के पति सुरेश अग्रवाल एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं। दोनों का एक तीन साल का बेटा है। उनके लिए सबसे ऊपर संविधान है। निशा ने इसका सबसे बड़ा उदाहरण पेश किया, जब 2 फरवरी 2019 को उन्होंने बैंकाक में गणतंत्र दिवस के मौके पर अपने दोस्त सुरेश अग्रवाल के साथ संविधान को साक्षी मानकर जीवनभर एक साथ गुजारने का संकल्प लिया। तब वे सुर्खियों में आई थीं।निशा की पहली पोस्टिंग बैतूल जिले में हुई थी। 18 अप्रैल 2018 को उन्होंने बतौर डिप्टी कलेक्टर जॉइन किया था।
मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर से करियर की शुरुआत
निशा बांगरे 2016 बैच की डिप्टी कलेक्टर हैं। वर्तमान में वे छतरपुर जिले के लवकुश नगर की एसडीएम के पद पर पदस्थ हैं। मूलतः बालाघाट जिले के चिखला गांव की रहने वाली निशा बांगरे शिक्षा विभाग में पदस्थ रहे रविंद्र बांगरे की बेटी हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा बालाघाट से प्राप्त की है। 2010 से 2014 तक उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और 2013 में वे एक मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर बन गईं। 2014 से 2016 तक उन्होंने गुरुग्राम की इसी कंपनी में बतौर इंजीनियर अपनी सेवाएं दीं। उसके बाद उसी बीच प्रशासनिक सेवा के लिए एमपीपीएससी की तैयारी करती रहीं।
उन्होंने 2016 में डीएसपी और डिप्टी कलेक्टर दोनों पदों की परीक्षा पास कर ली। उन्होंने प्रशासनिक सेवा को वरीयता देते हुए और डिप्टी कलेक्टर पद पर 2017 में जॉइन कर लिया। उन्हें पहली पोस्टिंग बैतूल जिले में मिली। जहां 18 अप्रैल 2018 को उन्होंने बतौर डिप्टी कलेक्टर जॉइन किया। 3 साल तक वे साल 2021 तक बैतूल में तैनात रहीं, जिसके बाद उनका तबादला कलेक्ट्रेट भोपाल कर दिया गया। नवंबर 2021 से नवंबर 2022 तक वह बतौर डिप्टी कलेक्टर भोपाल में पदस्थ रहीं। नवंबर 2022 में उनका तबादला छतरपुर कर दिया गया, जहां वे लवकुशनगर की एसडीएम बनाई गईं। इस दौरान वे गौरी हार में भी एसडीएम रहीं।
निशा ने सम्मेलन में शामिल होने के लिए अनुमति मांगी थी। शासन ने उन्हें अनुमति नहीं दी। मुलताई एसडीएम ने इसके बारे में उन्हें पत्र लिखकर जानकारी दी।

