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कांग्रेस अब तो मीडिया की आलोचना करना बंद करे

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एस पी मित्तल,अजमेर

महंगाई और बेरोजगारी के विरोध में कांग्रेस ने 5 अगस्त को जो देशव्यापी प्रदर्शन किया, उसकी खबरें 6 अगस्त को सभी दैनिक अखबारों में प्रथम पृष्ठ पर छपी हैं। फोटो भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लेने वाले छपे हैं। 5 अगस्त को भी न्यूज चैनलों पर कांग्रेस के प्रदर्शन के समाचार ही प्रसारित होते रहे। यानी कांग्रेस के प्रदर्शन को दिखाने में मीडिया ने कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन इसके बावजूद भी कांग्रेस के नेता आरोप लगाते हैं कि मीडिया मोदी सरकार के दबाव में है, इसलिए कांग्रेस की खबरें नहीं दिखाई जाती। कांग्रेस का यह आरोप कितना सच है यह देशवासियों ने कांग्रेस के प्रदर्शन को मिले कवरेज में देख लिया है। 5 अगस्त को अनेक दर्शकों की प्रतिक्रिया थी कि टीवी चैनलों के पास कांग्रेस की खबर के अलावा क्या और खबर नहीं है? राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर एक चैनल ने तीन तीन चार चार कैमरे लगा रखे थे। प्रियंका गांधी जब बीच सड़क पर बैठ गईं तो न्यूज चैनलों के लिए यही सबसे बड़ी खबर हो गई। मीडिया, कांग्रेस को कितना भी प्रचारित करे, लेकिन मीडिया, चुनाव में कांग्रेस को वोट नहीं दिलवा सकता है। वोट तो कांग्रेस को अपने कार्यों और नीतियों से ही मिलेंगे। मीडिया को कोसने के बजाए कांग्रेस को यह पता लगाना चाहिए कि आखिर जनता उसे वोट क्यों नहीं दे रही है? देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है। हर पांच साल में केंद्र और राज्य सरकारों के लिए चुनाव होते हैं। इसी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत कांग्रेस ने देश पर 60 वर्षों तक शासन किया। तब विपक्ष ने कभी नहीं कहा कि मीडिया कांग्रेस के दबाव में है। उल्टे 1975 में आपातकाल लगाकर कांग्रेस ने पत्रकारों और संपादकों को भी जेल में डाल दिया था। कांग्रेस ने ही अखबारों पर सेंसरशिप लागू की थी। तब न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया का इतना चलन नहीं था। कांग्रेस को अब लोकतंत्र भी खतरे में नजर आता है, जबकि पश्चिम बंगाल, पंजाब, उड़ीसा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि राज्यों में गेर भाजपाई सरकारें हैं। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में तो कांग्रेस की ही सरकारें हैं। लोकतंत्र है, इसीलिए तो लोकसभा में 545 में से कांग्रेस के मात्र 52 सांसद हैं। भाजपा अक्सर कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप लगाती है, लेकिन कांग्रेस को अपनी तुष्टीकरण की नीति का फायदा भी नहीं मिल रहा है। असल में अल्पसंख्यकों के वोट भी कांग्रेस से छिटक गए हैं। यूपी में अखिलेश यादव, बंगाल में ममता बनर्जी दिल्ली में अरविंद केजरीवाल, आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी, तेलंगाना में चंद्रशेखर राव ने अल्पसंख्यकों के वोट कांग्रेस से छीन लिए हैं। कांग्रेस की तुष्टीकरण की नीति से हिन्दुओं का भरोसा पहले ही कम है। कांग्रेस को अब ऐसी नीति बनानी होगी, जिससे चुनाव में वोट मिल सके। मीडिया को कोसने से कुछ नहीं होगा। 

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