नई दिल्ली: एनसीईआरटी ने कक्षा 3 से 12 तक के छात्रों के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित दो नए विशेष चैप्टर्स जारी किए हैं. यह केवल सैन्य कार्रवाई की कहानी नहीं, बल्कि शांति की रक्षा और पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के सम्मान का प्रतीक बताया गया है. ये पाठ पूरक सामग्री के तौर पर शामिल किए गए हैं और मई 2025 के उस ऐतिहासिक अभियान की जानकारी देते हैं, जब भारत ने पाकिस्तान और पीओके स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर हवाई और मिसाइल हमले किए थे. सेना ने सात आतंकी कैंप तबाह किए, जबकि वायुसेना ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय मुरीदके और बहावलपुर को निशाना बनाया.
नागरिकों की सुरक्षा पर जोर
पाठों में खास तौर पर यह उल्लेख है कि भारत ने केवल आतंकी ठिकानों को ही निशाना बनाया और नागरिकों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा. हर लक्ष्य को दो बार जांचा गया. इससे संदेश गया कि भारत आतंकवादियों को सजा से बचने नहीं देगा.
छोटे बच्चों के लिए वीरता, बड़े छात्रों के लिए रणनीति
कक्षा 3 से 8 तक के लिए तैयार मॉड्यूल का शीर्षक है ‘ऑपरेशन सिंदूर – वीरता की गाथा’, जबकि 9 से 12 तक के छात्रों के लिए यह है ‘ऑपरेशन सिंदूर – सम्मान और वीरता का मिशन’. इनका उद्देश्य बच्चों को भारत की सैन्य क्षमता और सुरक्षा रणनीति से अवगत कराना है.
बहादुरी, रणनीति और नवाचार की मिसाल
पाठ्यक्रम में बताया गया है कि कैसे भारत की वायु रक्षा प्रणाली एस-400 ने दुश्मन विमानों और ड्रोन को मार गिराया. इसे बहादुरी, रणनीति और तकनीकी नवाचार की जीत बताया गया.
देशभर में गूंजा असर
कक्षा 9 से 12 के लिए तैयार सामग्री में यह भी दर्ज है कि हैदराबाद, लखनऊ और भोपाल में मुस्लिम समुदाय ने काली पट्टी बांधकर हमले की निंदा की. कश्मीर में दुकानदारों ने दुकानें बंद कीं, जबकि सीमा से सटे गांवों ने सशस्त्र बलों के समर्थन में आवाज बुलंद की.
भारत का पुराना संकल्प
पाठों में भारत के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा गया है कि 1947, 1965, 1971 और 1999 में भी भारत ने कड़ा जवाब दिया. ऑपरेशन सिंदूर उसी परंपरा की कड़ी है, जिसमें जैश, लश्कर, हिजबुल और आईएसआई द्वारा संचालित आतंकवाद को चुनौती दी गई.

