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शिव सरकार के लिए अब धान मिलर्स मुसीबत बन गए हैं

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भोपाल। मध्य प्रदेश की शिव सरकार के लिए अब धान मिलर्स मुसीबत बन गए हैं। वे अपनी जिद छोड़ने को तैयार नही हैं, तो सरकार भी अपनी जिद पर अड़ी हुई है। इसकी वजह से प्रदेश में अब तक धान से चावल निकालने का काम शुरू नहीं हो पाया है। इसकी वजह से सरकार को दोहरी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।
पहला सरकार केन्द्रीय पूल में अपने हिस्से का चावल नहीं दे पा रहा है दूसरा धान नहीं उठने की वजह से गेहूं खरीदी के इस मौसम में गोदाम खाली नहीं हो पा रहे हैं। दरअसल मिलर्स और सरकार के बीच कई दौर की बात हो चुकी है, लेकिन कोई फैसला नहीं हो पाया है। इस बीच अब सरकार ने तय किया है कि अगर मिलर्स अपनी जिद नहीं छोड़ते हैं तो बाहरी मिलर्स को बुलाकर धान से चावल निकालने का काम सौंप दिया जाएगा। उधर सरकार ने प्रदेश के मिलर्स की परेशानी को देखते हुए धान मिलिंग के भाव दोगुना करने के साथ ही अन्य तरह के दामों में भी वृद्धि कर दी है। इसके बाद भी मिलर्स अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। बाहरी मिलर्स को बुलाने के लिए कैबिनेट की उप कमेटी की बैठक में इसको लेकर फैसला कर लिया गया है। इस कमेटी का गठन खरीफ वर्ष 2020 -21 में धान उपार्जन एवं निस्तारण के लिए किया गया था। समिति की बैठक में सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया ने कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में 100 एवं 200 की वृद्धि व्यवहारिक रुप से बहुत अधिक है। अब इसके लिए दूसरे राज्यों के मिलर्स को बुलाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जहां तक टूटन का प्रश्न है तो टूटन अन्य राज्यों में भी होती है। इसके बाद भी इस तरह के दबाव बनाना ठीक नहीं है।
सरकार यह उठा चुकी है कदम
प्रदेश के धान मिलर्स को प्रोत्साहित करने के लिए इस बीच राज्य सरकार द्वारा कई तरह के कदम उठाए जा चुके हैं। इसमें समय सीमा में धान उपार्जन के दौरान मिलिंग शुरू करने के लिए नई नीति बनाकर प्रोत्साहन राशि को दोगुना कर दिया गया है। यही नहीं प्रतिभूति राशि को भी 60 से 70 फीसदी कर दिया गया है। इसी तरह से मिलर्स के लिए परिवहन की दरें भी तय कर दी गई हैं। धान की लोडिंग अनलोडिंग करने के लिए भी नई दर जारी की गई हैं। खास बात यह है कि अन्य राज्यों में मिलर्स को प्रोत्साहन राशि में क्रमश: उत्तर प्रदेश में 20 प्रति क्विंटल, छत्तीसगढ़ में 18 से 20 रुपए अरवा और उसना चावल के लिए 20 से 45 प्रति क्विंटल, जबकि आंध्र प्रदेश में सारटेक्स चावल के लिए 60 एवं अच्छे चावल के लिए 50 प्रति क्विंटल इधर से प्रोत्साहन राशि दी जाती है। जबकि मप्र में अभी कुछ दिन पहले ही यह राशि 25 रुपए से बढ़ाकर 50 रुपए की जा चुकी है।  
राशि का भी संकट
दरअसल प्रदेश से बड़ी मात्रा में चावल सेन्ट्रल पूल में दिया जाता है। इसके एवज में ही सरकारों द्वारा समर्थन मूल्य पर धान का उपार्जन किया जाता है। जब चावल की सप्लाई हो जाती है तो उसके एवज में धान खरीदी का पैसा केन्द्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को भुगतान कर दिया जाता है। ऐसे में अगर जब चावल की सप्लाई ही नहीं की जाएगी तो केन्द्र से मिलने वाली राशि भी नहीं मिलेगी। इस वजह से पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रही प्रदेश सरकार के सामने राशि का बड़ा संकट बना हुआ है।

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