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अब पुलिस कर रही है राजस्थान हाईकोर्ट के फर्जी आदेश की जांच

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अदालत में सुनवाई ही नहीं हुई, लेकिन हाईकोर्ट की सील लगा आदेश जारी हो गया। इससे हाईकोर्ट में भी खलबली है। 
याचिकाकर्ताओं के बयान भी जांच में शामिल हो एडवोकेट एके जैन

राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ के न्यायाधीश महेन्द्र गोयल की अदालत में रिट याचिकाओं पर सुनवाई ही नहीं हुई, लेकिन संबंधित पक्षकारों के पास हाईकोर्ट की सील लगा आदेश पहुंच गया। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार प्रवीण कुमार मिश्रा की शिकायत पर अब जयपुर के अशोक नगर थाने के सीआई सुरेन्द्र कुमार जांच कर रहे हैं। चूंकि यह मामला सीधे हाईकोर्ट से जुड़ा है, इसलिए जांच का काम बेहद सतर्कता के साथ हो रहा है।

रजिस्ट्रार ने गत 16 जून को जो एफआईआर दर्ज करवाई है, उसमें बताया गया है कि विनोद कुमार, जबर सिंह, महेन्द्री, संजीव कुमार, मनेश, सुरेन्द्र, वीरेश आदि पक्षकारों का विवाद राजस्थान सरकार के साथ चल रहा है। इसको लेकर कई रिट याचिकाएं विचाराधीन है। लेकिन गत 14 जून 2021 को हाईकोर्ट के निजी सचिव दलपत सिंह के मोबाइल नम्बर 9413158130 पर एडवोकेट अरविंद भादू ने अपने वाट्सएप मोबाइल नम्बर 9079817636 से हाईकोर्ट के 1 अप्रैल 2021 के आदेश की प्रति भेजी। ये आदेश उक्त संबंधित पक्षकारों की याचिकाओं से जुड़ा है। दलपत सिंह सोलंकी की सूचना के आधार पर हाईकोर्ट में गहनता के साथ जांच की गई तो पता चला कि 1 अप्रैल को संबंधित रिट याचिकाएं हाईकोर्ट में सूचीबद्ध ही नहीं हुई और न ही सुनवाई हुई। ऐसे में कोर्ट से कोई आदेश पारित ही नहीं हुआ। एफआईआर में कहा गया कि हाईकोर्ट का तथाकथित आदेश कूटरचित और फर्जी है। हाईकोर्ट की इस शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120बी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। अशोक नगर के थानाधिकारी सुरेन्द्र कुमार ने जांच की पुष्टि करते हुए  बताया कि इस मामले में एडवोकेट अरविंद भादू से जानकारी ली गई है कि भादू ने ही तथाकथित आदेश को वाट्सएप पर भेजा था। अब कड़ी से कड़ी मिलाई जा रही है ताकि फर्जी आदेश बनाने वाले तक पहुंचा जाए। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से जुड़ा यह मामला गंभीर है।

जांच में संबंधित याचिकाओं से जुड़े व्यक्तियों को लेकर हाईकोर्ट की जयपुर पीठ का माहौल गर्म है। हाईकोर्ट में बहुत सक कार्य विश्वास के साथ होते हैं। बार और बेंच एक दूसरे पर भरोसा करते हैं। कई बार मौखिक बात को भी महत्व दिया जाता है। याचिका कर्ताओं के बयान भी जांच में शामिल हो:हाईकोर्ट के मशहूर वकील एके जैन ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है। यदि हाईकोर्ट के आदेश ही फर्जी होने लगेंगे तो फिर आम जनता का भरोसा न्याय व्यवस्था से उठ जाएगा। जैन ने कहा कि इस मामले की जांच में संबंधित रिट याचिकाओं से जुड़े व्यक्तियों के बयान भी शामिल होने चाहिए। आखिर पक्षकारों के पास हाईकोर्ट का फर्जी आदेश कहां से आया? पुलिस की जांच अपनी जगह है, लेकिन मुख्य न्यायाधीश को अपने स्तर पर भी उच्च स्तरीय जांच करवानी चाहिए। आखिर यह मुद्दा हाईकोर्ट की प्रतिष्ठा से जुड़ा है। पुलिस में जो रिपोर्ट दर्ज करवाई है, वह एकतरफा है। पुलिस को रिट याचिकाओं के पक्षकारों  के बयान दर्ज कर जांच करनी चाहिए। यदि याचिकाकर्ताओं के बयान दर्ज नहीं होते हैं तो ऐसी जांच कोई मायने नहीं रखती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार याचिकाकर्ताओं ने भी नोएडा (यूपी) के पुलिस आयुक्त को एक शिकायत दी है। इस शिकायत में राजस्थान हाईकोर्ट के तथाकथित आदेश के बारे में जानकारी दी गई है। शिकायत में गंभीर आरोप भी लगाए गए है। इस शिकायत से प्रतीत होता है कि यह मामला सिर्फ फर्जी आदेश तक ही सीमित नहीं है।

 S.P.MITTAL

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