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*उत्तर प्रदेश की सियासत गरमायी,एबीवीपी के छात्रों की पिटाई, ओम प्रकाश राजभर पर भी मुसीबत आई!*

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लखनऊः उत्तर प्रदेश में इस वक्त छात्रों की पिटाई को लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है. ये छात्र कोई आम छात्र नहीं थे. बल्कि ये छात्र थे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के. यूपी में एबीवीपी के छात्रों का पीट जाना बड़ी घटना हो गई है. उससे बड़ी बात यह हो गई है कि यूपी सरकार में मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने इन छात्रों को गुंडा कह दिया. जिसको लेकर एबीवीपी के छात्रों ने पूरे प्रदेश भर में ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. बीते गुरुवार को जगह-जगह ओम प्रकाश राजभर का एबीवीपी के छात्रों ने पुतला फूंका. साथ ही माफी मांगने को लेकर अल्टीमेटम भी दे दिया है.

यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रदर्शन से शुरू हुआ मामला
दरअसल, पूरा मामला शुरू होता है राजधानी लखनऊ के बगल वाले जिले बाराबंकी में स्थित श्री रामस्वरूप यूनिवर्सिटी के गेट के सामने प्रदर्शन को लेकर. यूनिवर्सिटी पर एबीवीवी के छात्रों का कहना था कि यहां लॉ की मान्यता नहीं है, लेकिन फिर भी छात्र-छात्राओं को लॉ पढ़ाया जा रहा है. एबीवीपी के छात्रों को लगा कि सरकार अपनी है. फिर ज्यादा परेशानी नहीं होगी. लेकिन यूनिवर्सिटी के गेट के सामने इस कदर उनकी पिटाई हुई की जैसे पुलिस की लाठी इनका वर्षों से इंतजार कर रही थी.

विपक्षी पार्टियों के छात्र विंग के नेताओं ने की मुलाकात
एबीवीपी के छात्रों की पिटाई की खबर आते ही तहलका मच गया. अगले दिन योगी आदित्यनाथ ने सीओ को हटाने का निर्देश दे दिया. साथ ही उन सभी पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी, जो वीडियो में छात्रों की पिटाई करते हुए नजर आ रहे थे. एबीवीपी के छात्रों की पिटाई की खबर सुनने के बाद विपक्षी पार्टियों के भी छात्र विंग के नेता अस्पताल पहुंचकर हाल-चाल जानना शुरू कर दिए, जिसमें सपा का छात्र विंग के साथ-साथ कांग्रेस की छात्र विंग एनएसयूआई के भी छात्र नेता अस्पताल पहुंचे. यह कहने में बिल्कुल गुरेज नहीं करना चाहिए की पुलिस की इस लाठी की आवाज दिल्ली तक सुनाई दी है. क्योंकि संगठन के नेताओं की दखलंदाजी शुरू हो गई है.

छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद राम स्वरूप यूनिवर्सिटी पर एक्शन, धोखाधड़ी का मामला दर्ज

बाराबंकी के श्री राम स्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय में ABVP छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद अब एक्शन शुरू हो गया है. राम स्वरूप  यूनिवर्सिटी पर धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में बुधवार को मुकदमा दर्ज किया गया है. एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है. यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के तहत की गई है.

उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा आयोग के अतिरिक्त सचिव दिनेश कुमार ने शिकायत दर्ज की, जिसमें कहा गया कि विश्वविद्यालय ने 2023-24 और 2024-25 के शैक्षणिक सत्र में लॉ कोर्स के लिए बगैर मान्यता प्राप किए छात्रों को दाखिला दिया और उनकी परीक्षाएं भी कराईं. आयोग का कहना है कि यह छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और नियमों का उल्लंघन है. इसके बाद बाराबंकी शहर थाने में केस दर्ज हुआ.

यह कार्रवाई एक सितंबर को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) समेत छात्रों के विश्वविद्यालय के खिलाफ प्रदर्शन के बाद हुई. प्रदर्शन के बाद अयोध्या संभागीय आयुक्त की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कदम उठाया गया. छात्रों ने आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय गलत तरीके से काम कर रहा है.

आगे की स्थिति

अब पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. लोगों को उम्मीद है कि जांच से सच्चाई सामने आएगी और छात्रों के हक की रक्षा होगी. यह मामला शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

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