बहुजन संवाद फेसबुक लाइव के माध्यम से किए जा रहे कार्यक्रम को आज एक साल पूरा हो रहा हैं। इस अवसर पर बहुजन संवाद के संचालक मंडल द्वारा बहुजन संवाद की पहली वर्षगाँठ जूम वेबिनार के माध्यम से मनाई। वेबिनार को संबोधित करते हुए बहुजन संवाद के संचालक मंडल के सदस्य डॉ सुनीलम ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते सरकार द्वारा अचानक लॉकडाउन कर दिए जाने के बाद सीमित साथियों के साथ संवाद केवल फोन तथा सोशल मीडिया पर ही संभव हो पा रहा था। सरकार द्वारा अचानक लॉकडाउन लगाने से प्रवासी श्रमिकों के सामने रोजगार, यातायात तथा राशन की समस्या पैदा हो गई ।
अतिथि श्रमिकों के समर्थन में ऑनलाइन कार्यक्रम तथा देश भर के साथियों ने मिलकर उनकी निशुल्क घर वापसी, हर माह दस हजार रुपये मदद दिए जाने आदि मुद्दों को लेकर राष्ट्रव्यापी विरोध करना तथा ऑनलाइन जूम बैठकें करना शुरू किया गया था। किसान विरोधी अध्यादेश का विरोध तथा 44 श्रम कानूनों को खत्म कर लेबर कोड लागू करने को लेकर धीरे-धीरे कार्यक्रम शुरू होने लगे। उन कार्यक्रमों की जानकारी अधिकतम लोगों तक कैसे पहुंचाई जाए इसका समाधान खोजने के लिए फेसबुक स्ट्रीम पर लिंक जनरेट कर उससे फेसबुक लाइव करने का विचार किया । तब समाजवादी आंदोलन के 85 वर्ष पूर्ण होने पर फेसबुक स्ट्रीम से फेसबुक लाइव किया गया। जिसका परिणाम काफी उत्साह जनक रहा। इसी तरह प्रवासी श्रमिकों, किसान विरोधी अध्यादेशों और श्रमिकों के श्रम कानूनों को लेकर प्रयास शुरू किए गए।
उन्होंने बताया कि सभी साथियों ने तय किया कि अपने पुराने साथियों के साथ इस दिशा में प्रयास किए जाए। संगठन का नाम बहुजन संवाद तय हुआ। आठ्या जी ने लिंक जनरेट करने और पोस्टर बनाने की जिम्मेदारी ली। पहले कुछ दिनों तक अनौपचारिक कार्यक्रम चले उसके बाद शाम 6 बजे का समय तय कर वक्ताओं को बुलाकर कार्यक्रम नियमित शुरू हो गए। संचालक मंडल के टीआर आठ्या ने बताया कि उन्होंने और जबर सिंह वर्मा ने वक्ताओं से संपर्क करने और डॉ सुनीलम जी ने विषय संबंधी सुझाव देने का काम किया। । इस बीच डॉ लता प्रतिभा मधुकर जी को एक-दो बार सुनने के बाद उनसे संपर्क किया तथा उनके सामने बहुजन संवाद से जुड़े प्रस्ताव रखें,जिसे उन्होंने स्वीकार किया। लता जी के बहुजन संवाद से जुड़कर संवाद के बौद्धिक स्तर, गहराई, संपर्कों को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिली।
इस तरह बहुजन संवाद का आज एक वर्ष पूरा हो रहा है। गत 365 दिनों में लगभग 1500 से अधिक वक्ताओं को आमंत्रित किया गया। इस बीच गांधी-अंबेडकर संवाद, गांधी- लोहिया -जयप्रकाश संवाद, संविधान और मानव अधिकारों को लेकर कार्यक्रमों की लंबी श्रृखंला आयोजित की गई। लोकसंघर्ष मोर्चा कि अध्यक्षा प्रतिभा शिदे ने बहुजन संवाद के माध्यम से हो रहे वैचारिक प्रबोधन की सराहना की। रेफरन्स के लिए कई बार बहुजन संवाद के पुराने वीडियो मै देखती हूं, यह बड़े अभिमान से बताया। प्रख्यात विचारवंत तथा साहित्यकार नागेश चौधरी ने कहा, बहुजन संवाद ने दबे कुचले लोगों की, आवाज बनकर उन्हें अंधश्रद्धाओं के चंगुल से बाहर निकालने की भरसक कोशिश की। जाति,दहेज जैसी प्रथा नहीं है। जाति व्यवस्था है यही भारत की असल समस्या है। गोलवलकर ने चातुर्वर्ण्य और जाति व्यवस्था ही हिंदू राष्ट्र है यह लिखा है। बाबा साहब अंबेडकर जी ने कहा था कि जब तक जाती निर्मूलन होंगा नहीं तब तक हम राष्ट्र नहीं बना सकते, इस बात को रेखांकित किया। बलीराजा बृहदरथ को मार कर और शिवशाही क़ो खत्म कर ,पेशवाई लाना यह क्रांती के बाद प्रति क्रांति ही है। सत्यशोधक शेतकरी सभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तथा बहुजन संवाद के साथी प्रशांत सोनवणे ने कहा आज अभिव्यक्ति स्वतंत्रता पर चारों तरफ से खतरा मंडरा रहा है और अपने हक अधिकार की बात करने वालों को यदि वह आदिवासी है तो नक्सलवादी, मुस्लिम है तो आतंकवादी और व्यवस्था के खिलाफ बोलने वाले को राष्ट्र द्रोही कहां जा रहा है ऐसे भय आतंक और खौफ के माहौल में बहुजन संवाद ने, संवेदनहीन और संवादहीन सत्ताधीशों के खिलाफ अपना मोर्चा खोला है। दुखी पीड़ित वंचित, शोषित दबे- कुचले हाशिए के लोगों की आवाज बन कर बहुजन संवाद निरंतर आगे बढ़ रहा है।बहुजन संवाद के माध्यम से क्रांतिकारी विचार दलित आदिवासी विमुक्त घुमंतू और तमाम वंचित तबकों तक पहुंचाने का एलान किया और आने वाले कल में हमें ट्रोल आर्मी का भी सामना करना पड़ेगा। मशहूर लोक शाहिर संभाजी दादा भगत ने असल संघर्ष सांस्कृतिक संघर्ष है यह बता कर सांस्कृतिक आंदोलन को लोकशाही और संविधान बचाने हेतु व्यवस्था परिवर्तन का कारगर हथियार बताया।
एक्टिविस्ट पत्रकार रामस्वरूप मंत्री जी ने कहा लोकतंत्र को जो नहीं मानते, वही संवादीनता द्वारा लोगों की आवाज को दबाकर रखते हैं, इन मानव विरोधीतत्वों के खिलाफ बहुजनों की एकजुटता पर उन्होने ध्यान केंद्रित करने को कहा। श्री राम सेन जी ने अपने सुझाव स्वरूप कहा बहुजन समाज ने बुनियादी मुद्दों पर ध्यान देकर ,अंधश्रद्धाओं और महिलाओं के शोषण को दूर करने के लिए पहल की है। स्वराज अभियान के ज्येष्ठ कार्यकर्ता ललित बाबरजी ने सुझाव दिए कि आज सत्ताधारी शोषणकारी व्यवस्था एससी ,एसटी ,ओबीसी कैटेगरी में एक जाति को दूसरे जाति से लड़ा रही है और उनका इस्तेमाल कर तोड़ों और फोड़ों की कुटिल राजनीति द्वारा राज कर रही है। इसलिए सभी बहुजनों के बीच जाति अंतर्गत एक आंतरिक संवाद की जरूरत है, जिसे बहुजन संवाद ने बखूबी से पूरा करने की कोशिश की। उदारीकरण और नीजिकरण द्वारा संवैधानिक आरक्षण को भी खत्म किया जा रहा है। मुंबई से गुड्डी जी ने कहां कि मुश्किल दौर में भी बहुजन संवाद ने पिछले 1 साल में यहां तक का,अपना सफर तय किया और इसके द्वारा परिवर्तन को भी वह आगे ले जाएंगे। ऐसा विश्वास व्यक्तकर उन्होंने सुझाव दिया कि देश में 72% लोग सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं ,जिसमें यूट्यूब और फेसबुक सबसे ज्यादा देखा जाता है और सुना जाता है लेकिन कुल मिलाकर लोगों की सुनने की क्षमता बहुत कम हो चुकी है ,इसलिए समय सीमा को भी ध्यान में रखा जाए ।और जिस विषय पर चर्चा होने जा रही है उसकी जानकारी जितनी जल्दी हो सकें वक्ताओं तक पहुंचाई जाएं। अभिनय श्रीवास जी ने कहा 4000 नौकरियों के लिए 40 लाख लोगों के आवेदन आते हैं। लेकिन आंदोलन में केवल 40 लोग आते हैं। इसलिए लोगों के मस्तिष्क को बदलने के लिए बहुजन संवाद बुलंद आवाज में काम कर रहा है। केरला के सामाजिक कार्यकर्ता सईदा वारसी और जुनैद केपपानी ने कहा बहुजन संवाद देश और दुनिया की यथार्थ जानकारी अपने दर्शकों को देकर उनकी एक दृष्टि निर्माण का काम कर रहा हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एड.आराधना भार्गव ने कहां कि जो भी कोरोना से बाधित हो, वह हमसे संपर्क करें। हम लोग उनका इलाज अमेरिका के 5 नामचीन डॉक्टरों से कराएंगे । उन्होंने छिंदवाड़ा के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र पातालकोट का जिक्र करते हुए बताया की, निसर्ग के साथ खुली हवा में रहने वाले आदिवासियों में करोना का संक्रमण नहीं हो पाया। हम सिकलसेल बीमारी का भी इलाज करते हैं। हम अपने हक अधिकार की बात करते हैं, इसलिए उनके दृष्टि में हम राष्ट्रदोही है और बहुजन संवाद प्रबोधन के द्वारा ,नई दृष्टि निर्माण का काम कर रहा है।
छायाताई खोब्रागड़े ने कहां परिवर्तन सतही स्तर पर नहीं ,तो इंसान के दिलों दिमाग में, होना चाहिए और परिवर्तन की प्रेरणा भी इंसान के अंदर से आना चाहिए और यह परिवर्तन किस तरह से लोगों तक पहुंचे, इसके लिए बहुजन संवाद ने दोनों तरफ से संवाद की जो पहल की है , उसकी वजह से दर्शक को उन पर कोई बात थोपी जा रही है यह भावना नहीं आती और जब तक वैचारिक परिवर्तन नहीं होता तब तक सामाजिक बदलाव भी नहीं हो सकता है।अमेरिका में ट्रम्प का डर लोगों के बीच से निकल चुका है, उसी तरह से ही भारत के लोगों के दिलो दिमाग से डर निकालना जरूरी है । लोगों को संविधान तथा लोकशाही का मतलब क्या होता है और इन व्यवस्थाओं को कैसे खत्म किया जा रहा है इसके लिए संविधान जागर जैसे कार्यक्रम बहुजन संवाद ने आयोजित किए इसकी छाया जी ने काफी सराहना की तथा सुझाव दिया की युवा संवाद में विद्यार्थी मंच का अलग से फोरम तैयार करना चाहिए क्योंकि विद्यार्थी ही भांडवली शिक्षा नीति के, सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। लोहिया जी पिछड़ा पावे 100 में 60 की बात करते थे लोकनायक, जेपीजी भी, जाति व्यवस्था खत्म करने की बात करते थे । शांति प्रस्थापीत करने के लिए हमें वर्ग संघर्ष कर सर्वसमावेशक होना पड़ेगा ऐसा सुझाव उन्होंने दीया। सविता शिंदे ने आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हो रहे हल्ले की घोर निंदा की और बहुजन संवाद की पहल को इस काल में प्रासंगिक बताया। नीव संस्था की पंखुरी किरण प्रकाश ने सुझाव दिया कि आज अभिव्यक्ति पर लगातार हमले हो रहे है और कई यूट्यूब चैनल और फेसबुक के अकाउंट बंद कर दिए गए हैं ।जो अपने हक अधिकार की बात करते थे उन पर ताला लगाया जा रहा है। ऐसे कठिन समय में हमें जमीनी तौर पर भी काम करना होगा। जो कि हम बहुजन संवाद केंद्र द्वारा एक नई ऊर्जा के साथ जरूर करेंगे। इंदौर के बुजुर्ग दर्शक चिंतक केसर सिंह चिड़ार जी का सुझाव था कि बहुजन समाज द्वारा समाज के हर स्तर और जीवन के हर पहलू को छूकर, जन जागरण करने की कोशिश ,काबिले तारीफ है । इस वजह से उसे कम समय में हजारों की संख्या में दर्शक भी प्राप्त हुए हैं। और समान विचारधारा के लोगों से एकसाथ जुड़ने से, एक सुखद एहसास मन में उभरता है। इस तरह से बहुजन संवाद अब एक कारवां बन चुका है और इस क्रांति को आम आदमी तक पहुंचाने के लिए विभिन्न विषयों के विद्वान लोगों के विचार को आत्मसात करने की जरूरत है।
दर्शक से बहुजन संवाद की वक्ता और परिवर्तन की साथी बन चुकी निशा पार्चे ने कहा बहुजन संवाद ने ,जो फ्रंटलाइन के वाल्मीकि समाज के, सफाई कर्मचारियों की आपबीती उनकी समस्याओं को लेकर हमें जो जगह दी और हमारी समस्याओं को सुलझाने का काम किया इसलिए आज पूरे समाज में चर्चा शुरू हो चुकी है ।यदि भारत में संविधान लागू है तो पुरुषसत्ताक जात पंचायतों की क्या जरूरत है। कुलदीप पहाड़े ने सुझाव दिया कि हम लोगों की मानसिकता का ख्याल रखकर, वक्ताओं के छोटे-छोटे वीडियो भी एडिट कर डाला करें। बहुजन संवाद में बहु आयामी संवाद द्वारा देश की सभी विविधताओं को अपने में समेट कर सही इतिहास सामने लाया। इतिहास की ढेर सारी घटनाएं है जिसे छुपाया गया है ।गंभीरता से प्रबुद्ध वक्ताओं द्वारा हमें हर समस्या की जड़ तक जाने की कोशिश करना चाहिए और इसका विस्तार करने के लिए नए संकल्प पर, नई इच्छाशक्ति के साथ मजबूती से आगे बढ़े। बहुजन संवाद से जुड़ने के बाद ही डॉ बाबा अंबेडकर ,महात्मा फुले , गांधीजी और पेरियार के विचार एक साथ सुनकर मुझमें लिखने की प्रेरणा जागृत हुई और मैं लेखक और पत्रकार बन गया। बहुजन संवाद से प्रेरणा लेकर ही, मैं आज हमदर्द वेब न्यूज़ पोर्टल चलाता हूं। जनता का आईना न्यूज़ चैनल के पत्रकार शकील अहमद ने बहुजन शब्द की व्याख्या समझने की कोशिश कर, बहुजन मुक्ति के संघर्ष की लड़ाई में, हर मदद के लिए आश्वस्त किया। वेबिनार में शामिल सभी साथियों ने बहुजन संवाद में राजनीतिक दृष्टिकोण पर चर्चा में शामिल वक्ताओं के छोटे वीडियो यूट्यूब पर अपलोड करना, ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं पर चर्चा , फूले ,गांधी -अंबेडकर-पेरियार की विचारधारा पर चर्चा, सामाजिक परिवर्तनों पर चर्चा , लोकतंत्र पर चर्चा, विद्यार्थी मंच बनाने पर चर्चा , लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई लड़ने के लिए, विभिन्न विषयों के प्रबुद्ध नागरिकों को चर्चा में शामिल करने के सुझाव दिए।
ऑनलाइन मिटिंग में किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष पूर्व विधायक डॉ सुनीलम, रायसेन से टी आर आठ्या, लता प्रतिभा मधुकर, प्रशांत सोनोने, सविता शिंदे, रामस्वरूप मंत्री,श्री राम सेन, ललित बाबर संभाजी भगत, भार्गव चंदोला, गुड्डी जी, अभिनव श्रीवास, जुनेद कैपपानी, एड. आराधना भार्गव, छाया खोब्रागड़े, रजिया पटेल, नागेश चौधरी, पंखुरी किरण प्रकाश, शकील भाई, सिकंदर, महेंद्र सिंह बघेल, दिलीप पाटीदार, केसर सिंह चराड़ निशा पारचे, कुलदीप पहाड़े, जबर सिंह वर्मा, प्रतिभा शिंदे,राजेश पटेल, भागवत परिहार, बेनेडिक्ट डामोर, सुभाष लोमटे आदि शामिल हुए।इस कार्यक्रम का दृक् श्रव्य संचालन तुलाराम आठ्या ने किया।

