अग्नि आलोक

एक तरफ बेघर लोग रोती आंखे भूखे पेट, दूसरी तरफ जश्न सियासत का

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इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले, ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले। जनाब नादिम नदीम का लिखा ये अशआर सियासतदानों की सियासतपरस्ती पर लिखा गया है। इस वक्त असम राज्य की चर्चा जिस वजह से होनी चाहिए वो तो नदारद हैं मगर सियासी खेमे की चर्चा हर जुबां पर है। महाराष्ट्र में सत्ता की कुर्सी हथियाने के लिए सारे दांव पेंच आजमाएं जा रहे हैं। शिवसेना से बागी नेता एकनाथ शिंदे 40 से ज्यादा विधायकों के साथ असम की राजधानी गुवाहटी के एक पांच सितारा होटल में बैठे हैं। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे अपने विधायकों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं। इन सबके बीच मर रहे हैं असम के आम नागरिक मगर इसकी कोई चर्चा नहीं। 

तस्वीर ही काफी है समझने को…

महाराष्ट्र में सत्ता की कुर्सी हथियाने के लिए सारे दांव पेंच आजमाएं जा रहे हैं। शिवसेना से बागी नेता एकनाथ शिंदे 40 से ज्यादा विधायकों के साथ असम की राजधानी गुवाहटी के एक पांच सितारा होटल में बैठे हैं।

अपने घरों से बेघर हुए लोग

असम में सेना से मोर्चा संभाला है। सेना लोगों की जान बचाने के लिए कमर तक पानी में घंटों घुसे हुए हैं। एक तस्वीर उस पांच सितारा होटल की जहां पर कुर्सी की जद्दोजहद चल रही है और एक तस्वीर उसी प्रदेश की जहां पर लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। असम में खाने-पीने के लाले पड़े हुए हैं। वहां के आम लोग बेबसी के आंसू रो रहे हैं।

शहर बन गए टापू

एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार असम के उडियाना गांव की रहने वाली 28 साल की हुसना बेगम रोते हुए बोलती हैं, “हमारा घर पानी में डूब गया है। मैंने इससे पहले गांव में इतनी भयावह बाढ़ कभी नहीं देखी थी। पिछले चार दिनों से अपने छोटे बच्चों के साथ सड़क के किनारे प्लास्टिक के तबूं से बने शिविर में रह रही हूं।

ऐसी स्थिति में जीने को मजबूर असम

उन्होंने कहा कि मेरे बेटे को दो दिन से बुखार है लेकिन बाढ़ के कारण मैं उसे डॉक्टर के पास नहीं ले जा सकती। यहां शिविर में पीने का पानी तक नहीं है। हम बहुत मुसीबत में हैं।

कहां गईं संवेदनाएं ?

जैसे-जैसे इन लोगों को पता चलता है कि पानी और बढ़ने वाला है इनकी धड़कनें बढ़ने लगती हैं। ये एक प्राकृतिक आपदा है हम सब जानते हैं मगर क्या सरकार की संवेदनाएं मर चुकी हैं।

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