इंदौर
2 नवंबर यानि धनतेरस के दिन से पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो जाएगी। सभी लोग त्योहार को मनाने की तैयारी कर रहे हैं। 2 साल से चल रहे कोरोना काल के बाद इस बार की दिवाली खास होने वाली है।
धनतेरस के लिए इंदौर का 200 साल पुराना बर्तन बाजार सज कर तैयार है। व्यापारियों को इस साल अच्छी ग्राहकी की उम्मीद है। बाजारों में सिर्फ वही ग्राहक पहुंच रहे हैंं, जिन्हें कोई सामान खरीदना हो। पिछले वर्षों की तुलना में अच्छी ग्राहकी देखी जा रही है। देवउठनी ग्यारस भी नजदीक है। इसके चलते शादी विवाह के मुहूर्त भी अधिक हैं। इस कारण से कई लोग पहले से बर्तनों की बुकिंग करवाने भी बाजारों में दिखाई दे रहे हैं।
इंदौर के बर्तन बाजार में मुनीमजी नाम की दुकान पर धनतेरस के पहले अनोखा दुकान का श्रृंगार किया जाता है। बर्तन बाजार में करीब 3 मंजिला इमारत को कई बर्तनों से सजाया जाता है। इसके देखकर हर कोई आश्चर्यचकित रह जाता है। लोग दुकान की ओर आकर्षित भी होते हैं। दुकान के मालिक नरेंद्र मेहता ने बताया कि इस वर्ष बाजार में तांबे स्टील पीतल व कांसे में काफी तेजी है, लेकिन यह तेजी कोरोना के कारण नहीं, बल्कि यह तेजी अंतरराष्ट्रीय बाजार जिसे LMV लंदन मार्केट कहा जाता है।
बाजारों में दिखी अच्छी ग्राहकी
दैनिक भास्कर को दुकान मालिक नरेंद्र मेहता ने बताया कि 73 वर्षों से वह यहां बर्तनों का व्यापार कर रहे हैं। वहीं, 12 साल की उम्र में उन्होंने यह व्यापार शुरू किया था। उस वक्त पीतल साढ़े 3 रुपए किलो बिकता था। इसका भाव आज650 रुपए किलो है। बाजार में सिर्फ वही ग्राहक दिखाई दे रहे हैं, जो खरीदारी करने आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों में नवंबर व दिसंबर में शादी के सीजन के पहले ही मनपसंद बर्तनों की बुकिंग कई लोग करा देते थे, लेकिन इस वर्ष ग्राहक सिर्फ सीधे आ रहा है। सामान खरीद कर जा रहा है, जो अच्छा संकेत है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र मेहता के मुताबिक बर्तन बाजार करीब 200 साल पुराना है। यहां करीब 300 के करीब दुकानें हैं। शहर की बात की जाए तो छोटे बड़े व्यापारियों को मिलाकर इंदौर के राजवाड़ा स्थित बर्तन बाजार सबसे बड़ा बाजार है। धनतेरस के पहले जहां सभी बाजार सज के तैयार हैं। वहीं, बर्तन बाजार में भी ग्राहकों की भीड़ है। इस वर्ष 30 से 40% के भाव में तेजी है।
स्टील — 220 से 450 रुपए प्रति किलो
तांबा — 950 से 1200 रुपए प्रति किलो
पीतल – 600 से 850 रुपए प्रति किलो
कांसा- 2600 से 3200 रुपए प्रति किलो
अध्यक्ष सुरेंद्र मेहता ने बताया कि कई सालों पहले बाजार से सेठ हुकुमचंद बाजार भ्रमण पर निकलते थे। व्यापारियों से हालचाल जानते थे। व्यापारी बताते हैं कि व्यापार में घाटा या मंदी है, तो वे व्यापारियों को भेंट स्वरूप गिन्नियां बांट देते थे। पहले तांबा, पीतल, कांसा के पात्रों की खरीदी होती थी। अब माॅड्यूलर किचन का कॉन्सेप्ट आने के बाद 100 साल पुराना ट्रेंड वापस लौट रहा है। कांसा, तांबा, पीतल के बर्तन और राजशाही डिजाइन के बर्तनों की मांग बढ़ने लगी है।
धनतेरस को देखते हुए दुकानदारों ने बर्तनों को खूबसूरत तरीके से सजाया है। बर्तन बाजार में कई दुकानों में बर्तनों का घर बनाया गया है। यहां 3 मंजिला तक बर्तन एक के ऊपर एक रखे हैं। बर्तन बाजार में सुबह से ही खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी है। इंदौर के साथ ही आसपास के क्षेत्र से भी लोग बर्तन खरीदने यहां पहुंचे हैं। रात 12 बजे तक रौनक रहेगी।
अलग डिजाइन व रंगों में रंगे बर्तन।
धनतेरस का महत्व
धनतेरस के दिन उपहार, सिक्के, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ होती है। शुभ मुहूर्त में पूजन करने के साथ सात धान्यों की पूजा की जाती है। सात धान्य गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर है। साथ ही, पूजन सामग्री में विशेष रुप से स्वर्ण पुष्पा के पुष्प से भगवती का पूजन करना लाभकारी रहता है। पूजा में भोग लगाने के लिए नैवेद्य के रुप में श्वेत मिष्ठान जरूरी है। इस दिन स्थिर लक्ष्मी का पूजन करने का विशेष महत्व है। धन त्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरी प्रकट हुए थे। पंडित देव शर्मा ने बताया कि यही कारण है कि इस दिन चिकित्सा जगत में बड़ी-बड़ी योजनाएं आरंभ की जाती हैं।

