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अंतिम दिन 2489 अभ्यर्थियों ने भरे 2811 पर्चे, करीब तीन दर्जन बागियों ने उड़ाई नींद

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प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 के तहत नामांकन के अंतिम दिन सोमवार को 2489 प्रत्याशियों ने पर्चे भरे। इनमें करीब तीन दर्जन बागी प्रत्याशी शामिल हैं। बागियों ने सत्तारूढ़ भाजपा के साथ ही कांग्रेस की भी मुसीबत खड़ी कर रखी है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने बताया कि 21 अक्तूबर से शुरू हुई नाम निर्देशन प्रक्रिया 30 अक्तूबर को समाप्त हो गई। 30 अक्तूबर को प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में 2489 अभ्यर्थियों द्वारा 2811 नाम निर्देशन पत्र जमा किए गए हैं। 21 से 30 अक्तूबर तक कुल 3832 प्रत्याशियों ने 4359 पर्चे भरे

आज होगी जांच
31 अक्तूबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। दो नवंबर को नाम वापस लेने की अंतिम तिथि है। पूरे प्रदेश में 17 नवंबर को एक ही चरण में मतदान प्रक्रिया संपन्न होगी। तीन दिसंबर को मतगणना होगी।

कौन कहां-कहां बागी
प्रदेश में नामांकन के अंतिम दिन बड़ी संख्या में बागियों ने भी पर्चे भरे। इनकी संख्या करीब तीन दर्जन है। देखना होगा ये अंतिम समय तक डटे रहते हैं या मान मनुहार से पार्टी के पक्ष में कदम पीछे लेते हैं। 
भोपाल : भोपाल की उत्तर विधानसभा सीट से आरिफ अकील के भाई आमिर अकील और कांग्रेस नेता नासिर इस्लाम और 
हुजूर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के पूर्व विधायक जितेंद्र डागा ने निर्दलीय आवेदन भरा है। 
बुरहानपुर: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद स्व. नंद कुमार चौहान के बेटे हर्षवर्धन सिंह ने निर्दलीय फॉर्म भरा है। 
रीवा: जिले की मनगवां विधानसभा से विधायक पंचुलाल प्रजापति की पत्नी पूर्व विधायक पन्ना बाई ने निर्दलीय फॉर्म भरा है। 
गुना: चाचौड़ा से भाजपा की पूर्व विधायक ममता मीणा ने आम आदमी पार्टी से।
जबलपुर, सतना: शहर की उत्तर से भाजपा नेता कमलेश अग्रवाल, सतना में भाजपा नेता रतनाकर चतुर्वेदी बसपा से चुनाव मैदान में हैं। 
शिवपुरी: भाजपा के पूर्व विधयक रसाल सिंह, पौहरी से भाजपा नेता प्रद्मम सिंह, सुमावली से कांग्रेस नेता कुलदीप सिकरवार।
मुरैना: भाजपा नेता राकेश रुस्तम सिंह, नागौद से पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह बसपा से चुनाव लड़ रहे है। वहीं, इसके अलावा बिजावर में भाजपा से पूर्व विधायक रेखा यादव, अटेर से पूर्व विधायक मुन्ना भदौरिया, सिमरिया सीट से पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी, मुरैना से बसपा से पूर्व विधायक रहे मनीराम धाकड़ समेत कई सीटों पर बागी पार्टियों की नींद उड़ाए हुए हैं।

अब नाथ और दिग्गी साथ आ प्रत्याशियों व वोटरों में दिखाएंगे एका

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नामांकन फॉर्म जमा करने की सोमवार को अंतिम तारीख थी। इसके बाद पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और पीसीसी चीफ कमलनाथ दिल्ली पहुंचे। वहां पर दोनों नेताओं ने वरिष्ठ नेताओं के साथ चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा की। दोनों मंगलवार को एक प्लेन से दिल्ली से भोपाल पहुंचेंगे। इसे दोनों की मतभेदों की अटकलों के बीच एकजुटता दिखाने की रणनीति बताई जा रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दोनों नेता नामांकन के बाद चुनावी रणनीति को लेकर वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा करेंगे।

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नामांकन फॉर्म जमा करने की सोमवार को अंतिम तारीख थी। इसके बाद पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और पीसीसी चीफ कमलनाथ दिल्ली पहुंचे। वहां पर दोनों नेताओं ने वरिष्ठ नेताओं के साथ चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा की। दोनों मंगलवार को एक प्लेन से दिल्ली से भोपाल पहुंचेंगे। इसे दोनों की मतभेदों की अटकलों के बीच एकजुटता दिखाने की रणनीति बताई जा रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दोनों नेता नामांकन के बाद चुनावी रणनीति को लेकर वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा करेंगे।

राजस्थान, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ चुनाव में सीएम धामी होंगे स्टार प्रचारक, पांच दिन करेंगे प्रचार

उत्तराखंड के बागेश्वर में हुए उपचुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की। ऐसे में अब सीएम धामी के चेहरे की डिमांड राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विस चुनाव प्रचार में बढ़ी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में मांग है। पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री महामंत्री तरुण चुग ने मुख्यमंत्री से एक नवंबर से 28 नवंबर के बीच पांच दिन प्रचार का समय मांगा है। मुख्यमंत्री तीनों राज्यों में स्टार प्रचारक की भूमिका में होंगे। वे वहां चुनावी जनसभाएं करेंगे।

मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में भाजपा ने उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव 2022 में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की थी। उनके नेतृत्व में उत्तराखंड के बागेश्वर में हुए उपचुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की। अब सीएम धामी के चेहरे की डिमांड राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विस चुनाव प्रचार में बढ़ी है। पार्टी उन्हें स्टार प्रचारक के रूप में मैदान में उतारने जा रही है।

धामी छवि का चुनावी फायदा लेना चाहती है पार्टी
चुनाव घोषित होने से पहले भी धामी ने मध्यप्रदेश और राजस्थान में रोड शो और चुनावी रैलियां की थीं। भाजपा का दावा है कि इन रैलियों में स्थानीय लोगों में आकर्षण दिखाई दिया। उनके कार्यक्रमों में भीड़ जुटी। भाजपा धामी सरकार में लिए गए बड़े फैसलों को इसकी वजह बता रही है।

अधिकारियों को ‘रथ प्रभारी’ बनाने की सरकार की योजना कुछ राज्यों में अटकी, चुनाव आयोग ने लगाई रोक

अधिकारियों के एक वर्ग और विपक्ष के एतराज के बीच चुनाव आयोग का निर्देश सामने आया है, जिसमें चुनाव आयोग ने पांच चुनावी राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में चुनाव आचार संहिता लागू होने के चलते यात्रा निकालने पर रोक लगा दी है। केंद्र सरकार की देशभर में सरकारी अधिकारियों की मदद से ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ निकालने की योजना कुछ राज्यों में खटाई में पड़ गई है। दरअसल जिन पांच राज्यों में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां यात्रा निकालने पर रोक लगा दी है। बता दें कि इस यात्रा के तहत सरकारी अधिकारियों को हर जिले में रथ प्रभारी बनाया गया है, जिसे लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है और केंद्र सरकार पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने का आरोप लगा रहा है। 

पूर्व नौकरशाहों ने जताई थी नाराजगी
बीते हफ्ते सरकार ने सभी केंद्रीय मंत्रियों को शीर्ष अधिकारियों के नाम देने को कहा था, जिन्हें आगामी विकसित भारत संकल्प यात्रा में अलग-अलग जिलों में रथ प्रभारी बनाया जाएगा। हालांकि सरकार के इस आदेश पर कई अधिकारियों ने नाराजगी जाहिर की है। पूर्व नौकरशाहों ने तो इस आदेश के खिलाफ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चिट्ठी भी लिखी है। अधिकारियों का कहना है कि नियम, सरकारी अधिकारियों को किसी भी राजनीतिक गतिविधि में शामिल होने की इजाजत नहीं देते। अधिकारियों के एक वर्ग और विपक्ष के एतराज के बीच चुनाव आयोग का निर्देश सामने आया है, जिसमें चुनाव आयोग ने पांच चुनावी राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में चुनाव आचार संहिता लागू होने के चलते यात्रा निकालने पर रोक लगा दी है। 

चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में लगाई रोक
चुनाव आयोग ने कैबिनेट सचिव को कहा है कि चुनाव के चलते आयोग ने बताई गई गतिविधियों को उन राज्यों में नहीं लागू करने को कहा है, जहां पांच दिसंबर 2023 तक चुनाव आचार संहिता लागू है। चुनाव आयोग का यह निर्देश ऐसे वक्त आया है, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सरकारी अधिकारियों को रथ प्रभारी बनाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। खरगे ने पत्र में लिखा कि ‘यह सेंट्रल सिविल सर्विसेज रूल्स, 1964 का साफ उल्लंघन है, जो कहता है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा नहीं लेगा।’

सरकार ने भी किया चुनावी राज्यों में यात्रा निकालने से किया इनकार
खरगे ने लिखा कि सरकारी अधिकारी सूचना प्रसारित करें, यह स्वीकार्य है लेकिन सरकारी योजनाओं का जश्न मनाने से वह सत्ताधारी पार्टी के राजनीतिक कार्यकर्ता लगेंगे। तथ्य यह है कि सिर्फ बीते नौ साल की उपलब्धियों का प्रचार किया जा रहा है। वहीं सरकार ने भी साफ कर दिया है कि जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां यात्रा फिलहाल नहीं निकाली जाएगी। गुरुवार को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव अपूर्व चंद्रा ने बताया कि चुनावी राज्यों में विकसित भारत संकल्प यात्रा निकालने की कोई योजना नहीं है। जब इन राज्यों से आचार संहिता हट जाएगी, तब उन राज्यों में यात्रा निकाली जाएगी। 

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