इंदौर
इंदौर के टायर कारोबारी अशोककुमार वर्मा की सिमरोल में गोली मारकर हत्या के बाद शव को खाई में फेंकने की घटना में एक और खुलासा हुआ है। वारदात के लिए नौकरी और उसका पति यह कहकर व्यापारी को साथ ले गए कि पिकनिक स्पॉट देखकर आते हैं। यहां जैसे ही व्यापारी का ध्यान बंटा तो नौकरानी के पति ने पहले तो पीछे से गोली मार दी। इसके बाद उसके कपड़े झाड़ियों में फेंक दिया। मोबाइल और कपड़ों में रखे रुपए लेकर आरोपी ओंकारेश्वर घूमने चले गए। आरोपियों से इस हत्याकांड को लेकर ओर पूछताछ की जा रही है।
एएसपी राजेश रघुवंशी के मुताबिक अशोक कुमार वर्मा की हत्या में पकड़ाए राजकुमार और उसकी पत्नी ब्रजेश ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोपियों ने बताया कि एक दिन पहले अशोक से मोबाइल पर नौकरानी ब्रजेश से बात करते हुए मिलने की बात तय की थी। इसके बाद सिमरोल पिकनिक स्पॉट पर घूमने की बात हुई। यहां ब्रजेश और व्यापारी अशोक झाड़ियों में उतरे। राजकुमार थोड़ी दूर खड़ा हो गया। जब दोनों के बीच बातचीत होने लगी। व्यापारी का ध्यान भटका तो पीछे से आकर राजकुमार ने अशोक के सिर में गोली मार दी।
वीड़ियो होने की बात पर वायरल की देता था धमकी
टीआई इंद्रमणी पटेल ने जानकारी में बताया कि पहले ब्रजेश से मिलने के समय अशोक ने उसके वीडियो बना लेने की बात कही थी। इसी के आधार पर वह उसे ब्लैकमेल करता रहा। कहता था कि वायरल न करूं इसलिए संबंध बनाएं। इस कारण से ब्रजेश को उससे बात करना ही पड़ती थी। कुछ समय पहले लॉकडाउन पर राजकुमार की आर्थिक व्यवस्था बिगड़ गई थी। इसमें ब्रजेश ने अशोक से रुपए भी ले लिये थे। कुछ समय बाद अशोक से ब्रजेश ने दूरी बनने लगी तो वह रुपयों के लिए तगादा लगाने लगा और संबंध जारी रखने की बात कहने लगा।
ट्रांसपोर्ट नगर से दुकान खाली कर देवास नाके गए
जांच में पता चला कि अशोक 6 साल पहले तक ट्रांसपोर्ट नगर में व्यापार करता था। लिंबोदी में रहता था लेकिन बाद में कैलाशपुरी में आकर रहने लगे। देवास नाका में दुकान डाल ली। 2015 में देवास नाका पर ही काम के दौरान राजकुमार के माध्यम से उसकी बातचीत ब्रजेश हुई थी।
अमेरिका में बेटे को दी जानकारी
अशोक के परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है। बड़ी बेटी की शादी हो गई है जबकि छोटी इंदौर में ही पढ़ाई के साथ पिता के काम में हाथ बंटाती थी। वही बेटा एमबीए की पढ़ाई के लिये कुछ समय पहले ही अमेरिका गया था। उसे सुबह परिवार के लोगों ने जानकारी दी तो उसे यकीन नहीं हुआ। परिवार ने उसे इंदौर आने की बात कही। इधर अशोक का अंतिम संस्कार स्थानीय दोस्तों और परिवार की मौजूदगी में किया गया।

