गुना \भोपाल
पांच माह की गर्भवती महिला को पहले उसका पति बांसखेड़ी गांव से सांगई गांव के दूसरे युवक के पास छोड़ गया। बाद में उसके ससुर और जेठ ने उसका जुलूस निकाला। उसके कंधे पर गांव के एक लड़के को बैठाकर उसे तीन किमी तक ऊबड़-खाबड़ सड़क पर नंगे पैर घुमाया।
रास्तेभर उसे लाठी-डंडों से पीटते रहे। पत्थर भी मारे। पुलिस रिकॉर्ड में घटना 9 फरवरी की है, लेकिन सोमवार को इसका वीडियो वायरल हुआ। पुलिस ने भी मामले में गंभीरता नहीं दिखाई। आरोपी ससुर, जेठ और देवर को केवल मारपीट का केस दर्ज कर थाने से ही जमानत पर रिहा कर दिया।
ससुर-जेठ घसीटकर मारते रहे, गांव वाले हंसते रहे
पति का फोन आया- ‘छोड़ दो, मत मारो’, लेकिन किसी ने नहीं सुनी
दो माह पहले मेरे पति सीताराम मुझे सांगई गांव में डेमा के घर छोड़कर इंदौर चले गए। जाते वक्त वे बोले- ‘मैं तुम्हें अब नहीं रख सकता, तुम डेमा के साथ ही रहो।’ 6 फरवरी को मेरे ससुर गुनजरिया वारेला, जेठ कुमार सिंह, केपी सिंह और रतन आए और घर चलने के लिए कहा।
मैंने मना किया तो वे मुझे पीटने लगे। मेरे कंधे पर गांव के एक लड़के को बैठा दिया और सांगई से बांसखेड़ी ससुराल तक तीन किमी तक नंगे पैर ले गए। मेरे पेट में पांच माह का गर्भ है। फिर भी ससुर और जेठ मुझे घसीटते रहे और डंडे, पत्थर, क्रिकेट के बल्ले से पैरों में मारते रहे। इस दौरान पति का भी फोन आया। उसने सबसे मुझे छोड़ने का आग्रह किया, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
– जैसा पीड़िता भागवती ने अनिमेष शर्मा को बताया
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 294 (गाली देना), धारा 323 (धक्का देना, चांटा मारना), धारा 506 (जान से मारने की धमकी) के तहत केस दर्ज किया है। सभी धाराएं जमानती हैं। इनमें तीन महीने से लेकर दो साल तक की सजा हो सकती है। गुना एसपी राजीव कुमार मिश्रा ने कहा कि घटना मेरे पदभार संभालने से पूर्व यह घटना हुई है। इस मामले में सख्त धराएं बढ़ाई जाएंगी।

