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चोइथराम सब्ज़ी मंडी में मंडी अधिनियम की खुलेआम अवहेलना

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इंदौर : चोइथराम सब्ज़ी मंडी में मंडी अधिनियम की खुलेआम अवहेलना और किसानों के शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। मंडी परिसर में नियमों को ताक पर रखकर न केवल दुकानों को अवैध रूप से किराये पर दिया जा रहा है, बल्कि प्रतिबंध के बावजूद दुकानों की खरीदी-बिक्री भी धड़ल्ले से जारी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मंडी समिति की एक दुकान पवन चौहान नामक व्यक्ति द्वारा किराये पर ली गई थी। इस संबंध में पूर्व में भी मंडी समिति को अवैध कब्ज़े और किराया वसूली की शिकायतें की जा चुकी हैं। उल्लेखनीय है कि मंडी अधिनियम के तहत किसी भी स्थिति में दुकानों को किराये पर देना पूर्णतः प्रतिबंधित है, इसके बावजूद यह अवैध गतिविधियाँ लगातार चलती रहीं।

गौरतलब है कि वर्ष 2014 से इंदौर की चोइथराम मंडी में दुकानों की खरीदी-बिक्री पर स्पष्ट प्रतिबंध लागू है, फिर भी मंडी परिसर के भीतर एक दर्जन से अधिक दुकानों की खरीद-फरोख्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि सब्ज़ी मंडी क्षेत्र में मात्र 15 दिन पूर्व ही एक दुकान की बिक्री हुई, जो नियमों की खुली अवहेलना और गंभीर अनियमितता को दर्शाता है।

इतना ही नहीं, आलू-प्याज़ मंडी और फ्रूट मंडी क्षेत्र में भी दुकानों की अवैध खरीदी-बिक्री की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे पूरे मंडी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह सभी मामले विस्तृत और निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं।

शिकायत के बाद प्रशासन द्वारा की गई जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर मंडी की दुकान क्रमांक 164 को सील किया गया। यह कार्रवाई किसानों के हितों की रक्षा की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

किसान नेता बबलू जाधव ने मांग की है कि वर्ष 2014 से अब तक हुई सभी दुकानों की खरीदी-बिक्री, अवैध किराया वसूली और कब्ज़ों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही दोषी व्यापारियों और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा किसानों से अवैध रूप से वसूली गई राशि उन्हें वापस दिलाई जाए।

यह पूरा मामला मंडी व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और किसानों के आर्थिक शोषण को उजागर करता है। अब समय आ गया है कि मंडी प्रशासन पारदर्शिता और कठोरता के साथ नियमों का पालन सुनिश्चित करे, ताकि किसानों के हितों की वास्तविक रक्षा हो सके।

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