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विकास यात्रा मेंभाजपा के 23 विधायक का विरोध

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मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने विधायकों की जमीनी हकीकत देख ली है। विकास यात्रा के जरिए यह भी देख लिया कि एंटी इनकंबेंसी कितनी है? इसकी रिपोर्ट भी तैयार हो रही है, जो इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट का एक आधार भी बनेगी। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि 23 विधायकों को अपने क्षेत्रों में नाराजगी का सामना करना पड़ा है। यदि इसे एंटी इनकंबेंसी मान लें तो बीजेपी के करीब 20 फीसदी विधायकों के टिकट पर संकट खड़ा हो सकता है।

5 फरवरी से 25 फरवरी तक चली विकास यात्रा का मकसद लोगों को सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देना था। इस सरकारी इवेंट के दौरान विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया गया। इस अभियान का फॉर्मेट इस तरह बनाया गया था कि इसमें विधायक, मंत्री अपने क्षेत्र में लोगों से सरकारी योजनाओं के बारे में बात करें।

टिकट बंटवारे का बनेगा आधार

कांग्रेस का दावा है कि 172 विधानसभा क्षेत्रों में लोगों ने विकास यात्रा का विरोध किया, लेकिन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा इस विरोध को पार्टी के लिए संजीवनी बता रहे हैं। दैनिक भास्कर ने इसी दावे-प्रतिदावे को जानने के लिए प्रदेशभर में विधायकों की विकास यात्रा की पड़ताल की। इसमें सामने आया कि 23 विधायकों के सामने लोगों ने बिजली, सड़क, पानी और आवास जैसे मुद्दे को लेकर नाराजगी जाहिर की। कहीं-कहीं तो विधायकों को अप्रिय स्थिति का सामना भी करना पड़ा।

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक विकास यात्रा के बहाने पार्टी ने अपने विधायकों और टिकट के दावेदारों की लोकप्रियता का आकलन किया है। इसके आधार पर भाजपा को चुनाव से जुड़े कुछ बड़े फैसले लेने में आसानी होगी। यात्रा के दौरान दो तरह की एंटी इनकंबेंसी सामने आई। एक सीधे विधायक को लेकर, दूसरी सिस्टम को लेकर। विधायकों को लेकर एंटी इनकंबेंसी का आकलन संगठन स्तर पर किया जा रहा है। बीजेपी का आकलन है कि कुछ विरोध पार्टी की गुटबाजी तो कुछ कांग्रेस प्रायोजित भी रहा है। विरोध गुटबाजी या कांग्रेस प्रायोजित निकला तो ठीक, वरना प्रत्याशी बदलने पर विचार किया जा सकता है। सिस्टम को लेकर एंटी इनकंबेसी पर जल्द ही उच्च स्तर पर रिव्यू होगा। इसके बाद बड़ी प्रशासनिक सर्जरी भी हो सकती है।

विकास यात्रा में विरोध के कैसे-कैसे रंग

पहले बात करते हैं कि बीजेपी की विकास यात्रा में लोगों के विरोध की। लोगों ने कैसे-कैसे विरोध किया। कहीं सड़क को लेकर नाराजगी दिखी तो कहीं महिलाओं ने पानी न मिलने पर मंत्री को घेर लिया। जंगल में हो रहे कब्जे को लेकर भी ग्रामीण गुस्से में हैं। विकास यात्रा में सबसे अधिक विरोध मालवा-निमाड़ खासकर खंडवा, धार, बुरहानपुर और देवास में दिखा। विंध्य के सतना, रीवा, उमरिया, शहडोल में भी पार्टी विधायकों और दावेदारों का विरोध हुआ।

कई स्थानों पर भीड़ नहीं जुटाने पर डांस तक कराने पड़े। पन्ना में तो बीजेपी के मंच से कलेक्टर राजनीतिक भाषण देकर फंस गए। एक विधायक ने गले में सांप लपेट लिया। वहीं, एक मंत्री पर भीड़ ने खुजली वाली फली लगा दी। उन्हें मौके पर कुर्ता निकालकर हाथ-पैर धोने पड़े। कई स्थानों पर विरोध के चलते विधायक और दावेदारों को लौटना पड़ा।

विकास यात्रा के विरोध की 10 घटनाएं…

1. अर्द्धनग्न होकर किसानों ने किया प्रदर्शन

देवास जिले में 5 विधायकों में 4 बीजेपी के हैं। विकास यात्रा के दौरान बीजेपी के 3 विधायक देवास की गायत्री राजे, बागली के पहाड़ सिंह कन्नौजे और हाटपिपलिया के मनोज चौधरी को विरोध का सामना करना पड़ा। हाटपिपलिया क्षेत्र में इंडस्ट्री के लिए अधिग्रहित लैंड पूलिंग का 32 गांव के किसानों ने अर्धनग्न होकर विधायक मनोज चौधरी के सामने विरोध किया। हालांकि, मनोज चौधरी ने बताया कि इस पर स्टे लगाया गया है। बागली विधायक पहाड़ सिंह कन्नौजे को कांटाफोड़ में अधूरे विकास कार्यों के चलते विरोध झेलना पड़ा।

2. तीन किमी सड़क नहीं बनवा सके, काहे का विकास

खंडवा जिले में चारों विधायक बीजेपी के हैं। विकास यात्रा में यहां के 3 विधायकों का विरोध हुआ। खंडवा विधायक देवेंद्र वर्मा की विकास यात्रा का रथ गोहलारी में सड़क पर गड्‌ढे में फंस गया। ग्रामीणों ने ट्रैक्टर की मदद से निकाला। विधायक वर्मा जब लोगों को योजनाएं बताने पहुंचे, तो पूर्व सरपंच बलराम मिस्त्री गांव की 3 किमी सड़क को लेकर भड़क गए। बोले- काहे का विकास किया। तुम लोग कांग्रेस से भी बदतर हो। इस पर विधायक ने कहा, आप वोट मत देना दादा, ये तुम्हारा अधिकार है।

त्योंथर विधायक को विकास यात्रा में भीड़ जुटाने गले में सांप डाल कर बीन तक बजाना पड़ा।

3. वन मंत्री शाह युवक को धमकाते रहे

13 फरवरी की रात ​​​​​हरसूद विधानसभा के गोलखेड़ा गांव में वन मंत्री विजय शाह पहुंचे थे। गांव का एक युवक आंगनबाड़ी में कार्यरत पत्नी को छह महीने से सैलरी न मिलने की समस्या सुनाने खड़ा हुआ। इस पर मंत्री शाह भड़क गए। मंच से डांट लगाते हुए कहा कि ‘मुझे जानकारी है कि गोलखेडा में कुछ लोग नाटक करने वाले हैं, इसको ले जाओ उठाकर, पुलिस वाले कौन हैं। बर्दाश्त नहीं करूंगा ऐसे…। कर दिया मूड ऑफ, अब हो गया विकास, उसको बोलो (कांग्रेस के स्थानीय नेता मुकेश दरबार)- पानी ला, हैंडपंप ला, स्कूल ला, टंकी ला, बिजली ला, ग्रिड ला… उसके बाप के हड्‌डे लाएगा।

4. विधायक मुर्दाबाद के नारों के साथ कुर्सियां तक फेंकी

13 फरवरी को ही पंधाना विधायक राम डांगोरे को गरण गांव में विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने विधायक मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए पंडाल की कुर्सियों को इधर-उधर फेंक दिया। विधायक का दावा है कि वे जयस के कार्यकर्ता थे। जनरल बिपिन रावत के हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद जयस संगठन के कार्यकर्ताओं ने खुशियां मनाई थीं, इसे लेकर उन पर केस दर्ज किया गया था। इसी केस को हटाने की मांग कर रहे थे।

निवाड़ी में पृथ्वीपुर जनपद पंचायत अध्यक्ष हरबू बाई कुशवाहा के पति मुकुंदी कुशवाहा ने विकास यात्रा के दौरान भीड़ जुटाने के लिए राई डांसर के साथ डांस किया था।

5. विधायक को घेर कर ग्रामीणों ने मांगा 5 साल का हिसाब

दमोह जिले की दमोह सहित पथरिया, हटा और जबेरा विधानसभाओं में बीजेपी के पास दो सीटें हैं। बीजेपी विधायक तेंदूखेड़ा को चौरई गांव में ग्रामीणों ने घेर लिया। वे विधायक से विकास कार्यों का लेखा-जोखा मांग रहे थे। ग्रामीणों में कुछ ने काले झंडे भी दिखाए। भगवती मानव कल्याण संगठन से जुड़े युवक लक्ष्मण रैकवार का आरोप है कि वीडियो बनाने पर विधायक ने गुस्से में उससे मोबाइल छीन लिया। उनके गार्ड ने बदसलूकी भी की।

लक्ष्मण ने विधायक के खिलाफ थाने में लिखित शिकायत भी दी थी। हालांकि, विधायक धर्मेंद्र सिंह लोधी का दावा है कि बिजली कटौती और पीएम आवास की किस्त नहीं मिलने की शिकायत ग्रामीण कर रहे थे। उन्हें आश्वस्त किया है कि बजट के बाद राशि आवंटित हो जाएगी।

6. विधायक के काफिले पर पथराव

रीवा में सभी 8 विधायक बीजेपी से हैं। विकास यात्रा के दौरान मऊगंज के विधायक प्रदीप पटेल के काफिले पर ग्रामीणों ने पत्थरबाजी कर दी। इसमें छह लोग घायल हुए। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। मनगवां विधायक पंचूलाल प्रजापति की विकास यात्रा का कांग्रेस के जनपद अध्यक्ष ने समर्थकों संग काले झंडे दिखाकर विरोध किया। यहां पुलिस ने 100 लोगों को आरोपी बनाया है। एसडीएम को भी हटा दिया गया।हरसूद विधानसभा के गोलखेड़ा गांव में वन मंत्री विजय शाह पहुंचे थे। गांव का एक युवक विरोध करने खड़ा हुआ तो मंत्री ने युवक को मंच से ही फटकार दिया।

7. मजदूरी न मिलने से ग्रामीण नाराज, विधायक का घेराव

शहडोल की तीनों विधानसभा सीटों जयसिंहनगर, जैतपुर और ब्यौहारी से बीजेपी के विधायक हैं। जैतपुर विधानसभा क्षेत्र में विकास यात्रा के दौरान भाजपा विधायक मनीष सिंह को चन्नौड़ी में ग्रामीणों ने 6 माह से मजदूरी का भुगतान न होने पर घेर लिया। ग्रामीणों का गुस्सा देख विधायक निकल गए। वहीं जयसिंहनगर से भाजपा विधायक जयसिंह मरावी को ग्राम चुहिरा नगर के ग्रामीणों ने घेर लिया। ग्रामीणों में गुस्सा इस बात को लेकर था कि चुनाव के बाद अब विधायक विकास यात्रा में पहली बार दिखे थे।

8. पूर्व विधायक बोले- अब सुन, मैं बोल रहा, तू बैठ जा…

धार में 7 विधानसभाओं में धार और बदनावर में ही बीजेपी के विधायक हैं। धार के सरदारपुर विधानसभा के कजरोटा सहित आसपास के गांवों को नर्मदा-शिप्रा लिंक परियोजना से बाहर कर दिया गया है। भाजपा के पूर्व विधायक वेलसिंह भूरिया विकास यात्रा में पहुंचे तो ग्रामीण कार्यक्रम छोड़ कर निकल गए। एक युवक ने सीएम की घोषणा का हवाला देकर अपनी बात रखने की कोशिश की तो पूर्व विधायक उसे ही डांट कर चुप कराते दिखे। बोले कि ‘पक्‍का करेंगे, पर तेरे कहने से नहीं करेंगे, तुम बैठ जाओ। मैं बोल रहा हूं, तू बैठ जा। उसी में भलाई है’।

9. मंत्री को लगा दी खुजली वाली फली

अशोकनगर के मुंगावली विधानसभा क्षेत्र के देवर्छि गांव पहुंचे विधायक एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री बृजेन्‍द्र सिंह यादव को किसी ने खुजली वाली फली लगा दी। नतीजा विधायक को मौके पर ही कुर्ता निकाल कर हाथ-पैर धोने पड़े। अशोकनगर जिले की तीन सीटों में दो पर बीजेपी का कब्जा है।

चंदेरी विधानसभा क्षेत्र के देरखा गांव पहुंचे जिला पंचायत अध्यक्ष जगन्नाथ सिंह रघुवंशी जब सरकार की उपलब्धियां गिनाने पहुंचे, तो एक युवक पवन रघुवंशी नाराज हो गया। जिला पंचायत अध्यक्ष से माइक ले लिया। बोला कि आप दो दिन पहले आते तो पता चल जाता कितना विकास हुआ है। दो दिन पहले ही स्कूल की पुताई हुई है। गांव में खेल मैदान नहीं है। गांव की सड़क कच्ची है। युवा बेरोजगार है। टिकिया का ठेला लगा रहा है। आप विकास यात्रा निकाल रहे हैं। क्या विकास किया?

10. सड़क-पानी पर घिर गईं मंत्री और विधायक

उमरिया जिले में बीजेपी दोनों सीटों पर काबिज है। मानपुर विधायक मीना सिंह प्रदेश सरकार में जनजातीय विकास मंत्री हैं। पाली विकास खंड के सुंदर दादर गांव में सड़क को लेकर ग्रामीणों ने विकास यात्रा का विरोध किया। मंत्री को कहना पड़ा कि अब सड़क भूमिपूजन में ही गांव में कदम रखेंगी। इसी तरह बांधगढ़ के करकबेली ब्लॉक के आकाश कोट गांव में पानी की किल्लत से परेशान आदिवासी महिलाओं ने विधायक शिवनारायण सिंह को घेर लिया। जल्द पानी की समस्या दूर करने का आश्वासन देकर जैसे-तैसे विधायक वहां से निकले।

विरोध के ये नजारे भी दिखे…

पार्टी जोखिम उठाने को तैयार नहीं, इस कारण समीक्षा

पार्टी मिशन-2023 के लिए किसी तरह का जोखिम उठाने को तैयार नहीं है। वह 2018 के चुनाव में टिकट देने से जुड़ी गलतियों को भी दोहराना नहीं चाहती है। विकास यात्रा की रिपोर्ट, इसकी सफलता और कार्यकर्ताओं की सहमति से ही इस बार विधानसभा चुनाव का टिकट दिया जाएगा।

बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. हितेश वाजपेयी के मुताबिक विकास यात्रा में जनप्रतिनिधि और प्रशासन दोनों जनता के बीच पहुंचे हैं। इसमें हर तरह का फीडबैक प्रचुर मात्रा में मिला है, इस आधार पर जनता के मन की बात को बेहतर तरीके से समझ कर हम आगे की रणनीति तैयार कर पाएंगे।

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