सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) इस बात पर गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त करती है कि हाल के दिनों में रचनात्मक अभिव्यक्ति और विचारों की स्वतंत्रता पर लगातार हमले हो रहे हैं।
अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल उर्दू अकादमी द्वारा प्रख्यात गीतकार और लेखक जावेद अख़्तर के विरोध में कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों के दबाव में आकर अपना चार दिवसीय कार्यक्रम रद्द कर देना लोकतांत्रिक मूल्यों और सांस्कृतिक विविधता पर सीधा हमला है। यह न केवल साहित्यकारों और कलाकारों का अपमान है, बल्कि उन तमाम संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन है जो नागरिकों को स्वतंत्र अभिव्यक्ति की गारंटी देते हैं।
इसी तरह, कर्नाटक सरकार द्वारा दशहरा कार्यक्रम में लेखिका बानू मुश्ताक को आमंत्रित किए जाने पर तथाकथित हिंदू संगठनों द्वारा विरोध जताना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में किसी लेखक या कलाकार की भागीदारी को उनकी धार्मिक पहचान से जोड़ना भारतीय समाज की साझा विरासत के खिलाफ है।
हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि भारत की असली पहचान उसकी बहुलता, सहिष्णुता और विविधता है। किसी भी विचार या मत से असहमति का उत्तर बहस और संवाद से दिया जाना चाहिए, न कि धमकी, दबाव और बहिष्कार की राजनीति से।
हम माँग करते हैं कि देश और इसके हर राज्य में
- सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्थाएँ राजनीतिक और धार्मिक दबावों से मुक्त होकर कार्य करें।
- सरकारें और प्रशासन कलाकारों एवं लेखकों को सुरक्षा और स्वतंत्र माहौल उपलब्ध कराएँ।
- ऐसे कट्टरपंथी और संकीर्ण सोच वाले तत्वों पर अंकुश लगाया जाए।
- समाज में विचारों की बहुलता और मतभिन्नता को लोकतंत्र की ताक़त के रूप में स्वीकार किया जाए।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) हर उस कोशिश का विरोध करती है जो कलाकारों, लेखकों और बुद्धिजीवियों की आवाज़ दबाने के लिए की जाती है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करता है ।
बसंत हेतमसरिया
राष्ट्रीय प्रवक्ता
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)
मो. 9934443337

