आज न्यायालय द्वारा ..शांति स्वरूपानंद ,महावीर प्रसाद मानसिंगका , एडवोकेट ओम प्रकाश अग्रवाल एवं अशोक प्रजापत के खिलाफ धोखाधड़ी ,छल एवं प्रतिरूपण मामले में कोर्ट द्वारा गैरजमानतीय धारा 420 एवं 419 में महाकाल थाने को एफ आई आर दर्ज करने का आदेश जारी

उज्जैन // उज्जैन के अखंड आश्रम के जवानी से ही विवादास्पद रहे, धंधे बाज पवित्र भगवा वस्त्र की आड़ में लोगों से छल एवं बेइमानी कर परम पूज्य युगपुरुष महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद जी महाराज का प्रतिरूपण कर छल करने के आरोपी 71वर्षीय शांति स्वरूपानंद एवं मक्सी के सफेद पोश ट्राय स्टार सोया फैक्ट्री जो सैकड़ों करोड़ का दीवाला निकाल चुकी है के कर्ताधर्ता देश भर के संतो को दान की लालच देकर अंधेर में रख दान की आड़ में मंदिरों एवं ट्रस्ट की संपत्ति पर स्वयं का एवं परिजनों का नाम चस्पा करा अपरोक्ष रूप में मालिक बन जाने वाले 93 वर्षीय महावीर प्रसाद मानसिंगका , कई संस्थाओं में विवादास्पद ट्रस्टी रहे एडवोकेट ओम प्रकाश अग्रवाल एवं पूर्व में राजमंत्री का दर्जा प्राप्त मां शिप्रा के घाटों की मिट्टी से ईंटों का व्यापार कर करोड़ो कमा शिप्रा नदी के अस्तित्व को संकट में डालने वाले अशोक प्रजापत इन चारों आरोपियों के खिलाफ उज्जैन के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कुशाग्र अग्रवाल द्वारा सोहिल पिता घनश्याम पटेल की शिकायत पर महाकाल थाने से कराई गई जांच के उपरांत अपराध प्रथम दृष्टया सिद्ध पाकर इन चारों आरोपी गण को छल और बेइमानी से सोहिल पटेल को संपत्ति के परिदान के लिए उत्प्रेरित कर धारा 420 BNSS 2023 की धारा 318(4) का संज्ञेय अजमानतीय (नॉन बेलेबल)अपराध करने एवं प्रतिरूपण द्वारा छल करते हुए स्वामी परमानंद जी के स्थान पर स्वयं को अखंड आश्रम ट्रस्ट का अध्यक्ष बता आरोपीगण की मिलीभगत से बैंक में मुरलीधर मानसिंगका के नाम से फर्जी अकाउंट खोलकर उसमें चारों आरोपीगण द्वारा संगनमत होकर खाते का संचालन कर अवैध तरीके से लाखों का लेनदेन करने का अपराध सिद्ध पाकर महाकाल थाने को इन चारों आरोपियों के खिलाफ छल और बेइमानी से संपत्ति के परिदान के कारण (आईपीसी की पूर्व धारा 420 )बीएनएसएस 2023 धारा की 318(4) जो कि संज्ञेय अजमानतीय अपराध है एवं प्रतिरूपण द्वारा छल करने की BNSS की धारा 319(2)(आईपीसी की पूर्व धारा 419 ) संज्ञेय अपराध की धारा में FIR दर्ज कर चारों आरोपियों के खिलाफ विवेचना पूर्ण करने का आदेश जारी कर दिया है
।अब देखना यह है कि महाकाल थाना पुलिस इन चारों सफेदपोश अपराधियों को तत्काल गिरफ्तार करती है या इन्हें आजाद रहकर अखंड आश्रम ट्रस्ट के करोड़ो के धन एवं संपत्ति को रफा दफा करने हेतु आजाद छोड़ कर मौका प्रदान करती है या फिर आरोपियों को गुपचुप तरीके से जमानत लेने का मौका प्रदान करती है। उल्लेखनीय है कि अखंड आश्रम के आजीवन अध्यक्ष युगपुरुष स्वामी परमानंद जी द्वारा उज्जैन एस डी एम को सभी आरोपीगण के खिलाफ अखंड आश्रम में किए गए गबन की लिखित में शिकायत दर्ज कराई है जो कि अब तक ठंडे बस्ते में बंद थी किंतु न्यायालय द्वारा अखंड आश्रम के स्थान पर सेठ मुरलीधर मानसिंगका के नाम से फर्जी अकाउंट खोल कर चारों आरोपियों द्वारा करोड़ो का लेन देन करने के अपराध में संज्ञान लेने के बाद अब गबन का आरोप भी स्वतः ही सिद्ध हो गया है।
जिस पर एक और एफ आई आर दर्ज होना अब बस कुछ ही समय की बात है।इसके साथ ही स्वामी शांति स्वरूपानंद द्वारा स्वयं को ब्रम्हचारी शांति स्वरूप बताते हुए स्वयं को चांदनी जालौन उत्तरप्रदेश का स्थाई निवासी बताते हुए बनवाए गए पासपोर्ट की जांच भी शुरू हो चुकी है क्योंकि 1985 से संन्यास ले स्वामी शांति स्वरूप के नाम से उज्जैन के महाकाल थाने के स्थाई निवासी का पास पोर्ट ब्रह्मचारी शांति स्वरूप निवासी चांदनी जालौन उ प्र के नाम और पते से कैसे बन गया यह भी फर्जी पासपोर्ट बनवाने के गंभीर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है।