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सेन्चुरी और मंजीत सिंह के मैनेजमेंट को श्रमिक जनता संघ के साथ ‘मध्यस्थता’ की प्रक्रिया चलाने का आदेश

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सेंचुरी यार्न और डेनिम मिल्स के 844 श्रमिकों ने और 30 कर्मचारियों ने चंद लाख रुपए की
VRS राशि नकारकर रोजगार के हक की लड़ाई 1553 वें दिन भी जारी रखी है। औद्योगिक
विवाद अधिनियम 1947 के, याने भारत आजाद होने के बाद के पहले कानूनों में से एक
कानून के, तहत दोनों मिल्स की बिक्री 2017 में हुई थी लेकिन वह औद्योगिक ट्रिब्यूनल में
फर्जी साबित होने पर सेंचुरी मैनेजमेंट को रद्द करनी पड़ी थी। अब जून 2021 से दुबारा की
गई बिक्री 4 सालों से बंद पड़ी मिल्स कि नहीं, संपत्तिकी है। 2018 में ही मध्य प्रदेश उच्च
न्यायालय में जिस संपत्ति की कीमत 426 करोड रुपए बताई थी, वही पहले 2.5 करोड़ में और
अब दोबारा 62 करोड़ में बेचने का फर्जीवाड़ा सामने लाकर श्रमिक जनता संघ ने रजिस्ट्रार
ऑफ स्टंप्स और जिलाधिकारी, खरगोन से धरातल पर जांच की मांग की है जिसके बिना
सेंचुरी ने मंजीत ग्लोबल और मनजीत कॉटन को की हुई बिक्री हमें मान्य नहीं है। इस पूरे
मुद्दे पर उठाए विवाद को औद्योगिक ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश करना, श्रम आयुक्त महोदय
की कानूनी जिम्मेदारी है, जिस पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में सुनवाई बाकी है!

मनजीत सिंह की दोनों मिल्स तो आज तक पूर्ण रूप में चलाई नहीं जा रही है। 1000
श्रमिकों से और 100 कर्मचारियों से चलाई जा रही ये टेक्सटाइल मिल्स मनजीत सिंह मात्र
300 ठेका मजदूरों से और चंद कर्मचारियों से चलाने की साजिश कब तक चलाएंगे?
मनजीत सिंह की सेंचुरी कंपनी के साथ, कंपनी से वर्षों पहले आवंटित मकानों में निवासरत
श्रमिक और कर्मचारियों के घरों की बिजली और पानी में कटौती करने की साजिश भी 20-25
सालों से कुमारमंगलम बिरला की सेंचुरी की संपत्ति बढ़ाने वाले श्रमिकों को हटाने की दूसरी
कोशिश भी, विवाद का निपटारा न होते हुए किया गया अत्याचार रहा। कसरावद (जिला
खरगोन) के सिविल न्यायालय ने बिजली-पानी चालू करने का तथा गेट खुले रखने का
अंतरिम आदेश 22/12/2021 के रोज पारित किया। उसके बावजूद मनजीत सिंह के
मैनेजमेंट और सिक्युरिटी गार्ड्स बाउंसर्स द्वारा आदेश की अवमानना की जाती रही। अब
कल 17 जनवरी के रोज मनजीत सिंह कंपनियां, और सेंचुरी मैनेजमेंट को बुनियादी
सुविधाएं जारी रखने के, श्रमिकों के अधिकार के मुद्दे पर मंडलेश्वर न्यायालय में
मध्यस्थता की प्रक्रिया श्रमिक जनता संघ के साथ चलाने का आदेश दिया गया है।
सेंचुरी के श्रमिक जानते हैं कि “बिन लड़े कुछ भी यहां मिलता नहीं…..” और हमारा संघर्ष
अहिंसक और सत्याग्रह के पथ पर ही जारी रहेगा। न्याय चाहिए तो रोजगार के आधार
कुचलने के उद्योगपतियों के गैरकानूनी कारोबार और षड्यंत्र से न डरेंगे, न झुकेंगे, यही
सेंचुरी के 2017 से संघर्षरत श्रमिकों का संकल्प है। श्रमिक जनता संघ द्वारा इस अन्याय
की खिलाफत एक राष्ट्रीय श्रमिक एकजुटता का मुद्दा भी है।

राजेश खेते, संजय चौहान, नवीन मिश्रा, सन्तलाल दिवाकर

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