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कालाबाजारी करने वाले कर्मचारियों के समर्थन में खोला संगठन ने मोर्चा

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भोपाल। बालाघाट जिले में शासकीय गेहूं की कालाबाजारी करने के मामले में परिवहनकर्ता के साथ दो-दो कर्मचारियों को दोषी मानते हुए 6 माह के लिए जेल भेजने के विरोध में अब कर्मचारी संगठन ने मोर्चा खोल दिया है। इस बीच निगम प्रबंधन द्वारा इस मामले की विभागीय जांच क्षेत्रीय प्रबंधक को सौंप दी गई है। इस मामले में अब मध्यप्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम अधिकारी कर्मचारी संघ ने प्रबंध संचालक एमपी स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन भोपाल को ज्ञापन देकर कलेक्टर बालाघाट द्वारा की गई कार्रवाई को गलत बताया है। इस बीच विभागीय जांच कर रहे क्षेत्रीय प्रबंधक ने बालाघाट जिले के बारासिवनी वेयरहाउस जाकर जांच शुरू कर दी है।  इस मामले में कर्मचारी संगठन के प्रांत अध्यक्ष अनिल बाजपेई ने वारासिवनी शाखा प्रबंधक व नागरिक आपूर्ति निगम में केंद्र प्रभारी को सीधे 6 माह के लिए जेल भेजने के कलेक्टर के आदेश को तानाशाही पूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और आयुक्त जबलपुर संभाग को पत्र भी लिखा है।
इसमें कहा गया है कि बिना नियोक्ता की अनुमति के शाखा प्रबंधक और केंन्द्र प्रभारी को सीधे जेल भेजने की प्रक्रिया पूर तरह से अवैधानिक है।  इससे कर्मचारियों में रोष व्याप्त है । पत्र में कहा गया है कि नागरिक आपूर्ति निगम की अनुमति से संबंधित परिवहनकर्ता द्वारा खाद्यान्न को राशन की दुकानों तक पहुंचाया जाता है।  इसमें अगर रास्ते में किसी प्रकार की कोई भी अनियमितता या हेराफेरी होती है तो उसकी जिम्मेदारी परिवहनकर्ता की होती है। यह मामला भी ऐसा ही है, लेकिन कलेक्टर बालाघाट द्वारा परिवहनकर्ता के साथ ही नागरिक आपूर्ति निगम और वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के प्रबंधन को जिम्मेदार मानते हुए 6 माह के कारावास की कार्रवाई कर दी गई है।
चार लोगों को भेजा जेल
गौरतलब है कि 3 मार्च को बालाघाट कलेक्टर दीपक आर्य ने सरकारी गेहूं की कालाबाजारी के मामले में चोर बाजारी निवारण एवं अति आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम के तहत चार व्यक्तियों को 6 माह की अवधि के लिए जेल में बंद रखने के आदेश दिए थे। इस मामले में पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इनमें नागरिक आपूर्ति निगम के केंद्र प्रभारी रितेश देशमुख व मध्य प्रदेश स्टेट वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के शाखा प्रबंधक नवीन बिसेन के साथ व्यापारी राजिक खान और परिवहनकर्ता लालू सुहाने भी शामिल है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में वेयरहाउस से सरकारी अनाज को सोसाइटी में भेजने की प्रक्रिया में कांटा पर्ची और गेट पास नियमानुसार जारी किया गया था। यह पूरी प्रक्रिया के तहत ही किया गया है। इस पूरे मामले में परिवहनकर्ता और व्यापारी को ही जिम्मेदार बताया जा रहा है।

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