सविधान के अनुच्छेद 226 के तहत “नेग्लेक्टेड चाइल्ड” प्रमुख आधार
इंदौर,
“फादर्स डे” के अवसर पर संस्था “पौरुष” के द्वारा “चाइल्ड विजीटेशन”(बच्चो से मिलने का अधिकार) के संबंध में जेंडर इक्ववल कानून बनाये जाने तथा उसे अनिवार्य रूप से लागू किये जाने के सन्दर्भ में इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर किये जाने के सम्बन्ध में प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता आयोजित की गई, जिसमे बाल कल्याण समिति इंदौर की अध्यक्षा पल्लवी पोरवाल प्रमुख अतिथि वक्ता के रूप मे आमंत्रित किया गया.
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए संस्था “पौरुष” के अध्यक्ष अशोक दशोरा ने बताया कि पति पत्नी के विवादों के चलते एक पक्ष (पत्नियां) मासूम बच्चो को लेकर चला जाता है, तथा दूसरे पक्ष (पति) से वर्षो तक बच्चो को मिलने नहीं देता है. जिसके कारण आवयस्क बच्चो के अधिकारों का हनन होता है. बच्चा “नेग्लेक्टेड चाइल्ड” (वंचित बच्चा) की श्रेणी में आ जाता है जिसके कारण उसके व्यक्तित्व का विकास रूक जाता है. उक्त्त वंचित बच्चा भविष्य में एकाकी, अंतरमुखी, मंदबुद्दि, एवं किसी किसी मामले में अपराधी एवं असामाजिक हो जाता है जो समाज के लिए नुकसानदायक होता है.
इसी मुद्दे को लेकर संस्था “पौरुष” सविधान के अनुच्छेद 226 के तहत गाइडलाइन के 16 बिन्दुओ के आधार पर इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने जा रही है. पीड़ित माता-पिता एवं बच्चो की सूची तैयार करने के साथ ही याचिका की पूरी तैयारी की जा चुकी है.
अतिथि वक्ता के रूप मे बाल कल्याण समिति इंदौर की अध्यक्षा पल्लवी पोरवाल ने बताया कि हमारे संस्थान में पति-पत्नी के विवादों के दर्जनों केस आते है, किन्तु जिन प्रकरणों में बच्चो के अधिकारों का हनन होता है सिर्फ उन्ही पर हम कार्यवाही करते है. हमने कई दम्पत्तियो को काउंसिलिंग के द्वारा बच्चो के भविष्य को देखते हुए साथ रहने के लिए तैय्यार भी किया है. समिति को बच्चो के कस्टडी दिलाने का अधिकार नहीं है, उनके अधिकारों का संरक्षण करते हुए दाम्पत्य विवादों को हल करते है
आरम्भ में पल्लवी पोरवाल का स्वागत उर्मिला चंद्रावत एवं भारती मालवीय के द्वारा किया गया आभार प्रदर्शन में प्रदेश सयोंजक प्रदीप मेश्राम ने दाम्पत्य विवादों के तथ्यात्मक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए जनहित याचिका को वर्तमान में अत्यंत आवशयक, न्यायसंगत एवं औचित्यपूर्ण बताया, क्योंकि बच्चो को लिए दोनों परिवारों का प्यार एवं संरक्षण पाने का अधिकार है जिससे बच्चो के व्यक्तित्व का सही विकास हो और एक मज़बूत समाज का निर्माण हो सके.
