*सोयाबीन की दर से 45 हजार के बजाय 35600 ही कर दी*
*संयुक्त किसान मोर्चे ने दर 55 हजार किए जाने की की मांग*
इंदौर ।फसल बीमा योजना के नाम पर मध्य प्रदेश सरकार ने एक बार फिर किसानों को ठगने का काम किया है । फसल बीमा योजना में मुआवजे की राशि तय करने के लिए स्केल आफ फाइनेंस का निर्धारण किया जाता है। स्केल आफ फायनेंस का मतलब होता है क्लेम मे दी जाने वाली अधिकतम राशि इस बार सरकार ने सोयाबीन की फसल के लिए स्केल आफ फाइनेंस की राशि से करीब 9000रूपये प्रति हेक्टेयर की कमी करते हूए 35600 रुपए कर दी है ,जो सरासर किसानों के साथ की ठगी की श्रेणी में आता है । सरकार की इस हरकत से किसानों में रोष है।

गौरतलब है कि प्राकर्तिक आपदा से फसल को हुई नुकसान का मुआवजा तय करने के लिए इसी स्केल आफ फाइनेंस से मुआवजा तय होता है । स्कैल ऑफ फाइनेंस कि दर तय करने के लिए कलेक्टरकी अध्यक्षता में,कृषि विभाग के सहकारिता विभाग के अधिकारी,मंडी समिति तथा किसानों के प्रतिनिधियों की कमेटी निर्णय करती है लेकिन इस बार प्रदेश में अधिकारियों ने मनमानी करते हुए बगैर किसी मीटिंग के दर का निर्धारण कर दिया।
संयुक्त किसान मोर्चे के रामस्वरुप मंत्री एवं बबलू जाधव ने बताया कि इंदौर जिले में पहले ही 130 से ज्यादा पंचायतों के किसानों को फसल बीमा योजना से वंचित कर दिया गया था और अब सोयाबीन के लिए स्केल फाइनेंस को कम कर दिया है जोकि किसानों के साथ अन्याय है ।
संयुक्त किसान मोर्चे मैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की है कि किसानों के साथ इस ठगी के लिए जो भी व्यक्ति जिम्मेदार है उसे दंडित किया जाए और सोयाबीन के स्कैल आफ फाइनेंस की दर पचपन हजार प्रति हेक्टेयर की जाए। वर्तमान में खेती की लागत ही बड़ी है आज खाद बीज डीज़ल दवाई सहित सभी जरुरी सामान की कीमत भी बड़ी है वही फसल के दाम भी बड़े हैं । ऐसे मैं लगता हे कि मध्य प्रदेश के अफसर देश में मंहगाई को कम हुआ मान रहे है ।