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*फ्रांस की दिग्गज कंपनी थेल्स जासूसी के लिए पाकिस्तान की कर रही मदद*

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फ्रांस की एक दिग्गज कंपनी पाकिस्तान को अपने लोगों की जासूसी करने में मदद कर रही है। यह ऐसी कंपनी है, जिसकी पूरे यूरोप में तूती बोलती है। यह कंपनी लड़ाकू विमानों, युद्धपोतों और जमीनी सेनाओं के लिए कई महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण करती है।

इस्लामाबाद: फ्रांस की एक दिग्गज कंपनी पाकिस्तान को अपने लोगों की जासूसी करने में मदद कर रही है। यह ऐसी कंपनी है, जिसकी पूरे यूरोप में तूती बोलती है। यह कंपनी लड़ाकू विमानों, युद्धपोतों और जमीनी सेनाओं के लिए कई महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण करती है। इसका नाम थेल्स ग्रुप ( Thales Group ) है। यह एक मल्टीनेशनल एयरोस्पेस और डिफेंस कॉर्पोरेशन है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी में एक्सपर्ट है। जब भी लोग थेल्स का नाम सुनते हैं तो उनके दिमाग में अक्सर लड़ाकू विमान, रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर की तस्वीर आती है। यह वही कंपनी है, जिसने फ्रांस के एयरोस्पेस इंडस्ट्री को खड़ा करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक जांच से पता चला है कि थेल्स गुपचुप तरीके से पाकिस्तान के कुख्यात डिजिटल फायरवॉल बनाने में मदद कर रही है। एमनेस्टी की रिपोर्ट “शैडोज़ ऑफ़ कंट्रोल” के अनुसार, पाकिस्तान के बड़े पैमाने पर निगरानी कार्यक्रम घरेलू नहीं हैं। वे एक गुप्त आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर हैं जो जर्मनी, फ्रांस, यूएई, चीन, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका तक फैली हुई है। साल भर चली जांच पेपर ट्रेल मीडिया, डीईआर स्टैंडर्ड, फॉलो द मनी, द ग्लोब एंड मेल, जस्टिस फॉर म्यांमार, इंटरसेकलैब और टोर प्रोजेक्ट के साथ मिलकर की गई थी।

लोगों की निगरानी कर रहा पाकिस्तान

इस जांच ने बताया है कि कैसे पाकिस्तानी अधिकारियों ने निगरानी और सेंसरशिप उपकरणों की एक गुप्त आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से उन्नत तकनीक प्राप्त की। यह सिस्टम पाकिस्तान में दो प्रोग्राम को चला रहा है, जिसमें से एक वेब मॉनिटरिंग सिस्टम (WMS) और दूसरा- लॉफुल इंटरसेप्ट मैनेजमेंट सिस्टम (LIMS) है। ये दोनों मिलकर पाकिस्तान की इंटरनेट निगरानी व्यवस्था की रीढ़ हैं। इससे बड़े पैमाने पर लोगों की निगरानी और जासूसी की जा रही है। उससे मिली जानकारी का इस्तेमाल सरकार और सेना अपने फायदे के लिए कर रही है। इतना ही नहीं, विरोध की आवाज को दबाया जा रहा है।

पहले कनाडाई कंपनी से खरीदा था फायरवॉल

रिपोर्ट के अनुसार, वेब मॉनिटरिंग सिस्टम (WMS) के रूप में जाना जाने वाला पाकिस्तान का राष्ट्रीय फायरवॉल कई बार बदला है। 2018 में स्थापित पहला वर्जन, कनाडाई कंपनी सैंडवाइन की तकनीक पर आधारित था, जो अब ऐपलॉजिक नेटवर्क्स के रूप में काम कर रही है। पाकिस्तान ने लंबे समय तक सैंडवाइन का इसतेमाल किया। रिकॉर्ड से पता चला है कि 2017 की शुरुआत में इस कंपनी ने पाकिस्तान सरकार के संबंध रखने वाली कम से कम तीन कंपनियों को उपकरण बेचे थे, जिनमें इनबॉक्स टेक्नोलॉजीज, एसएन स्काईज़ प्राइवेट लिमिटेड, और ए हैमसन इंक शामिल हैं। इस कंपनी ने 2023 में पाकिस्तान के साथ काम करना बंद कर दिया था।

पाकिस्तान ने चीन से ली है निगरानी तकनीक

पाकिस्तान ने इसके बाद चीन के गीज नेटवर्क्स के साथ फायरवॉल स्थापित किया। उसने पाकिस्तान को अपना WMS 2.0 सिस्टम सौंपा। इस नए सिस्टम के लिए अधिकांश हार्डवेयर सरकारी स्वामित्व वाली चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन की सहायक कंपनी ELINC चाइना कंपनी लिमिटेड ने बेचा था। इसे पाकिस्तान की ELC सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने खरीदा। एमनेस्टी की रिपोर्ट के अनुसार यह उन्नत फायरवॉल मूल रूप से चीन के अपने “ग्रेट फायरवॉल” का एक्सपोर्ट वेरिएंट है।

चीनी नेटवर्क में थेल्स के उपकरण लगे हुए

गीज नेटवर्क्स ने अपने WMS 2.0 सिस्टम को विदेशी पुर्जों और सॉफ्टवेयर की सहायता से बनाया है। इसमें अमेरिकी नियाग्रा नेटवर्क्स के हार्डवेयर, फ्रांस के थेल्स की लाइसेंसिंग तकनीक और चीन की न्यू H3C टेक्नोलॉजीज के सर्वर का इस्तेमाल किया गया है। इनमें से अगर किसी भी कंपोनेंट को हटा दें तो यह फायरवॉल काम नहीं करेगा। पाकिस्तान का दूसरा निगरानी प्रोग्राम लॉफुल इंटरसेप्ट मैनेजमेंट सिस्टम (LIMS) जर्मन कंपनी यूटिमाको की तकनीक पर आधारित है। पाकिस्तान ने इसे सीधे न खरीदकर अमीराती फर्म डेटाफ्यूजन के माध्यम से प्राप्त किया है।

राफेल में थेल्स के कई उपकरण शामिल

थेल्स समूह राफेल लड़ाकू विमानों के लिए कई मुख्य उपकरण और प्रणालियां प्रदान करता है, जिनमें RBE2 AESA रडार (सेंसर), स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली (सुरक्षा), ऑप्ट्रोनिक्स (टारगेटिंग सिस्टम), कम्युनिकेशन नेविगेशन और पहचान प्रणाली (CNI), कॉकपिट डिस्प्ले सिस्टम, बिजली उत्पादन प्रणालियां और स्कॉर्पियन हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले शामिल हैं। ये उपकरण राफेल की क्षमता को बढ़ाते हैं और उसे विभिन्न मिशनों में सफल होने में मदद करते हैं।

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