अग्नि आलोक

*बुरहानपुर में पांगरी बांध विवाद में फूटा गुस्सा:मुंह काला, मुर्गा बनकर सड़क पर उतरे किसान!*

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बुरहानपुर: बुरहानपुर में पांगरी बांध विवाद हर दिन नया मोड़ ले रहा है. सरकार की चुप्पी और बढ़ती नाराज़गी के बीच किसानों ने ऐसा अनोखा विरोध प्रदर्शन किया कि पूरा जिला दंग रह गया. उतावली नदी के किनारे बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने मुंह पर कालिख लगाई और मुर्गा बनकर सरकार के खिलाफ जमकर विरोध दर्ज कराया. यह विचित्र आंदोलन इलाके में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया.

यह पूरी मुहिम डॉ. रवि कुमार पटेल के नेतृत्व में हुई. जैसे ही किसान मुर्गा बनकर बैठने लगे, राहगीरों और गांववालों में खलबली मच गई. लोग रुक-रुककर इस अनोखे प्रदर्शन की तस्वीरें व वीडियो बनाते रहे. प्रदर्शन ने सोशल मीडिया पर भी आग की तरह फैलते हुए पूरी तरह सनसनी मचा दी.

किसानों का साफ आरोप है कि सरकार आदिवासी और ग्रामीण किसानों के साथ भेदभाव कर रही है. उनका कहना है कि पांगरी बांध परियोजना के तहत अधिग्रहित कृषि भूमि का दोगुना मुआवजा देने का वादा तो किया गया, लेकिन जमीन जाने के बाद भी सही मुआवजा नहीं दिया गया.
किसानों के बीच यह भावना बढ़ रही है कि उन्हें न तो सुनवाई मिल रही है और न ही प्रशासन कोई संवेदनशीलता दिखा रहा है.

एक स्थानीय किसान ने कहा कि अगर अपनी जमीन का हक मांगना अपराध है, तो हम अपराधी बनने को तैयार हैं. सरकार हमें मुर्गा बनाना चाहती है, इसलिए आज हम खुद ही मुर्गा बन गए.
दूसरे किसान ने गुस्से में कहा कि हम कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, पर कोई सुनने को तैयार नहीं. प्रशासन की चुप्पी बताती है कि किसानों की बात उनकी प्राथमिकता में नहीं है.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पांगरी बांध परियोजना को लेकर शुरू से पारदर्शिता नहीं रही. किसकी जमीन जाएगी, कितना मुआवजा मिलेगा, क्या वैकल्पिक व्यवस्था होगी—इन सवालों पर अधिकारियों ने अब तक स्पष्ट जवाब नहीं दिया है. ऐसे में किसानों में असुरक्षा बढ़ती जा रही है.

किसानों के अनुसार, जब वे अपने हक के लिए शांतिपूर्वक आवाज उठाते हैं तो प्रशासन उन्हें टाल देता है. इसीलिए अब वे मजबूर होकर अनोखे और विचित्र आंदोलन अपना रहे हैं, ताकि सरकार का ध्यान खींचा जा सके. डॉ. रवि कुमार पटेल ने कहा कि हमारे पास अब विरोध के नए तरीके ही बच गए हैं. जब सरकार सुनती नहीं, तो हम ऐसे आंदोलनों से अपनी पीड़ा दुनिया के सामने रखेंगे.”

पांगरी बांध विवाद काफी समय से चल रहा है, लेकिन प्रशासन की लगातार चुप्पी इसे और गंभीर बना रही है. किसान चेतावनी दे चुके हैं कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और उग्र होगा. फिलहाल, बुरहानपुर में किसानों का यह मुर्गा–प्रदर्शन लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है, और हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि सरकार अब कैसी प्रतिक्रिया देती है.

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