पटना बिहार में कोरोना के बीच एंबुलेंस विवाद से सियासत गर्माई हुई है। पहले भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी दर्जनों एंबुलेंस को बिना इस्तेमाल के खड़ा रखने पर विवादों में आए, तो अब एक वीडियो में सांसद का नाम लिखी एंबुलेंस रेत यानी बालू ढोती दिखाई दे रही है। इस वीडियो को पूर्व सांसद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है।
एंबुलेंस में बालू की बोरियां भरी जा रहीं
वीडियो में दिखाई दे रहा है कि एक एंबुलेंस खड़ी है। इस पर राजीव प्रताप रूडी लिखा हुआ है। एंबुलेंस के ठीक पीछे बुलेट बाइक खड़ी है और पास में ही बालू का ढेर है। बालू की बोरियां एंबुलेंस में लादी जा रही हैं। तीन लोग मिलकर बालू को एंबुलेंस में लोड कर रहे हैं जबकि दो लोग पीछे से बालू को एंबुलेंस में लोड कराने में मदद कर रहे हैं।
बिहार में क्या है एंबुलेंस का विवाद
छपरा के अमनौर में विश्व प्रभा सामुदायिक केंद्र परिसर में दो दर्जन एंबुलेंस खड़ी हुई थीं। इन्हें ढंक कर रखा गया था। यह छपरा के BJP सांसद राजीव प्रताप रूडी का गांव है। पूर्व सांसद पप्पू यादव ने शुक्रवार को इन एंबुलेंस से कवर हटाया था। उन्होंने इसका वीडियो भी पोस्ट किया था। यादव ने कहा था कि सांसद फंड (MPLADS) की दर्जनों एंबुलेंस यहां क्यों खड़ी हैं? इसकी जांच होनी चाहिए।
रूडी की सफाई- ड्राइवरों ने काम छोड़ा
सांसद राजीव प्रताप रूडी ने यादव के आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि छपरा जिले में करीब 80 एंबुलेंस है। अभी इसमें से 50 चल रही हैं। कई जगह पंचायतों में चलने वाली एंबुलेंस के ड्राइवरों ने काम छोड़ दिया था। इस वजह से बची हुई एंबुलेंस को खड़ा किया गया है। उन्होंने कहा था कि पप्पू यादव कोविड के दौरान ड्राइवर लेकर आएं और एंबुलेंस चलवाएं।
पंचायतों को एंबुलेंस देना नियमों के खिलाफ
पप्पू यादव ने कहा कि एंबुलेंस सरकारी पैसे से खरीदी गई हैं और इन्हें आवंटित करने की अथॉरिटी DM को है। एंबुलेंस का पैसा निजी काेष में क्यों डाला गया? इसे किसी भी पंचायत में निजी लोगों को नहीं सौंपा जा सकता है। यह नियमों के खिलाफ है। ड्राइवर रखने की जिम्मेदारी भी प्रशासन की है।

